BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
1 views

भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Multidimensional Poverty Index - MPI) और भारत में इसके आकलन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे तीन समान रूप से भारित आयामों (Dimensions) के अंतर्गत कुल 10 संकेतकों का उपयोग करता है।
  2. 2. नीति आयोग द्वारा जारी राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI) रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बहुआयामी गरीबी के आकलन के लिए वैश्विक MPI के 10 संकेतकों के साथ-साथ दो नए संकेतक—'मातृ स्वास्थ्य' (Maternal Health) और 'बैंक खाता' (Bank Account)—को भी शामिल किया गया है, जिससे कुल संकेतकों की संख्या 12 हो जाती है।
  3. 3. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों पर आधारित नीति आयोग के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, भारत में वर्ष 2015-16 से 2019-21 के बीच बहुआयामी गरीबी के प्रतिशत में भारी गिरावट दर्ज की गई है, और इस दौरान सबसे अधिक संख्या में लोग उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश राज्यों में गरीबी से बाहर आए हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जाता है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 3 मुख्य आयामों के अंतर्गत कुल 10 संकेतक (Indicators) शामिल होते हैं। कथन 2 गलत है: नीति आयोग द्वारा जारी 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (National MPI) वैश्विक पद्धति के 10 संकेतकों का ही पालन करता है, किंतु इसमें दो अतिरिक्त राष्ट्रीय स्तर के संकेतक 'मातृ स्वास्थ्य' और 'बैंक खाता' नहीं जोड़े गए हैं, बल्कि राष्ट्रीय MPI में भी वही 10 संकेतक उपयोग किए जाते हैं जो वैश्विक MPI में होते हैं (हालांकि कुछ राष्ट्रीय नीतिगत प्राथमिकताओं के तहत बाल एवं किशोर मृत्युदंड आदि को थोड़ा संशोधित किया जाता है, लेकिन संकेतकों की कुल संख्या 12 नहीं बल्कि वैश्विक मानकों के अनुरूप ही 10 होती है)। इसलिए दूसरा कथन गलत है। कथन 3 सही है: नीति आयोग द्वारा NFHS-4 (2015-16) और NFHS-5 (2019-21) के आंकड़ों के आधार पर जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बहुआयामी गरीबों की संख्या में भारी कमी आई है। इस दौरान उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सबसे अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
Share:

Related Questions

1858 के एक्ट के बाद भारत के 'गवर्नर जनरल' को किस नाम से जाना जाने लगा? अंतर्राज्यीय नदियों के जल विवादों के न्यायनिर्णयन से संबंधित अनुच्छेद है? अकबर के नवरत्नों में विदूषक और सलाहकार के रूप में कौन प्रसिद्ध था? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत 'संविधान संशोधन प्रक्रिया' और उसके न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, बशर्ते संशोधन विधेयक को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अलग-अलग कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित किया जाना अनिवार्य हो, और इस प्रक्रिया में राज्यों की विधानसभाओं के संयुक्त अधिवेशन का कोई प्रावधान नहीं है। 2. ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय के तेरह-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह प्रतिपादित किया था कि संसद की अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन की शक्ति असीमित है, और वह संविधान के किसी भी हिस्से—यहां तक कि 'मूल ढांचा' (Basic Structure) को भी—संशोधित या निरस्त कर सकती है। 3. संविधान (अड़तालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 368 के खंड (4) और खंड (5) को 'मिनवा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस आधार पर असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था कि वे न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति को समाप्त करते हैं, जो कि संविधान के मूल ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) और 'सार्वजनिक हित याचिका' (PIL) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए निर्देश, आदेश या रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, निषेध, अधिकार-पृच्छा और उत्प्रेषण) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह अधिकारिता सर्वोच्च न्यायालय के मूल अधिकार क्षेत्र (Original Jurisdiction) का एक हिस्सा है। 2. 'लोकूश कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' तथा ऐतिहासिक 'ए. के. गोपालन मामले' से लेकर 'मेनका गांधी मामले (1978)' तक के न्यायिक विकास के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 32 के तहत रिट अधिकारिता केवल 'प्रक्रियात्मक कानून' (Procedural Law) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के व्यापक संरक्षण का साधन है। 3. भारत में जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा को स्थापित करने का श्रेय न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्णा अय्यर को जाता है, जिसके अंतर्गत 'लॉस स्टैंडी' (Locus Standi) के पारंपरिक नियम को शिथिल किया गया, जिससे यह संभव हुआ कि प्रभावित व्यक्ति के अलावा कोई भी अन्य जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था समाज के शोषित और पीड़ित वर्गों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के विरुद्ध अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.