BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
18 views

भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान मुद्रा प्रणाली, वित्तीय प्रशासन और 'मलिक-उल-उमरा' या बाजार नियंत्रण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सल्तनत काल में सर्वप्रथम इल्तुतमिश ने शुद्ध अरबी सिक्कों की शुरुआत की, जिसके तहत उसने चांदी का 'टका' और तांबे का 'जीतल' चलाया, तथा इन सिक्कों पर टकसाल के नाम और खलीफों के प्रति निष्ठा अंकित करने की परंपरा को स्थापित किया।
  2. 2. मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा चलाई गई 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) की योजना पूरी तरह सफल रही थी, क्योंकि उसने तांबे और कांसे के सिक्कों के मूल्य को सोने और चांदी के दीनार व टका के बराबर वैधानिक दर्जा दे दिया था, जिससे राजकोष में सोने का भंडार कई गुना बढ़ गया था।
  3. 3. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी विशाल सेना के भरण-पोषण के लिए बाजार नियंत्रण नीति (Market Control Policy) लागू की थी, जिसके तहत उसने विभिन्न वस्तुओं (अनाज, वस्त्र, घोड़ों आदि) के मूल्य सख्ती से तय किए और इस व्यवस्था की देखरेख के लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: इल्तुतमिश (1210-1236 ई.) दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसने शुद्ध अरबी सिक्के चलाए। उसने चांदी का 'टका' (लगभग 175 ग्रेन) और तांबे का 'जीतल' प्रचलित किया तथा सल्तनत की मुद्रा व्यवस्था को आर्थिक स्थिरता प्रदान की। कथन 2 गलत है: मुहम्मद बिन तुगलक की 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency - 1329-30 ई.) योजना अपने समय से आगे होने और प्रशासनिक मशीनरी की विफलता के कारण पूरी तरह असफल साबित हुई। तांबे और कांसे के सिक्कों की बड़े पैमाने पर जाली नकल (Counterfeiting) होने लगी, जिससे अर्थव्यवस्था चरमरा गई और सुल्तान को अंततः सोने-चांदी के सिक्के देकर तांबे के सिक्के वापस लेने पड़े। कथन 3 सही है: अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी एक स्थायी और विशाल सेना को कम वेतन में बनाए रखने के लिए क्रांतिकारी 'बाजार नियंत्रण नीति' लागू की थी। इसके तहत अनाज, कपड़े, दासों और पशुओं के दाम निश्चित कर दिए गए थे। इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 'दीवान-ए-रियासत' (बाजार का अधीक्षक) और 'शहना-ए-मंडी' (बाजार का बाजार अधिकारी) जैसे महत्वपूर्ण अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी।
Share:

Related Questions

→ भारतीय पर्यावरण कानून और 'वन अधिकार अधिनियम, 2006' (Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights) Act, 2006) के प्रावधानों तथा उनके कार्यान्वयन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह अधिनियम वन क्षेत्रों में पीढ़ियों से निवास करने वाले अनुसूचित जातियों (SCs) और अन्य पारंपरिक वनवासियों (OTFDs) को व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों प्रकार के वन अधिकारों की मान्यता देता है, बशर्ते यह साबित करना अनिवार्य हो कि वे कम से कम पिछले 75 वर्षों से उस विशिष्ट वन भूमि पर निवास कर रहे थे। 2. अधिनियम के अंतर्गत 'ग्राम सभा' (Gram Sabha) को वन अधिकार दावों का सत्यापन करने, उन्हें प्रारंभिक स्तर पर संसाधित करने और वन क्षेत्रों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र निकाय के रूप में वैधानिक शक्ति प्रदान की गई है। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'वाइल्डलाइफ फर्स्ट बनाम पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (2019)' मामले में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय के तहत, जिन वनवासियों के दावे खारिज कर दिए गए थे, उन्हें वनों से बेदखल करने का आदेश दिया गया था, जिससे इस अधिनियम के अंतर्गत वन अधिकार दावों की पारदर्शी प्रक्रिया और उसकी सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, 'महायान बौद्ध धर्म' तथा 'बौद्धिसत्वों की अवधारणा' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महायान बौद्ध धर्म का उदय कुषाण काल के दौरान, विशेषकर कनिष्क के शासनकाल में आयोजित चतुर्थ बौद्ध संगीति के उपरांत स्पष्ट रूप से सामने आया, जिसमें बुद्ध की मूर्तियों की पूजा और बोधिसत्वों की परिकल्पना को मुख्यधारा में अपनाया गया। 2. वज्रपाणि, अवलोकितेश्वर और मैत्रेय प्रमुख बोधिसत्व हैं, जिनमें से 'अवलोकितेश्वर' (पद्मपाणि) को भविष्य के बुद्ध के रूप में चित्रित किया गया है जो इस कल्प के अंत में धर्म की पुनर्स्थापना के लिए धरती पर अवतरित होंगे। 3. महायान परंपरा में 'पारमिता' (Perfections) के मार्ग का अनुसरण करते हुए बोधिसत्वों द्वारा स्वयं की व्यक्तिगत मुक्ति (निर्वाण) से पहले समस्त sentient beings (प्राणियों) की मुक्ति का संकल्प लिया जाता है, जिसे महायान दर्शन में 'बोधिसत्व आदर्श' कहा गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124(7)' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों पर लगने वाले निर्बंधनों (Restrictions) और 'अनुच्छेद 128' के अंतर्गत उनकी पुनर्नियुक्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 124(7) स्पष्ट रूप से यह उपबंध करता है कि उच्चतम न्यायालय के रूप में पद धारण करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी भी न्यायालय या प्राधिकारी के समक्ष pleading या अधिनियमन (act) नहीं करेगा, जिसका अर्थ है कि वे सेवानिवृत्ति के बाद देश के किसी भी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में वकालत (Practice) नहीं कर सकते हैं। 2. संविधान का अनुच्छेद 128 भारत के मुख्य न्यायमूर्ति को राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्चतम न्यायालय के किसी भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश को, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए अर्हित है, उच्चतम न्यायालय की बैठकों में उपस्थित होने और सेवा करने के लिए अनुरोध करने का पूर्ण अधिकार प्रदान करता है। 3. अनुच्छेद 128 के अधीन उच्चतम न्यायालय की बैठकों में उपस्थित होने और सेवा करने के लिए अनुरोध किए गए किसी भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को न्यायालय के न्यायाधीश की सभी अधिकारिता, शक्तियाँ और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, तथा उन्हें राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित वेतन और भत्ते दोनों मिलते हैं, भले ही वे पेंशन भी प्राप्त कर रहे हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' (Biodiversity Hotspots) और भारत में स्थित जैव विविधता हॉटस्पॉट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' की अवधारणा का प्रतिपादन सर्वप्रथम ब्रिटिश पर्यावरणविद् नॉर्मन मायर्स (Norman Myers) द्वारा किया गया था, और किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि उसमें कम-से-कम 1,500 स्थानिक (Endemic) पौधों की प्रजातियाँ हों और उसने अपनी मूल वानस्पतिक आवरण का कम-से-कम 70% या उससे अधिक भाग खो दिया हो। 2. विश्व स्तर पर वर्तमान में कुल 36 मान्यता प्राप्त जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं, जिनमें से पूर्ण रूप से भारतीय भूभाग के अंतर्गत आने वाले दो सबसे प्रमुख हॉटस्पॉट 'पश्चिमी घाट' (Western Ghats) और 'सुंडालैंड' (Sundaland) हैं, जबकि पूर्वी हिमालयी क्षेत्र को इसमें शामिल नहीं किया जाता है। 3. भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत देश के इन सभी हॉटस्पॉट क्षेत्रों को 'पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र' (Eco-Sensitive Zones - ESZs) के रूप में सीधे और समान रूप से अधिसूचित किया गया है, जिसके तहत खनन और औद्योगिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' (आपात उपबंध - अनुच्छेद 352 से 360) के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency - अनुच्छेद 352) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के संबंध में युद्ध, बाह्य आक्रमण या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर की जा सकती है, तथा मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था, जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था। 2. मंत्रिमंडल (Cabinet) की लिखित संस्तुति प्राप्त होने के पश्चात ही राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है, और इस प्रकार उद्घोषित आपातकाल को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी घोषणा की तिथि से एक महीने के भीतर विशेष बहुमत (कुल सदस्यों का बहुमत तथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है। 3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के प्रभाव के अंतर्गत संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह मौलिक अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, किंतु अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का निलंबन किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जा सकता है, और अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह आदेश द्वारा भाग III के अन्य मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.