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भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Multidimensional Poverty Index - MPI) और उसके मापन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन समान रूप से भारित आयामों (Dimensions) का उपयोग करता है।
- 2. नीति आयोग द्वारा जारी राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक में वैश्विक MPI के 10 संकेतकों के अलावा दो अतिरिक्त संकेतक—'मातृ स्वास्थ्य' (Maternal Health) और 'बैंक खाता' (Bank Account)—को शामिल किया गया है, जिससे कुल संकेतकों की संख्या 12 हो जाती है।
- 3. राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 10 संकेतकों में से कम से कम एक तिहाई (33.3% या उससे अधिक) भारित अभावों का सामना करता है, तो उसे बहुआयामी रूप से गरीब माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन प्रमुख आयाम (Dimensions) शामिल हैं, जिन्हें समान रूप से भारित (प्रत्येक को 1/3 भार) किया जाता है।
कथन 2 गलत है: नीति आयोग द्वारा जारी राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National MPI) में वैश्विक सूचकांक के 3 आयामों और 10 संकेतकों को ही आधार बनाया जाता है, लेकिन इसमें 'मातृ स्वास्थ्य' (Maternal Health) अलग से कोई नया जोड़ा गया संकेतक नहीं है। राष्ट्रीय MPI में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के अंतर्गत कुल 12 संकेतक शामिल हैं (वैश्विक 10 संकेतकों में 'मातृ स्वास्थ्य' शामिल नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कुछ संशोधनों के साथ 12 संकेतकों का उपयोग किया जाता है जैसे कि मातृत्व स्वास्थ्य और बैंक खाते को जोड़ा गया है, लेकिन आधिकारिक तौर पर नीति आयोग के सूचकांक में कुल 12 संकेतक हैं, फिर भी कथन 2 में दिए गए विवरण में तकनीकी रूप से राष्ट्रीय MPI में 'मातृ स्वास्थ्य' सीधे तौर पर शामिल नहीं है, बल्कि पोषण, बाल एवं किशोर मृत्युदंड, मातृ स्वास्थ्य आदि को समेकित किया जाता है। चूँकि नीति आयोग के MPI में 12 संकेतक (पोषण, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, बाल और किशोर मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य, बैंक खाते आदि) हैं, लेकिन वैश्विक MPI के 10 संकेतकों में से राष्ट्रीय MPI में संकेतकों की कुल संख्या 12 है, किंतु कथन में दिए गए विशिष्ट शब्द 'मातृ स्वास्थ्य' को लेकर भ्रम हो सकता है। अधिक स्पष्ट रूप से, नीति आयोग के राष्ट्रीय MPI में 12 संकेतक हैं, लेकिन वैश्विक MPI में 10 हैं। हालांकि, मुख्य रूप से यह सूचकांक अल्काट्रे-फोस्टर (Alkire-Foster) पद्धति पर आधारित है)।
कथन 3 सही है: राष्ट्रीय और वैश्विक MPI दोनों में अल्काट्रे-फोस्टर पद्धति का उपयोग किया जाता है, जिसके तहत यदि कोई व्यक्ति कुल भारित अभावों के 33.3% (एक-तिहाई) या उससे अधिक से पीड़ित है, तो उसे बहुआयामी रूप से गरीब (Multidimensionally Poor) classified किया जाता है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule) और इसके न्यायिक पुनरावलोकन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार, यदि किसी राज्य का राज्यपाल इस आशय का प्रतिवेदन देता है या अन्यथा समाधान हो जाता है कि उस राज्य की सरकार संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती है, तो राष्ट्रपति उस राज्य के शासन के सभी या कुछ कृत्य अपने हाथ में ले सकता है।
2. ऐतिहासिक 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' वाद में उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह निर्णय दिया था कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायोचित (Justiciable) है और यदि उद्घोषणा का आधार अप्रासंगिक, तर्कहीन या दुर्भावनापूर्ण पाया जाता है, तो न्यायालय उस उद्घोषणा को असंवैधानिक घोषित कर सकता है।
3. एस.आर. बोम्मई वाद के निर्णय के पश्चात, संसद द्वारा पारित 'चवालीसवें संविधान संशोधन अधिनियम' के माध्यम से यह अनिवार्य कर दिया गया कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी घोषणा की तारीख से दो महीने के भीतर साधारण बहुमत द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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1. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA), राज्य स्तर पर 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBB) और स्थानीय स्तर पर 'जैविक विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMCs) का त्रि-स्तरीय संस्थागत ढांचा स्थापित किया गया है, और NBA एक सांविधिक (Statutory) एवं स्वायत्त निकाय है।
2. इस अधिनियम के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि देश के भीतर जैविक संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग या जैव-सर्वेक्षण करने से पूर्व किसी भी भारतीय नागरिक या कंपनी को 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, भले ही वे स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का उपयोग कर रहे हों या नहीं।
3. 'पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबरिटीज बनाम भारत संघ' या अन्य संबंधित न्यायिक मामलों में न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और जैविक संसाधनों तक पहुंच को विनियमित करने के लिए BMCs द्वारा तैयार किया जाने वाला 'जन जैव विविधता रजिस्टर' (PBR) कानूनी रूप से एक गोपनीय दस्तावेज है जिसे जनता या किसी गैर-सरकारी संगठन के साथ साझा नहीं किया जा सकता है।
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