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भारतीय इतिहास और मध्यकालीन प्रशासन के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान 'दीवान-ए-आरिज' (Diwan-e-Ariz) विभाग और सैन्य संगठन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'दीवान-ए-आरिज' विभाग की स्थापना सुल्तान बलबन द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के सैन्य मामलों का प्रबंधन करना और सेना की सीधी देखरेख, भर्ती तथा निरीक्षण करना था, हालांकि सेना का सर्वोच्च कमांडर (प्रमुख) सुल्तान स्वयं होता था।
- 2. इस विभाग के प्रमुख अधिकारी को 'आरिज-ए-मुमालिक' कहा जाता था, जिसका मुख्य कार्य सैनिकों के हुलिया का पंजीकरण करना और घोड़ों को दागने की व्यवस्था को लागू करना था ताकि सेना में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
- 3. सल्तनत काल में सैन्य व्यवस्था मूल रूप से 'इक्ता' प्रणाली और 'हश्म-ए-कल्ब' (केन्द्रीय सेना) पर आधारित थी, जिसमें बलबन ने तुर्क अमीरों के प्रभाव को संतुलित करने और अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए शाही सेना को अत्यधिक पेशेवर और वफादार बनाने पर विशेष बल दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 'दीवान-ए-आरिज' (सैन्य विभाग) की स्थापना सुल्तान बलबन द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य मंगol आक्रमणों का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत और सुसंगठित सेना तैयार करना था। बलबन ने इस विभाग को दीवान-ए-विजारत (वित्त विभाग) के वित्तीय नियंत्रण से स्वतंत्र कर दिया था ताकि सेना को सुदृढ़ किया जा सके।
कथन 2 गलत है: 'आरिज-ए-मुमालिक' सैन्य विभाग का प्रमुख होता था, जो सैनिकों की भर्ती और निरीक्षण करता था, किंतु 'सैनिकों के हुलिया का पंजीकरण' और 'घोड़ों को दागने (Daag & Huliya) की प्रथा' को बड़े पैमाने पर व्यवस्थित रूप से सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी द्वारा शुरू किया गया था, न कि बलबन या केवल आरिज-ए-मुमालिक द्वारा।
कथन 3 सही है: सल्तनत काल में सैन्य व्यवस्था इक्ता प्रणाली (भूमि राजस्व आधारित) और केंद्र की प्रत्यक्ष सेना (हश्म-ए-कल्ब) पर आधारित थी। बलबन ने अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने और आंतरिक विद्रोहों तथा बाहरी आक्रमणों से निपटने के लिए एक शक्तिशाली और वफादार केंद्रीय सेना का गठन किया था।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'जेट स्ट्रीम' (Jet Streams) तथा मौसम और जलवायु पर इनके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जेट स्ट्रीम्स ऊपरी क्षोभमंडल में उच्च गति से बहने वाली संकीर्ण हवाओं की पेटियाँ हैं, जो मुख्य रूप से ध्रुवीय मोर्चे (Polar Front) और उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब क्षेत्रों के पास तापमान के भारी अंतर के कारण उत्पन्न होती हैं।
2. ग्रीष्म ऋतु के दौरान, 'उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम' (Subtropical Westerly Jet Stream) का मार्ग तिब्बत के पठार के उत्तर की ओर विस्थापित हो जाता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति और उसके तीव्र विकास में सहायता मिलती है।
3. 'ध्रुवीय पूर्ववर्ती जेट स्ट्रीम' (Polar Easterly Jet Stream) शीतकाल में भारत के उत्तरी भागों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) लाने के लिए पूरी तरह उत्तरदायी होती है, जो भूमध्य सागर से नमी प्राप्त करके उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को Guardian of the Blue Horizon से सम्मानित किया गया, यह किस देश का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 123' के अंतर्गत राष्ट्रपति की 'अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति' (Ordinance-making Power) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद के सत्र में न होने की स्थिति तक ही सीमित है, और यह शक्ति सह-विस्तृत (Co-extensive) है उस विषय-क्षेत्र तक जिस पर संसद कानून बना सकती है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'डी.सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य (1987)' मामले में यह प्रतिपादित किया गया कि कार्यपालिका द्वारा अध्यादेशों का बार-बार पुनःप्रख्यापन (Repromulgation) करना संवैधानिक धोखाधड़ी (Constitutional Fraud) है और यह संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।
3. राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश को संसद की पुनर्समेकन बैठक (Re-assembly) के बाद दोनों सदनों द्वारा छह सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से अनुमोदित किया जाना चाहिए, अन्यथा यह स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, और इसे किसी भी स्थिति में छह महीने से अधिक की अवधि के लिए आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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अनुच्छेद 21-A के कार्यान्वयन के लिए कौन सा अधिनियम पारित किया गया था?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय अम्लीकरण' (Ocean Acidification) तथा समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय अम्लीकरण मुख्य रूप से वायुमंडल से मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के बड़े पैमाने पर महासागरीय अवशोषण के कारण होता है, जिससे समुद्री जल के pH मान में वृद्धि होती है और जल अधिक क्षारीय (Alkaline) हो जाता है।
2. जब कार्बन डाइऑक्साइड समुद्री जल में घुल जाती है, तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनिक अम्ल ($H_2CO_3$) बनाती है, जो वियोजित होकर हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) और कार्बोनेट आयनों ($CO_3^{2-}$) की सांद्रता को बढ़ा देता है।
3. महासागरीय अम्लीकरण के परिणामस्वरूप कार्बोनेट आयनों की उपलब्धता में कमी आती है, जिससे कैल्साइट और एरागैनाइट जैसे कैल्शियम कार्बोनेट खनिजों का उपयोग करके अपने कंकाल और कवच (Shells) बनाने वाले जीवों, जैसे प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) और पटेरोपोड (Pteropods) के लिए निर्माण और रखरखाव करना अत्यंत कठिन हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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