त्वरित लिंक्स
Civil services
18 views
भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक वित्त' (Public Finance) और 'राजकोषीय समेकन' (Fiscal Consolidation) के दायरे में आने वाले 'राजकोषीय घाटे' (Fiscal Deficit) और 'प्रभावी राजस्व घाटे' (Effective Revenue Deficit) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit) पारंपरिक राजस्व घाटे और केंद्र सरकार द्वारा राज्यों तथा स्वायत्त निकायों को पूंजीगत संपत्तियों के सृजन के लिए दिए जाने वाले अनुदानों के बीच का अंतर होता है, जिसे पहली बार वर्ष 2011-2012 के केंद्रीय बजट में पेश किया गया था ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि राजस्व व्यय का कितना हिस्सा वास्तव में उपभोग के लिए है न कि पूंजी निर्माण के लिए।
- 2. राजकोषीय घाटा सरकार की कुल प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) और कुल व्यय के बीच का अंतर होता है, और राजकोषीय घाटे का उच्च स्तर हमेशा अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति (Inflation) को प्रत्यक्ष और तत्काल रूप से जन्म देता है, भले ही सरकार द्वारा लिए गए उधार का उपयोग पूरी तरह से उत्पादक बुनियादी ढांचे (Productive Infrastructure) के विकास में किया गया हो।
- 3. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के संशोधित प्रावधानों के तहत सरकार का यह लक्ष्य निर्धारित किया गया था कि वह राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3 प्रतिशत तक सीमित करे, किंतु असाधारण आर्थिक परिस्थितियों या महामारी जैसे झटकों के कारण इस लक्ष्य से विचलन (Deviation) की अनुमति देने के लिए अधिनियम में एक 'एस्केप क्लॉज' (Escape Clause) का प्रावधान भी शामिल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit) पारंपरिक राजस्व घाटे में से पूंजीगत संपत्तियों के सृजन के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तथा अन्य निकायों को दिए गए अनुदानों को घटाकर निकाला जाता है। इसे रंगराजन समिति की सिफारिश पर 2011-12 के बजट में पेश किया गया था ताकि यह देखा जा सके कि राजस्व व्यय का कितना भाग वास्तविक उपभोग में जा रहा है। कथन 2 गलत है: राजकोषीय घाटे का उच्च स्तर हमेशा मुद्रास्फीति को जन्म नहीं देता है। यदि सरकार द्वारा लिए गए ऋण का उपयोग उत्पादक परिसंपत्तियों (जैसे सड़कें, बंदरगाह, बिजली संयंत्र आदि) के निर्माण में किया जाता है, तो यह दीर्घकाल में उत्पादन क्षमता को बढ़ाता है और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। मुद्रास्फीति मुख्य रूप से तब बढ़ती है जब राजकोषीय घाटे का वित्तपोषण अत्यधिक मात्रा में अप्रतिबंधित मुद्रा मुद्रण (Monetization) या अनुत्पादक खपत व्यय के माध्यम से किया जाता है। कथन 3 सही है: FRBM अधिनियम, 2003 (संशोधित) के तहत राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3% तक लाने का लक्ष्य रखा गया था, और इसमें मंदी, राष्ट्रीय सुरक्षा या कृषि संकट जैसी असाधारण स्थितियों के लिए 'एस्केप क्लॉज' (Escape Clause) का प्रावधान है जिसके तहत लक्ष्यों से विचलन की अनुमति मिलती है।
Related Questions
→
संस्कृत गद्य का प्रारंभिक और उत्कृष्ट उदाहरण किस अभिलेख को माना जाता है?
→
भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित विधिक प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत की गई थी, और यह भारत का ऐसा पहला विशेष न्यायिक निकाय है जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) की सख्त प्रक्रियाओं से बंधा हुआ नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत' (Principles of Natural Justice) के आधार पर कार्य करता है।
2. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के तहत अधिकरण को यह वैधानिक बाध्यता दी गई है कि वह पर्यावरण से संबंधित मामलों के आवेदन या अपील को दर्ज करने की तारीख से अधिकतम 6 महीने के भीतर उसका अंतिम निपटान करेगा।
3. NGT के निर्णयों या आदेशों के विरुद्ध प्रत्यक्ष रूप से सर्वोच्च न्यायालय में अपील केवल 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के विशिष्ट प्रावधानों के अंतर्गत ही की जा सकती है, और अधिकरण के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालयों (High Courts) के पास अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction) का कोई अधिकार नहीं रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1920-1922 के दौरान चलाए गए 'असहयोग आंदोलन' (Non-Cooperation Movement) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का कांग्रेस द्वारा औपचारिक रूप से समर्थन और अनुमोदन किया गया था, जहाँ सी.आर. दास ने इस प्रस्ताव को स्वयं प्रस्तावित किया था, जबकि इसके ठीक पहले कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में लाला लाजपत राय ने इस आंदोलन के प्रस्ताव को प्रस्तुत किया था।
2. आंदोलन के दौरान कार्यक्रम के सकारात्मक पहलुओं (Constructive Programmes) पर भी विशेष बल दिया गया, जिसके अंतर्गत देश भर में राष्ट्रीय विद्यालयों और कॉलेजों की स्थापना की गई, सरकारी अदालतों का बहिष्कार करते हुए पंचायतों के माध्यम से आपसी विवादों का निपटारा किया गया, और खादी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ 'अस्पृश्यता निवारण' को भी इसके मुख्य एजेंडे में शामिल किया गया।
3. फरवरी 1922 में गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा नामक स्थान पर हुई हिंसा की घटना से क्षुब्ध होकर महात्मा गांधी ने कांग्रेस की कार्य समिति की सहमति के बिना ही व्यक्तिगत रूप से एकतरफा निर्णय लेते हुए बारդोली (Bardoli) में असहयोग आंदोलन को अचानक स्थगित करने की घोषणा कर दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के 'सलाहकार क्षेत्राधिकार' (Advisory Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति विधि या तथ्य के किसी ऐसे व्यापक सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर, जो उत्पन्न हो चुका है या जिसके उत्पन्न होने की संभावना है, सर्वोच्च न्यायालय की राय मांग सकता है, और सर्वोच्च न्यायालय के लिए ऐसी किसी भी बात पर राष्ट्रपति को अपनी राय देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।
2. यदि राष्ट्रपति द्वारा संविधान पूर्व संधियों, समझौतों, प्रसंविदाओं या अन्य ऐसी ही साठगाँठ से उत्पन्न किसी विवाद के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श मांगा जाता है, तो सर्वोच्च न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य होता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सलाहकार क्षेत्राधिकार के अंतर्गत दी गई राय केवल एक विधिक सलाह (Legal Advice) होती है, जो राष्ट्रपति के लिए किसी भी स्थिति में बाध्यकारी नहीं होती है, और न ही यह न्यायालय द्वारा दिया गया कोई निर्णय (Judgment) होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'जेट स्ट्रीम' (Jet Streams) और उनकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जेट स्ट्रीम्स ऊपरी क्षोभमंडल (Upper Troposphere) में अत्यधिक तीव्र गति से बहने वाली भू-विक्षेपी (Geostrophic) हवाओं की पेटियाँ हैं, जो मुख्य रूप से ध्रुवीय और उष्णकटिबंधीय वायु द्रव्यमानों के बीच तापमान के तीव्र अंतर के कारण उत्पन्न होती हैं।
2. पृथ्वी के दोनों गोलार्धों में वर्ष भर बहने वाली 'ध्रुवीय वाताग्र जेट स्ट्रीम' (Polar Front Jet Stream) और 'उप-उष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम' (Subtropical Westerly Jet Stream) हमेशा पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती हैं, और इनमें ऋतुओं के परिवर्तन के साथ अपनी स्थिति बदलने की कोई प्रवृत्ति नहीं होती है।
3. भारत के संदर्भ में, ग्रीष्मकाल के दौरान 'उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम' (Tropical Easterly Jet Stream) का तिब्बत के पठार के ऊपर उत्पन्न होना और प्रवाहित होना भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून (South-West Monsoon) के सक्रिय होने और उसके आगमन के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.