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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मध्यकालीन भारत की वास्तुकला और विशेष रूप से 'सुल्तानी काल' (Delhi Sultanate) तथा 'मुग़ल काल' की निर्माण शैलियों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दिल्ली सल्तनत के प्रारंभिक काल में वास्तुकला के अंतर्गत प्रयुक्त 'तुर्क-अफगान शैली' या 'इंडो-इस्लामिक शैली' में भवनों के निर्माण के लिए मुख्य रूप से 'मेहराब और गुंबद' (Arch and Dome) प्रणाली को अपनाया गया, जिसके निर्माण में शहतीर और धरन (Trabeate) पद्धति का प्रयोग पूरी तरह से वर्जित कर दिया गया था और केवल सच्ची मेहराब (True Arch) का ही उपयोग किया गया था।
- 2. विजयनगर साम्राज्य की वास्तुकला शैली (Vijayanagara Architecture) में 'मंडप' (विशेषकर कल्याण मंडप), 'अम्मन मंदिर' (Deity's Consort Shrines) और स्तंभों पर जटिल पौराणिक नक्काशी की विशेषताएँ प्रमुख थीं, तथा इसमें मंदिर परिसरों के भीतर विशाल प्रवेश द्वार या 'राय गोपुरम' (Rayagopurams) का निर्माण किया जाना उत्तर भारतीय नागर शैली की तुलना में अधिक भव्य और विशिष्ट था।
- 3. मुग़ल सम्राट शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान वास्तुकला में लाल बलुआ पत्थर के स्थान पर 'सफेद संगमरमर' (White Marble) के प्रयोग को प्राथमिकता दी गई, तथा सममितीय योजना (Symmetrical Planning), 'पित्रा ड्यूरा' (Pietra Dura) तकनीक (यानी संगमरमर की दीवारों में कीमती रत्नों और पत्थरों की जड़ाई का कार्य) और औपचारिक 'चारबाग शैली' (Chahar Bagh Style) के बगीचों का एकीकरण इस काल की इमारतों की मुख्य पहचान बन गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है: दिल्ली सल्तनत के प्रारंभिक काल (यानी इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के शुरुआती दौर) में मुस्लिम शासकों ने मेहराब और गुंबद की तकनीक को तो अपनाया, किंतु उन्होंने भारतीय शिल्पकारों की पारंपरिक 'शहतीर और धरन' (Trabeate / Beam and Lintel) पद्धति को पूरी तरह से नहीं छोड़ा। शुरुआती इमारतों (जैसे कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद या अलाई दरवाजा) में मेहराबों के निर्माण के लिए भी अक्सर भारतीय परंपरा की करबत (Corbelled) शैली या शहतीर पद्धति का ही संमिश्रण देखा जाता था, और 'सच्ची मेहराब' (True Arch) का विकास क्रमिक रूप से हुआ था, इसे पूरी तरह वर्जित नहीं किया गया था। कथन 2 सत्य है: विजयनगर वास्तुकला की मुख्य विशेषताओं में लंबे और अलंकृत स्तंभों वाले मंडप, 'कल्याण मंडप', और विशेष रूप से विशाल तथा ऊँचे 'राय गोपुरम' शामिल हैं, जो उत्तर भारत के मंदिरों के छोटे प्रवेश द्वारों की तुलना में अत्यंत भव्य और ऊँचे होते थे। कथन 3 सत्य है: शाहजहाँ के काल को मुग़ल वास्तुकला का स्वर्ण युग माना जाता है, जिसमें लाल बलुआ पत्थर के स्थान पर सफेद संगमरमर का अत्यधिक प्रयोग हुआ, पित्रा ड्यूरा (Pietra Dura) तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया और चारबाग शैली के बगीचों का वास्तुकला के साथ पूर्ण समन्वय देखा गया।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 124' के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति और 'कॉलेजियम प्रणाली' (Collegium System) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा मुख्य न्यायमूर्ति (CJI) और सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के ऐसे अन्य न्यायाधीशों के परामर्श से की जाएगी जिन्हें राष्ट्रपति इस प्रयोजन के लिए आवश्यक समझे।
2. 'द्वितीय न्यायाधीश मामला' (Second Judges Case, 1993) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्धारित किया कि 'परामर्श' (Consultation) का अर्थ 'सहमति' (Concurrence) है, और मुख्य न्यायमूर्ति का परामर्श कॉलेजियम की सिफारिशों के अनुरूप होना चाहिए, जिसमें मुख्य न्यायमूर्ति के साथ सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होंगे।
3. राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम, 2014 को उच्चतम न्यायालय द्वारा उसके चौथे न्यायाधीश मामले (2015) में इस आधार पर असंवैधानिक घोषित कर दिया गया था कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) सिद्धांत का उल्लंघन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपातकालीन उपबंध' (Emergency Provisions - Articles 352-360) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है, यदि उसे इस बात का समाधान हो गया है कि युद्ध, बाह्य आक्रमण या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के कारण भारत की सुरक्षा को गंभीर खतरा है, तथा मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द के स्थान पर 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग किया गया था जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा बदला गया था।
2. अनुच्छेद 356 के तहत यदि किसी राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि उस राज्य की सरकार संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती है, तो राष्ट्रपति उस राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकता है, और इस प्रकार की घोषणा के अनुमोदन के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा इसे जारी होने की तारीख से दो माह के भीतर साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित किया जाना अनिवार्य होता है।
3. अनुच्छेद 360 के अंतर्गत वित्तीय आपातकाल की घोषणा करने की शक्ति राष्ट्रपति को प्राप्त है, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिससे भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग का वित्तीय स्थायित्व या साख खतरे में है, तथा वित्तीय आपातकाल की घोषणा को भी संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदन मिलना आवश्यक होता है, और एक बार अनुमोदित होने के बाद यह अनिश्चित काल तक तब तक प्रवृत्त रहता है जब तक कि राष्ट्रपति इसे स्वयं एक नई घोषणा द्वारा वापस नहीं ले लेता।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-A' के अंतर्गत 'मूल कर्तव्य' (Fundamental Duties - अनुच्छेद 51A) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में अंतःस्थापित किया गया था।
2. मूल कर्तव्य केवल भारत के नागरिकों पर ही लागू होते हैं, और इनमें से कुछ कर्तव्य प्रकृति में नैतिक हैं जबकि अन्य नागरिक कर्तव्य हैं, किंतु संविधान में इन्हें न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय (Justiciable) बनाया गया है अर्थात इनके उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय से रिट जारी करवाई जा सकती है।
3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 द्वारा संविधान में एक नया मूल कर्तव्य (खंड 'k') जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य (Ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करना माता-पिता या संरक्षक का कर्तव्य होगा।
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