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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVI' (कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध - अनुच्छेद 330 से 342A) तथा इसके अंतर्गत 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग' (NCBC) से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के 102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 द्वारा 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग' (NCBC) को एक संवैधानिक निकाय का दर्जा प्रदान किया गया और इसके लिए संविधान में नया अनुच्छेद 338B अंतःस्थापित किया गया, जिसके तहत आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 342A के अनुसार राष्ट्रपति, किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में, उस राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के पश्चात्, लोक अधिसूचना द्वारा उन सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBCs) को विनिर्दिष्ट कर सकता है जिन्हें उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के प्रयोजनों के लिए 'पिछड़ा वर्ग' माना जाएगा।
- 3. 105वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2021 द्वारा अनुच्छेद 342A में संशोधन करके यह स्पष्ट किया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने स्वयं के प्रयोजनों के लिए सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की अपनी सूची (State List of SEBCs) तैयार करने और बनाए रखने का अधिकार है, और यह अधिकार केवल केंद्र सरकार या राष्ट्रपति के पास ही निहित नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 102वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2018 द्वारा संविधान में नया अनुच्छेद 338B जोड़ा गया, जिससे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को एक संवैधानिक निकाय बनाया गया। इस आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होते हैं, जिनकी सेवा शर्तें और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
कथन 2 सही है: अनुच्छेद 342A(1) के अनुसार राष्ट्रपति, किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में, राज्यपाल से परामर्श करने के बाद, लोक अधिसूचना द्वारा उन सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को विनिर्दिष्ट कर सकता है जो उस राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के लिए पिछड़े वर्ग समझे जाएंगे।
कथन 3 सही है: 105वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2021 सुप्रीम कोर्ट के मराठा आरक्षण मामले के निर्णय के बाद लाया गया था, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास अपनी स्वयं की सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची तैयार करने और उसे अद्यतन करने का अधिकार है। अतیः तीनों कथन सही हैं।
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'हरित गृह प्रभाव' (Greenhouse Effect) और 'जलवायु परिवर्तन' से संबंधित 'क्लाउड फीडबैक' (Cloud Feedback) और 'एरोसोल' (Aerosols) के प्रभाव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बादलों का जलवायु पर दोतरफा प्रभाव पड़ता है; जहाँ कम ऊँचाई वाले घने बादल (Low-level clouds) सूर्य के प्रकाश को अंतरिक्ष में वापस परावर्तित करके पृथ्वी की सतह को ठंडा करने (Albedo Effect) का कार्य करते हैं, वहीं ऊँचाई वाले पतले बादल (High-level clouds) पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाली लंबी तरंगों के विकिरण (Terrestrial Radiation) को रोककर हरित गृह प्रभाव को बढ़ाते हैं।
2. वायुमंडल में मौजूद 'सल्फेट एरोसोल' (Sulfate Aerosols) सूर्य के विकिरण को सीधे परावर्तित करने के साथ-साथ बादलों के निर्माण को बढ़ावा देकर (Cloud Albedo Enhancement) वैश्विक तापन (Global Warming) को आंशिक रूप से रोकने या कम करने में एक शीतलन कारक (Cooling Agent) के रूप में कार्य करते हैं।
3. 'ब्लैक कार्बन' (Black Carbon) या काली कालिख एक प्रकार का एरोसोल है जो वायुमंडल में सौर विकिरण को अवशोषित करके वातावरण को गर्म करता है, किंतु जब यह बर्फ या हिमनदों (Glaciers) की सतह पर जमा होता है, तो उनकी परावर्तन क्षमता (Albedo) को बढ़ा देता है, जिससे उनके पिघलने की गति धीमी हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) तथा इसके न्यायिक दायरे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति एक कार्यकारी शक्ति (Executive Power) है, और संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति मृत्युदंड (Death Sentence) सहित किसी भी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति को क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार प्रदान कर सकते हैं, जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है या जो सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिया गया दंडादेश हो।
2. 'एके गोपालन बनाम मद्रास राज्य' और ऐतिहासिक 'इंद्रजीत सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति को अनुच्छेद 72 के तहत अपनी क्षमादान की शक्ति का प्रयोग करने के लिए केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह (Aid and Advice) के बिना अपनी स्वतंत्र और अनन्य राजनीतिक इच्छा से निर्णय लेने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
3. 'ईश्वर सिंह बनाम द स्टेट ऑफ पंजाब' तथा 'तजिंदर सिंह सोढ़ी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया' जैसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का दायरा अत्यंत सीमित है, और यदि राष्ट्रपति द्वारा किसी दया याचिका (Mercy Petition) पर मनमाने ढंग से, दुर्भावनापूर्ण तरीके से या प्रासंगिक तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए निर्णय लिया जाता है, तो उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय लवणता' (Ocean Salinity) और इसे प्रभावित करने वाले कारकों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय जल में घुले हुए लवणों की मात्रा को प्रति हजार ग्राम जल में विलीन लवण की ग्राम मात्रा (Parts Per Thousand - ppt) में व्यक्त किया जाता है, जिसमें सोडियम क्लोराइड (NaCl) की मात्रा सर्वाधिक होती है।
2. भूमध्य रेखा (Equator) से ध्रुवों (Poles) की ओर बढ़ने पर सामान्यतः महासागरीय लवणता में निरंतर कमी आती जाती है, क्योंकि उच्च अक्षांशों पर वाष्पीकरण की दर बहुत अधिक होती है और नदियाँ बड़े पैमाने पर मीठा जल जोड़ती हैं।
3. लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) जैसे अर्ध-बंद समुद्रों (Semi-enclosed Seas) में उच्च तापमान के कारण तीव्र वाष्पीकरण होता है, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ की लवणता विश्व के खुले महासागरों के औसत मान से काफी अधिक पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 20' के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों तथा उनके न्यायिक आयामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 20 का खंड (1) किसी पूर्वोत्तर प्रभावी दंड विधि (Ex-post facto criminal law) के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता जो उस कार्य के किए जाने के समय लागू किसी कानून के उल्लंघन में नहीं था, और न ही उसे उस अपराध के लिए उस दंड से अधिक दंड दिया जा सकता है जो उस अपराध के किए जाने के समय लागू कानून के अधीन दिया जा सकता था।
2. अनुच्छेद 20 का खंड (2) 'दोहरे खतरे' (Double Jeopardy) के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है, जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित किया जा सकता है, बशर्ते मामला उच्चतर न्यायलय या सर्वोच्च न्यायालय के अधीन हो।
3. अनुच्छेद 20 का खंड (3) किसी भी व्यक्ति को जो किसी अपराध का अभियुक्त है, अपने ही विरुद्ध साक्ष्य देने के लिए बाध्य किए जाने से संरक्षण (Protection against Self-incrimination) प्रदान करता है, और यह अधिकार केवल आपराधिक न्यायालय की कार्यवाहियों तक ही सीमित है, जबकि किसी प्रशासनिक अधिकरण या कर निर्धारण प्राधिकरण (Tax Authorities) की पूछताछ के दौरान यह लागू नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 123' के अंतर्गत राष्ट्रपति की 'अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति' (Ordinance-making Power) तथा इससे संबंधित न्यायिक निर्णयों और सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति केवल तभी प्राप्त होती है जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों, और इस शक्ति का विस्तार उन्हीं विषयों पर होता है जिन पर कानून बनाने की शक्ति संसद को प्राप्त है, किंतु इसका प्रभाव और मर्यादा वही होती है जो संसद द्वारा बनाए गए अधिनियम की होती है।
2. 'डी. सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य (1987)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया कि कार्यपालिका द्वारा अध्यादेशों को बार-बार पुनरप्रख्यापित (Re-promulgation) करना संवैधानिक धोखाधड़ी (Constitutional Fraud) है और यह विधायिका के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही के लोकतांत्रिक सिद्धांत का उल्लंघन करता है।
3. 'कृष्णा कुमार सिंह बनाम बिहार राज्य (2017)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह ऐतिहासिक व्यवस्था दी कि अध्यादेश के माध्यम से प्राप्त किए गए वित्तीय लाभों या संपत्तियों को छोड़कर, विधानमंडल के समक्ष अध्यादेश को प्रस्तुत न किए जाने या उसके निरस्त होने पर भी अध्यादेश के अंतर्गत किए गए सभी संविदात्मक (Contractual) और कार्यकारी कार्य स्थायी रूप से वैध बने रहते हैं और उनकी न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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