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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) तथा भारत में अवसंरचना वित्तपोषण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वर्ष 2019 में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य देश में विश्व स्तरीय अवसंरचना का विकास करना और सभी नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है, तथा इसमें केवल केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं को शामिल किया गया है, राज्य स्तर की परियोजनाओं को इससे पूरी तरह बाहर रखा गया है।
- 2. NIP के अंतर्गत ऊर्जा, सड़क, शहरी अवसंरचना, और रेलवे जैसे क्षेत्रों को सबसे अधिक पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) आवंटित किया गया है, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए 'सार्वजनिक-निजी भागीदारी' (PPP) मॉडल पर विशेष बल दिया गया है।
- 3. भारत में दीर्घकालिक अवसंरचना वित्तपोषण की समस्या को दूर करने के लिए 'राष्ट्रीय अवसंरचना और निवेश कोष' (NIIF) की स्थापना की गई है, जो एक अर्ध-सार्वजनिक सॉवरेन वेल्थ फंड है और इसमें भारत सरकार के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों की भी हिस्सेदारी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) में केवल केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाएं ही शामिल नहीं हैं, बल्कि इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी (PPP) तीनों की परियोजनाएं समान रूप से शामिल हैं। NIP का उद्देश्य देश के सभी क्षेत्रों में संतुलित बुनियादी ढांचा विकास करना है। कथन 2 सत्य है क्योंकि NIP के तहत ऊर्जा, सड़क, शहरी विकास और रेलवे जैसे प्रमुख क्षेत्रों को सबसे अधिक पूंजीगत आवंटन किया गया है और इसमें निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए PPP मॉडल पर जोर दिया गया है। कथन 3 सत्य है क्योंकि 'राष्ट्रीय अवसंरचना और निवेश कोष' (NIIF) भारत का पहला सॉवरेन वेल्थ फंड है, जिसे वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य अवसंरचना परियोजनाओं (चाहे ग्रीनफील्ड हों या ब्राउनफील्ड) के लिए दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है, जिसमें भारत सरकार की अल्पांश हिस्सेदारी के साथ विदेशी निवेशकों का भी योगदान है।
Related Questions
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित सकल घरेलू उत्पाद' (Green GDP) और पर्यावरणीय लेखांकन (Environmental Accounting) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित सकल घरेलू उत्पाद (Green GDP) किसी अर्थव्यवस्था की पारम्परिक जीडीपी में से प्राकृतिक संसाधनों के क्षय (Depletion of Natural Resources) तथा पर्यावरण प्रदूषण के कारण होने वाले आर्थिक और सामाजिक नुकसान के मौद्रिक मूल्य को घटाकर गणना की जाने वाली एक सूचक माप है।
2. संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक द्वारा संयुक्त रूप से विकसित 'सतत विकास और संपदा आकलन' (Wealth Accounting and the Valuation of Ecosystem Services - WAVES) वैश्विक पहल का मुख्य उद्देश्य देशों को उनकी हरित राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (Green National Accounting) स्थापित करने में तकनीकी सहायता प्रदान करना है।
3. यद्यपि हरित जीडीपी सतत विकास के सच्चे आकलन के लिए एक उत्कृष्ट उपकरण है, तथापि पारम्परिक जीडीपी की तुलना में इसे राष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक तौर पर लागू करने में मुख्य बाधा पर्यावरणीय क्षरण, जैव विविधता के नुकसान और पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं का सटीक मौद्रिक मूल्यांकन (Monetary Valuation) करने में आने वाली पद्धतिगत और डेटा संबंधी जटिलताएँ हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और लोक वित्त के संदर्भ में, 'राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003' और इसके संशोधनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. FRBM अधिनियम के तहत यह सांविधिक रूप से अनिवार्य किया गया था कि केंद्र सरकार वर्ष 2008-09 तक अपने राजस्व घाटे (Revenue Deficit) को समाप्त कर दे और राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3% तक सीमित करे।
2. एन.के. सिंह समिति (2016-17) की सिफारिशों के आधार पर इस अधिनियम में संशोधन करके वर्ष 2020-21 तक राजकोषीय घाटे को GDP के 2.5% और सरकारी ऋण (Debt-to-GDP ratio) को केंद्र के लिए 40% तक लाने का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
3. FRBM अधिनियम में एक 'पलायन खंड' (Escape Clause) का प्रावधान है, जिसके तहत केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, युद्ध, गंभीर राष्ट्रीय आपदा या कृषि अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले गहरे संकट जैसी असाधारण परिस्थितियों में निर्धारित राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों से विचलन (Deviation) कर सकती है, बशर्ते राजकोषीय घाटे में विचलन एक वर्ष में कम से कम 0.5 प्रतिशत अंकों का हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मध्यकालीन भारत की वास्तुकला और विशेष रूप से 'सुल्तानी काल' (Delhi Sultanate) तथा 'मुग़ल काल' की निर्माण शैलियों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली सल्तनत के प्रारंभिक काल में वास्तुकला के अंतर्गत प्रयुक्त 'तुर्क-अफगान शैली' या 'इंडो-इस्लामिक शैली' में भवनों के निर्माण के लिए मुख्य रूप से 'मेहराब और गुंबद' (Arch and Dome) प्रणाली को अपनाया गया, जिसके निर्माण में शहतीर और धरन (Trabeate) पद्धति का प्रयोग पूरी तरह से वर्जित कर दिया गया था और केवल सच्ची मेहराब (True Arch) का ही उपयोग किया गया था।
2. विजयनगर साम्राज्य की वास्तुकला शैली (Vijayanagara Architecture) में 'मंडप' (विशेषकर कल्याण मंडप), 'अम्मन मंदिर' (Deity's Consort Shrines) और स्तंभों पर जटिल पौराणिक नक्काशी की विशेषताएँ प्रमुख थीं, तथा इसमें मंदिर परिसरों के भीतर विशाल प्रवेश द्वार या 'राय गोपुरम' (Rayagopurams) का निर्माण किया जाना उत्तर भारतीय नागर शैली की तुलना में अधिक भव्य और विशिष्ट था।
3. मुग़ल सम्राट शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान वास्तुकला में लाल बलुआ पत्थर के स्थान पर 'सफेद संगमरमर' (White Marble) के प्रयोग को प्राथमिकता दी गई, तथा सममितीय योजना (Symmetrical Planning), 'पित्रा ड्यूरा' (Pietra Dura) तकनीक (यानी संगमरमर की दीवारों में कीमती रत्नों और पत्थरों की जड़ाई का कार्य) और औपचारिक 'चारबाग शैली' (Chahar Bagh Style) के बगीचों का एकीकरण इस काल की इमारतों की मुख्य पहचान बन गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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लोकसभा की संरचना संविधान के किस अनुच्छेद में दी गई है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' (संघ - अनुच्छेद 79 से 122) के अंतर्गत 'संसद की विधायी प्रक्रिया और वित्तीय मामलों' से संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार 'धन विधेयक' (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं; तथा राज्यसभा को धन विधेयक प्राप्त होने की तारीख से चौदह दिन की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों सहित या उसके बिना विधेयक को लोकसभा को वापस करना होता है, और यदि इस अवधि के भीतर राज्यसभा विधेयक को वापस नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित समझा जाता है जिसमें वह लोकसभा द्वारा पारित किया गया था।
2. अनुच्छेद 110 के उपबंधों के अनुसार यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, तो लोकसभा के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है, और इस निर्णय को किसी भी न्यायालय में, या संसद के किसी भी सदन में (स्वयं लोकसभा को छोड़कर), या राष्ट्रपति के समक्ष चुनौती दी जा सकती है यदि अध्यक्ष ने संविधान की प्रक्रिया का उल्लंघन किया हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 117 के अनुसार कोई भी वित्तीय विधेयक (Financial Bill), जो अनुच्छेद 110 के खंड (क) से (च) में विनिर्दिष्ट किसी भी विषय से संबंधित है, लोकसभा में राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति के बिना पुनःस्थापित नहीं किया जा सकता है, किंतु राज्यसभा में ऐसे विधेयक पर विचार करते समय राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति का होना अनिवार्य नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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