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भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मध्यकालीन भारत के दौरान विजयनगर साम्राज्य की 'नायङ्कार व्यवस्था' (Nayankara System) और 'आयागर व्यवस्था' (Ayyagar System) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. नायङ्कार व्यवस्था के अंतर्गत 'नायक' (Nayakas) सैन्य कमांडर होते थे जिन्हें राजा द्वारा भूमि का एक टुकड़ा (अमरम) अनुदान के रूप में दिया जाता था, और इसके बदले उन्हें एक निश्चित संख्या में सैनिक रखकर राजा को सैन्य सहायता देनी पड़ती थी तथा अपनी आय का एक हिस्सा शाही खजाने में जमा करना होता था।
  2. 2. आयागर व्यवस्था ग्रामीण प्रशासन से संबंधित थी, जिसके अंतर्गत बारह विशेष पदाधिकारियों का एक समूह (आयागर) होता था जो गाँव के प्रशासनिक और आर्थिक कार्यों का संचालन करता था, और इन अधिकारियों को उनके वंशानुगत अधिकारों के बदले कर-मुक्त भूमि (मान्यम) प्रदान की जाती थी।
  3. 3. विजयनगर साम्राज्य के केंद्रीय प्रशासन में 'महामंडलेश्वर' नामक अधिकारी सीधे तौर पर सम्राट के अधीन रहकर गांवों के प्रत्यक्ष राजस्व संग्रह का कार्य करते थे, और उन्हें विजयनगर के शासकों द्वारा पूर्ण वित्तीय और न्यायिक स्वायत्तता प्राप्त थी, जिस पर केंद्रीय नियंत्रण नगण्य था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: विजयनगर साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना में 'नायङ्कार व्यवस्था' एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग थी। इसके अंतर्गत 'नायक' सैन्य प्रमुख या कमांडर होते थे, जिन्हें राजा द्वारा 'अमरम' नामक भूमि अनुदान दी जाती थी। इसके बदले उन्हें राजा को सैन्य सहायता (विशेषकर घुड़सवार सेना) प्रदान करनी पड़ती थी और वित्तीय कर चुकाना पड़ता था। कथन 2 सही है: 'आयागर व्यवस्था' विजयनगर साम्राज्य की ग्राम प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी थी। इसके अंतर्गत बारह (12) अधिकारियों का एक समूह होता था, जिसे 'आयागर' कहा जाता था। ये ग्रामीण स्तर पर कानून-व्यवस्था, कृषि उत्पादन और कर संग्रह जैसे कार्य संभालते थे। इन अधिकारियों के पद वंशानुगत होते थे और इन्हें अपनी सेवाओं के बदले कर-मुक्त भूमियाँ (जिन्हें 'मान्यम' कहा जाता था) प्रदान की जाती थीं। कथन 3 गलत है: 'महामंडलेश्वर' प्रांतीय या क्षेत्रीय स्तर के उच्च अधिकारी/सामंत होते थे जो साम्राज्य के दूर-स्थ प्रांतों पर नियंत्रण रखते थे और केंद्रीय सत्ता के प्रति निष्ठावान होते थे। गांवों के प्रत्यक्ष प्रशासन और राजस्व संग्रह का कार्य 'आयागर' और ग्रामीण पंचायतों द्वारा किया जाता था, न कि महामंडलेश्वर सीधे गांवों का प्रत्यक्ष संग्रह करते थे। इसके अलावा, विजयनगर के केंद्रीय शासकों (विशेषकर कृष्णदेव राय जैसे सम्राटों) का प्रांतीय और स्थानीय प्रशासन पर कड़ा नियंत्रण रहता था, और उन्हें पूर्ण या असीमित स्वायत्तता प्राप्त नहीं थी।
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