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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संसद की 'संसदीय समितियाँ' (Parliamentary Committees) तथा विशेष रूप से 'वित्तीय समितियों' (Financial Committees) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) में कुल 22 सदस्य होते हैं, जिनमें से 15 सदस्य लोकसभा से और 7 सदस्य राज्यसभा से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा चुने जाते हैं, तथा इस समिति का अध्यक्ष हमेशा विपक्षी दल से ही नियुक्त किया जाता है, जिसकी परंपरा 1967 से चली आ रही है।
  2. 2. प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) संसद की सबसे बड़ी समिति है जिसमें कुल 30 सदस्य होते हैं और सभी 30 सदस्य केवल लोकसभा से ही निर्वाचित होते हैं, तथा राज्यसभा का कोई भी सदस्य इस समिति का हिस्सा नहीं होता है।
  3. 3. लोक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिवेदनों और लेखाओं की जाँच करती है, और इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा अपने सदस्यों में से की जाती है, किंतु यदि लोकसभा का कोई मंत्री इस समिति के लिए चुना जाता है, तो वह स्वतः इसका अध्यक्ष बन सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: लोक लेखा समिति में 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)। वर्ष 1967 से यह परंपरा चली आ रही है कि इस समिति का अध्यक्ष सत्ताधारी दल के बजाय विपक्षी दल से नियुक्त किया जाता है। कथन 2 सही है: प्राक्कलन समिति संसद की सबसे बड़ी समिति है जिसमें 30 सदस्य होते हैं और सभी 30 सदस्य केवल लोकसभा से चुने जाते हैं; राज्यसभा को इसमें प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है। कथन 3 गलत है: लोक उपक्रम समिति में भी 22 सदस्य (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा) होते हैं, और इसका अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है। हालांकि, किसी भी मंत्री को संसद की किसी भी वित्तीय समिति (विशेषकर लोक उपक्रम समिति या प्राक्कलन समिति) का सदस्य या अध्यक्ष नहीं चुना जा सकता है यदि वह मंत्री पद पर है।
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