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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित सांविधिक प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत की गई थी, और यह देश का ऐसा पहला न्यायिक निकाय है जिसने अपने कामकाज के लिए भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची के अंतर्गत पर्यावरण से जुड़े मामलों को हल करने के लिए अनिवार्य रूप से 'सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908' के कड़े प्रावधानों और सिद्धांतों का पालन करना वैधानिक रूप से अनिवार्य बनाया है।
  2. 2. NGT पर्यावरण से जुड़े किसी भी मामले में सिविल न्यायालयों की अधिकारिता को पूर्णतः बहिष्कृत करता है, तथा इस अधिकरण द्वारा दिए गए आदेश या निर्णय के विरुद्ध सीधे सर्वोच्च न्यायालय में न जाकर केवल संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में अपील दायर की जा सकती है, जिसके लिए अधिनियम के तहत 90 दिनों की समयावधि निर्धारित की गई है।
  3. 3. NGT को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत पर्यावरण प्रदूषण के निवारण और नियंत्रण से जुड़े आदेश पारित करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु यह अधिकरण किसी भी उद्योग या इकाई के विरुद्ध स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) या हर्जाने का आदेश जारी करने की शक्ति नहीं रखता है, जब तक कि कोई औपचारिक याचिका दायर न की जाए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित NGT अपने कामकाज में 'सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908' (CPC) के कड़े नियमों से बंधा हुआ नहीं है। यह अधिकरण 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) के आधार पर कार्य करता है। कथन 2 गलत है: NGT के आदेश के विरुद्ध अपील सीधे **उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)** में की जा सकती है, न कि उच्च न्यायालय में। अधिकरण के निर्णय के 90 दिनों के भीतर सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करनी होती है। कथन 3 गलत है: सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णयों (जैसे 'मद्रास बार एसोसिएशन वाद') में स्पष्ट किया है कि NGT आवश्यकता पड़ने पर 'सुअर मोटो' (Suo Motu - स्वतः संज्ञान) के आधार पर भी पर्यावरण से जुड़े मामलों में संज्ञान ले सकता है और निर्देश जारी कर सकता है। अतः तीनों कथन असत्य हैं।
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