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Civil services
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत 'संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ' (Services under the Union and the States - अनुच्छेद 308 से 323) तथा लोक सेवा आयोगों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 315 के अनुसार संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का गठन किया जाएगा, तथा दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर संसद विधि द्वारा उन राज्यों के लिए एक 'संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग' (JPSC) का गठन कर सकती है, जो एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है।
  2. 2. संघ लोक सेवा आयोग या संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें उनके पद से हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास होता है, राज्यपाल के पास नहीं।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार लोक सेवा आयोग का कोई भी सदस्य अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात उसी आयोग के अध्यक्ष पद पर या किसी अन्य लोक सेवा आयोग (संघ या राज्य) के अध्यक्ष पद पर पुनर्नियुक्ति का पात्र होता है, किंतु वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार (Employment) को प्राप्त करने के लिए पूर्णतः अपात्र हो जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 315 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) और संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) सभी संवैधानिक निकाय (Constitutional Bodies) हैं, न कि सांविधिक निकाय (Statutory Bodies), क्योंकि इनकी स्थापना सीधे संविधान के अनुच्छेदों के माध्यम से की गई है, न कि संसद के किसी साधारण अधिनियम द्वारा। कथन 2 सही है: संविधान के अनुच्छेद 316 और 317 के अनुसार, राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें उनके पद से हटाने (Removal) की शक्ति केवल भारत के राष्ट्रपति के पास निहित है (कदाचार या अन्य निर्धारित आधारों पर सुप्रीम कोर्ट की जांच के पश्चात), राज्यपाल के पास उन्हें हटाने का कोई अधिकार नहीं होता है। कथन 3 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 319 के अनुसार, लोक सेवा आयोग के सदस्य अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में, या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने के पात्र होते हैं, किंतु वे भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार के लिए पूर्णतः अपात्र (Ineligible) हो जाते हैं—यह बात सही है, लेकिन कथन में यह उल्लेख है कि वे 'उसी आयोग के अध्यक्ष पद पर' पुनर्नियुक्ति के पात्र होते हैं, जो कि गलत है क्योंकि SPSC या UPSC का कोई भी सदस्य अपने कार्यकाल के तुरंत बाद उसी आयोग के अध्यक्ष पद पर पुनर्नियुक्ति (Re-appointment) का पात्र नहीं होता है (हालाँकि सदस्य से अध्यक्ष के रूप में पदोन्नति अन्य आयोग में हो सकती है, लेकिन उसी आयोग के अध्यक्ष के रूप में प्रतिबंध है)। अत: कथन 3 गलत है।
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