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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, गुप्त काल (Gupta Period) के दौरान हुई कला, विज्ञान और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. गुप्त काल में वास्तुकला और मूर्तिकला का अभूतपूर्व विकास हुआ, जिसके अंतर्गत उत्तर भारत में नागर शैली (Nagara Style) के मंदिरों की प्रारंभिक विशेषताएँ दिखाई देने लगीं, जैसे कि देवगढ़ का दशावतार मंदिर और भूमरा का शिव मंदिर, जो ईंटों या प्रस्तर से निर्मित शुरुआती पंचायतन शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
- 2. इस काल में विज्ञान और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में महान प्रगति हुई, जिसमें आर्यभट्ट द्वारा 'आर्यभट्टीय' की रचना की गई, जिसमें उन्होंने सबसे पहले यह प्रतिपादित किया कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर चक्कर लगाती है, तथा सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के वास्तविक वैज्ञानिक कारणों की सटीक व्याख्या की।
- 3. गुप्त प्रशासनिक व्यवस्था में प्रांतीय प्रशासन को 'भुक्ति' (Bhukti) कहा जाता था, जिसके प्रमुख को 'उपरिक' (Uparika) कहा जाता था, और भुक्तियों का विभाजन 'विषय' (Vishaya) में होता था, जिनका प्रशासन 'विषयपति' द्वारा चलाया जाता था, किंतु प्रशासनिक अधिकारियों का यह पूरा तंत्र वंशानुगत (Hereditary) था और निचले स्तर पर केंद्रीय नियंत्रण लगभग समाप्त हो चुका था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: गुप्त काल को भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' कहा जाता है। इस काल में मंदिर वास्तुकला की नागर शैली का विकास हुआ। देवगढ़ का दशावतार मंदिर (दशवतार मंदिर) और भूमरा का शिव मंदिर प्रारंभिक गुप्त कालीन मंदिरों और पंचायतन शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
कथन 2 सही है: महान खगोलविद् और गणितज्ञ आर्यभट्ट ने 'आर्यभट्टीय' ग्रंथ की रचना की। उन्होंने ही सबसे पहले यह वैज्ञानिक तथ्य प्रतिपादित किया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है (भ्रमण करती है) और सूर्य ग्रहण तथा चंद्र ग्रहण के वास्तविक कारणों को समझाया।
कथन 3 गलत है: गुप्त प्रशासन में प्रांतीय प्रशासन को 'भुक्ति' (जिसके प्रमुख 'उपरिक' होते थे) और विषय को 'विषयपति' के अधीन रखा गया था, किंतु यह सत्य है कि प्रशासनिक पदों पर सामंती प्रभाव बढ़ने के कारण कई पद वंशानुगत होने लगे थे, परंतु निचले स्तर पर स्थानीय निकायों (जैसे नगर श्रेष्ठी, सार्थवाह) और केंद्रीय नियंत्रण का समन्वय बना हुआ था, और यह कहना गलत है कि केंद्रीय नियंत्रण 'लगभग समाप्त' हो चुका था। इसके अतिरिक्त, कथन 3 का यह हिस्सा कि 'प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह वंशानुगत था और केंद्रीय नियंत्रण समाप्त हो गया था' अतिशयोक्तिपूर्ण और तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण है। अतः केवल कथन 1 और 2 सही हैं।
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भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत स्थापित 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) एक सांविधिक (Statutory) निकाय है, जिसका मुख्य कार्य देश की जैविक संसाधनों तक पहुँच और उनके उपयोग से प्राप्त होने वाले लाभों के न्यायसंगत बँटवारे (ABS) को विनियमित करना है।
2. यह प्राधिकरण देश के भीतर किसी भी भारतीय नागरिक या भारतीय पंजीकृत कंपनियों द्वारा जैव संसाधनों के वाणिज्यिक उपयोग के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य बनाता है, चाहे संसाधन का उपयोग किसी भी उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो।
3. राज्य स्तर पर स्थापित 'राज्य जैव विविधता बोर्ड' (SBB) के परामर्श के बिना केंद्रीय स्तर पर NBA किसी भी विदेशी व्यक्ति, कंपनी या अनिवासी भारतीयों (NRIs) को जैविक संसाधनों के हस्तांतरण से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के आवेदन पर निर्णय नहीं दे सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule) की उद्घोषणा, उसके संसदीय अनुमोदन और इसके परिणामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से 'दो महीने' के भीतर संसद के प्रत्येक सदन द्वारा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है।
2. यदि लोकसभा का विघटन उस दो महीने की अवधि के दौरान हो जाता है जिसके भीतर उद्घोषणा का अनुमोदन किया जाना आवश्यक है, तो ऐसी स्थिति में उद्घोषणा लोकसभा के पुनर्गठन के बाद उसकी पहली बैठक से '30 दिनों' तक जीवित रहती है, बशर्ते कि इस बीच राज्यसभा द्वारा इसे पहले ही अनुमोदित कर दिया गया हो।
3. राष्ट्रपति शासन के लागू होने पर राज्य सरकार के कार्यकारी और विधायी कार्यों को अपने हाथ में लेने के साथ-साथ राष्ट्रपति को यह पूर्ण अधिकार प्राप्त होता है कि वह राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) की सभी न्यायिक और प्रशासनिक शक्तियों को अपने प्रत्यक्ष नियंत्रण में ले ले तथा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को निलंबित या उनके अधिकारों में कटौती कर सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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नरम दल के नेताओं के संबंध में कथनों पर विचार करें: 1. वे संवैधानिक सुधारों में विश्वास रखते थे, 2. दादाभाई नौरोजी ने "धन निकासी सिद्धांत" दिया, 3. वे ब्रिटिश शासन के पूर्ण बहिष्कार के समर्थक थे। सही विकल्प चुनें?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 161' के अंतर्गत राज्य के राज्यपाल की 'क्षमादान की शक्ति' तथा इसके न्यायिक और संस्थागत दायरे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्य के राज्यपाल को उस विषय पर, जिस पर राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंडादेश को क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार प्रदान करने या दंडादेश को निलंबित, परिहरित या लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से माफ या क्षमा नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यह शक्ति अनन्य रूप से केवल भारत के राष्ट्रपति के पास निहित है।
2. 'राज्य सरकार बनाम के. एम. नानावटी' (1960) मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने यह स्पष्ट किया था कि यदि कोई व्यक्ति जिसे दोषी ठहराया गया है, जेल में है और अपनी अपील पर विचार लंबित रहने के दौरान अस्थायी जमानत या रिहाई की मांग करता है, तो राज्यपाल अनुच्छेद 161 के तहत अपनी क्षमादान शक्ति का प्रयोग करके उसे तब तक रिहा नहीं कर सकते जब तक कि मामला सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के विचाराधीन हो, क्योंकि यह न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जाएगा।
3. 'एकीकृत मानवीय बनाम भारत संघ' और 'मनोज कुमार बनाम मध्य प्रदेश राज्य' मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि राज्यपाल की क्षमादान शक्ति का प्रयोग राज्य की मंत्रिपरिषद की 'सहायता और सलाह' (Aid and Advice) के अधीन होता है, और यदि मंत्रिपरिषद किसी दया याचिका पर निर्णय लेने में अत्यधिक और अतार्किक देरी करती है, तो राज्यपाल के इस निर्णय की न्यायिक समीक्षा उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' को भारत द्वारा जैव विविधता अभिसमय (Convention on Biological Diversity - CBD, 1992) के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अधिनियमित किया गया था, तथा यह अधिनियम देश के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके उपयोग से होने वाले लाभों के न्यायसंगत और निष्पक्ष बँटवारे के साथ-साथ आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच को विनियमित करने का प्रावधान करता है।
2. 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) एक वैधानिक और स्वायत्त निकाय है, जिसकी स्थापना पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के तहत चेन्नई, तमिलनाडु में की गई है, और यह देश के भीतर किसी भी व्यक्ति द्वारा जैव संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग या जैव-सर्वेक्षण करने के लिए पूर्व अनुमति प्रदान करने वाला एकमात्र सर्वोच्च प्राधिकारी है।
3. अधिनियम के तहत त्रि-स्तरीय संस्थागत तंत्र का प्रावधान किया गया है—राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB), और स्थानीय स्तर पर पंचायत तथा नगर निकायों के स्तर पर 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMC), जिनमें से प्रत्येक समिति को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले जैविक संसाधनों के विवरण और पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण करने के लिए 'लोक जैव विविधता रजिस्टर' (People's Biodiversity Register - PBR) तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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