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Civil services
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत 'संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ' (Services Under the Union and the States - अनुच्छेद 308 से 323) तथा 'अखिल भारतीय सेवाएँ' (All-India Services) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार राज्य सभा यदि उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से कोई संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है, तो संसद विधि द्वारा अखिल भारतीय सेवाओं (जिनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा शामिल हैं) का सृजन कर सकती है।
- 2. भारतीय वन सेवा (Indian Forest Service - IFS) को मूल संविधान में एक अखिल भारतीय सेवा के रूप में शामिल किया गया था, जबकि 'भारतीय वन अधिनियम, 1927' के तहत इसे संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था।
- 3. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, किंतु वे केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के अधीन कार्य करते हैं और उनका नियंत्रण तथा अनुशासनात्मक अधिकार पूरी तरह से संबंधित राज्य सरकार के पास होता है, जिसमें केंद्र सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से ऐसा संकल्प पारित कर देती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या समीचीन है, तो संसद विधि द्वारा अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन का उपबंध कर सकती है। वर्तमान में तीन अखिल भारतीय सेवाएँ हैं- भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), और भारतीय वन सेवा (IFoS)। कथन 2 गलत है: भारतीय वन सेवा (IFoS) को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इसे अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के तहत 1 जुलाई 1966 को तीसरी अखिल भारतीय सेवा के रूप में सृजित किया गया था। इसका 'भारतीय वन अधिनियम, 1927' से कोई संबंध नहीं है। कथन 3 गलत है: यद्यपि अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वे विभिन्न राज्यों के संवर्गों (Cadres) में तैनात होते हैं, किंतु उनके ऊपर अंतिम नियंत्रण (Ultimate Control) केंद्र सरकार (विशेषकर कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय) का होता है, जबकि दैनिक प्रशासन संबंधित राज्य सरकारों द्वारा चलाया जाता है। किसी भी गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई (जैसे बर्खास्तगी या सेवा से हटाना) का अधिकार केवल राष्ट्रपति (केंद्र सरकार) के पास होता है, राज्य सरकार के पास नहीं।
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राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति किस अनुच्छेद में प्राप्त है?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) तथा वायु प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) देश के सभी शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए एक दीर्घकालिक, समयबद्ध और राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है, जिसका लक्ष्य 2024 तक पार्टिकुलेट मैटर ($PM_{2.5}$ और $PM_{10}$) सांद्रता में 2017 के आधार वर्ष की तुलना में 20-30% की कमी लाना था, जिसे बाद में संशोधित करके 2026 तक 40% की कमी का लक्ष्य कर दिया गया है।
2. वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत स्थापित 'केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' (CPCB) देश भर में परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (Ambient Air Quality Standards) को निर्धारित करने और निगरानी करने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत शीर्ष निकाय है।
3. 'राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक' (AQI) को भारत में कुल आठ प्रमुख प्रदूषकों - जैसे कि $PM_{2.5}$, $PM_{10}$, $NO_2$, $SO_2$, $CO$, $O_3$, $NH_3$, और सीसा (Pb) - के आधार पर एक एकल संख्या, रंग कोड और वर्णन के रूप में वायु की गुणवत्ता को दर्शाने के लिए जारी किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के 'सलाहकार क्षेत्राधिकार' (Advisory Jurisdiction) के प्रावधानों और उनकी प्रकृति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति सार्वजनिक महत्व के किसी भी विधिक या तथ्यात्मक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय की राय प्राप्त करने के लिए अनुच्छेद 143 के तहत मामला उस न्यायालय को भेज सकता है, और ऐसे संदर्भ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।
2. यदि कोई ऐसा मामला किसी पूर्व-संवैधानिक संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य समान लिखत (Instrument) से उत्पन्न होता है जिस पर ऐसी संधि के प्रावधान लागू होते थे, तो ऐसी स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी सलाह देना अनिवार्य होता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 143 के अंतर्गत दी गई सलाहकार राय केवल एक विधिक परामर्श या सलाह होती है, जो राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी नहीं होती है, और न ही यह निर्णय 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) के रूप में अन्य न्यायालयों पर बा ̈ध्यकारी मिसाल (Precedent) के रूप में लागू होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' और 'अनुच्छेद 226' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता का दायरा व्यापक है क्योंकि वे मूल अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य विधिक या सामान्य उद्देश्य के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं।
2. सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का प्रादेशिक क्षेत्र (Territorial Jurisdiction) पूरे भारत पर विस्तृत है, जबकि किसी उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता का क्षेत्र सामान्यतः केवल उसी राज्य तक सीमित होता है जिसके अधिकार क्षेत्र के भीतर वह उच्च न्यायालय स्थित है, सिવાય इसके कि वह विवादित प्राधिकारी उस उच्च न्यायालय के प्रादेशिक क्षेत्र के बाहर स्थित हो।
3. अनुच्छेद 32 स्वयं में एक मूल अधिकार है (जिसके अंतर्गत संवैधानिक उपचारों का अधिकार प्राप्त है), इसलिए सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले में रिट जारी करने से अपनी अधिकारिता का अभाव (Want of jurisdiction) बताकर इंकार नहीं कर सकता, जबकि उच्च न्यायालय के समक्ष अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल करना एक विवेकाधीन (Discretionary) उपाय है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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