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वैदिक काल के संदर्भ में कौन से कथन सत्य हैं: ऋग्वैदिक पशुपालन, उत्तर वैदिक वर्ण व्यवस्था, ऋग्वेद में लोहे का उल्लेख?

Detailed Explanation

 

  • पशुपालन (ऋग्वैदिक): ऋग्वैदिक काल में कृषि की तुलना में पशुपालन को अधिक प्रधानता प्राप्त थी। 'गाय' को विनिमय का माध्यम और सबसे मूल्यवान संपत्ति माना जाता था। ऋग्वेद में 'गविष्टि' शब्द का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ है 'गाय की खोज' या युद्ध।

  • वर्ण व्यवस्था (उत्तर वैदिक): उत्तर वैदिक काल (1000 ई.पू. - 600 ई.पू.) में समाज में जटिलता बढ़ी। कर्म आधारित विभाजन कठोर होकर जन्म आधारित वर्ण व्यवस्था में परिवर्तित हो गया, जिससे समाज में ऊँच-नीच की भावना प्रबल हुई।

  • लोहे का उल्लेख: लोहे का ज्ञान उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ई.पू.) में हुआ। ऋग्वैदिक काल में लोहे का कोई साक्ष्य नहीं है; वे 'तांबा' या 'कांसा' से परिचित थे जिसे वे 'अयस' कहते थे। लोहे का पहला स्पष्ट उल्लेख 'यजुर्वेद' और 'अथर्ववेद' में मिलता है, जहाँ इसे 'श्याम अयस' या 'कृष्ण अयस' कहा गया है।

 

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