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वैदिक काल के संदर्भ में कौन से कथन सत्य हैं: ऋग्वैदिक पशुपालन, उत्तर वैदिक वर्ण व्यवस्था, ऋग्वेद में लोहे का उल्लेख?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
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पशुपालन (ऋग्वैदिक): ऋग्वैदिक काल में कृषि की तुलना में पशुपालन को अधिक प्रधानता प्राप्त थी। 'गाय' को विनिमय का माध्यम और सबसे मूल्यवान संपत्ति माना जाता था। ऋग्वेद में 'गविष्टि' शब्द का प्रयोग हुआ है, जिसका अर्थ है 'गाय की खोज' या युद्ध।
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वर्ण व्यवस्था (उत्तर वैदिक): उत्तर वैदिक काल (1000 ई.पू. - 600 ई.पू.) में समाज में जटिलता बढ़ी। कर्म आधारित विभाजन कठोर होकर जन्म आधारित वर्ण व्यवस्था में परिवर्तित हो गया, जिससे समाज में ऊँच-नीच की भावना प्रबल हुई।
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लोहे का उल्लेख: लोहे का ज्ञान उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ई.पू.) में हुआ। ऋग्वैदिक काल में लोहे का कोई साक्ष्य नहीं है; वे 'तांबा' या 'कांसा' से परिचित थे जिसे वे 'अयस' कहते थे। लोहे का पहला स्पष्ट उल्लेख 'यजुर्वेद' और 'अथर्ववेद' में मिलता है, जहाँ इसे 'श्याम अयस' या 'कृष्ण अयस' कहा गया है।
Related Questions
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'महासागरीय अम्लीकरण' (Ocean Acidification) और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय अम्लीकरण मुख्य रूप से वायुमंडल में मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के बढ़ते अवशोषण के कारण होता है, जिससे समुद्र के जल का pH स्तर गिर जाता है और यह प्रक्रिया समुद्र के क्षारीय (Alkaline) होने की प्रवृत्ति को और अधिक तीव्र कर देती है।
2. जब कार्बन डाइऑक्साइड समुद्री जल में घुलती है, तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनिक अम्ल बनाती है, जो वियोजित होकर हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) और बाइकार्बोनेट आयनों को मुक्त करता है, जिससे उपलब्ध कार्बोनेट आयनों की सांद्रता में कमी आ जाती है।
3. कार्बोनेट आयनों की सांद्रता में यह कमी कैल्सीफाइंग जीवों (Calcifying Organisms), जैसे कि प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs), मोलस्क और कुछ प्रकार के फाइटोप्लांकटन के लिए कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) के कंकाल और कवच का निर्माण करना अत्यंत कठिन बना देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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किस कानून को 'बिना वकील, बिना दलील, बिना अपील' वाला 'काला कानून' कहा गया था?
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उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश का स्थानांतरण करने की शक्ति किसके पास है?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन' (CCAC) और इसके लक्ष्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोएलिशन (CCAC) सरकारों, अंतर-सरकारी संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों की एक स्वैच्छिक साझेदारी है, जिसे वर्ष 2012 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों (Short-Lived Climate Pollutants - SLCPs) को कम करने के लिए विशेष रूप से लॉन्च किया गया था।
2. ब्लैक कार्बन, मीथेन, ट्रोपोस्फेरिक ओजोन और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) को 'अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक' माना जाता है, क्योंकि इनका वायुमंडल में जीवनकाल कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की तुलना में बहुत कम होता है, किंतु इनका ग्लोबल वार्मिंग पर तात्कालिक प्रभाव और ग्रीनहाउस गैसों की तुलना में तापीय क्षमता (GWP) अत्यधिक तीव्र होती है।
3. भारत इस वैश्विक गठबंधन (CCAC) का एक संस्थापक सदस्य देश है, जिसने वर्ष 2012 में इसके गठन के समय ही इसके शासी बोर्ड में शामिल होकर कृषि, परिवहन और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्रों में ब्लैक कार्बन और मीथेन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए अपनी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'अन्वेषण और केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो' (CBI) की विधिक पृष्ठभूमि तथा उसकी जाँच शक्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की स्थापना का कोई प्रत्यक्ष संवैधानिक प्रावधान नहीं है, बल्कि इसकी स्थापना वर्ष 1963 में गृह मंत्रालय के एक संकल्प (Resolution) के माध्यम से की गई थी, और इसे अपनी मुख्य विधिक शक्ति 'दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) अधिनियम, 1946' से प्राप्त होती है।
2. DSPE अधिनियम की धारा 6 के तहत, CBI को किसी भी राज्य के भीतर किसी अपराध की जाँच करने के लिए उस राज्य सरकार की पूर्व सहमति (Consent) लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है, और एक बार राज्य द्वारा दी गई सामान्य सहमति (General Consent) को वापस ले लिए जाने के बाद, CBI उस राज्य में बिना विशिष्ट अनुमति के किसी नए मामले की जाँच या छापेमारी नहीं कर सकती है, सिवाय तब जब उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा जाँच का आदेश दिया गया हो।
3. 'सुब्रमण्यम स्वामी बनाम निदेशक, सीबीआई (2014)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम की उस धारा को असंवैधानिक घोषित कर दिया था जिसके तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामलों में संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के स्तर के केंद्र सरकार के अधिकारियों के विरुद्ध प्रारंभिक जाँच (Preliminary Enquiry) शुरू करने से पहले सतर्कता आयोग या सरकार से पूर्व अनुमोदन (Prior Approval) प्राप्त करना अनिवार्य बनाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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