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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'महासागरीय अम्लीकरण' (Ocean Acidification) और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महासागरीय अम्लीकरण मुख्य रूप से वायुमंडल में मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के बढ़ते अवशोषण के कारण होता है, जिससे समुद्र के जल का pH स्तर गिर जाता है और यह प्रक्रिया समुद्र के क्षारीय (Alkaline) होने की प्रवृत्ति को और अधिक तीव्र कर देती है।
- 2. जब कार्बन डाइऑक्साइड समुद्री जल में घुलती है, तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनिक अम्ल बनाती है, जो वियोजित होकर हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) और बाइकार्बोनेट आयनों को मुक्त करता है, जिससे उपलब्ध कार्बोनेट आयनों की सांद्रता में कमी आ जाती है।
- 3. कार्बोनेट आयनों की सांद्रता में यह कमी कैल्सीफाइंग जीवों (Calcifying Organisms), जैसे कि प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs), मोलस्क और कुछ प्रकार के फाइटोप्लांकटन के लिए कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) के कंकाल और कवच का निर्माण करना अत्यंत कठिन बना देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि महासागरीय अम्लीकरण के कारण समुद्र के जल का pH स्तर गिरता है (लगभग 8.2 से नीचे की ओर प्रवृत्त होना), जिससे समुद्र की क्षारीयता (Alkalinity) कम होती है, न कि यह क्षारीय होने की प्रवृत्ति को तीव्र करता है। यद्यपि समुद्र अभी भी रासायनिक रूप से क्षारीय (pH > 7) श्रेणी में बना हुआ है, किंतु अम्लीकरण का अर्थ इसके pH मान में कमी और अम्लता में वृद्धि से है। कथन 2 सही है: जब $CO_2$ समुद्री जल में घुलती है, तो यह पानी ($H_2O$) के साथ मिलकर कार्बोनिक अम्ल ($H_2CO_3$) बनाती है, जो हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) और बाइकार्बोनेट आयनों ($HCO_3^-$) में टूट जाता है। ये मुक्त हाइड्रोजन आयन पानी में मौजूद कार्बोनेट आयनों ($CO_3^{2-}$) के साथ मिलकर अतिरिक्त बाइकार्बोनेट बनाते हैं, जिससे स्वतंत्र कार्बोनेट आयनों की उपलब्धता कम हो जाती है। कथन 3 सही है: कार्बोनेट आयनों की कमी से प्रवाल (Corals), शैलफिश और कुछ सूक्ष्म शैवाल (जैसे कोकोलिटोफोरिड्स) के लिए अपने कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) के खोल और कंकाल का निर्माण और रखरखाव करना अत्यंत कठिन हो जाता है, जिससे उनकी वृद्धि और अस्तित्व खतरे में पड़ जाते हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - अनुच्छेद 36 से 51) तथा 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code - अनुच्छेद 44) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार राज्य, भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (UCC) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह प्रावधान एक न्यायोचित (Justiciable) अधिकार है जिसे लागू कराने के लिए कोई भी नागरिक सीधे सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर सकता है।
2. गोवा एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ पुर्तगाली सिविल कोड, 1867 (Portuguese Civil Code) के रूप में एक समान नागरिक संहिता पहले से ही लागू है, जो धार्मिक संप्रदायों के आधार पर व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) में अंतर किए बिना सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है।
3. नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत आने वाले प्रावधानों में से कुछ को समय-समय पर विभिन्न संविधान संशोधनों के माध्यम से जोड़ा गया है, किंतु अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता) मूल संविधान में ही नीति निर्देशक तत्वों के भाग के रूप में निहित था, जिसे किसी भी संशोधन द्वारा नहीं जोड़ा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) के निर्माण और उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराओं के संचलन में पृथ्वी का घूर्णन (Rotation of the Earth) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसके कारण कोरियोलिस बल (Coriolis Force) के प्रभाव से उत्तरी गोलार्ध में धाराएँ अपनी दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में अपनी बाईं ओर विक्षेपित हो जाती हैं।
2. महासागरों में लवणता (Salinity) और घनत्व (Density) में भिन्नता भी ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज महासागरीय धाराओं को उत्पन्न करती है; अधिक घनत्व और उच्च लवणता वाला ठंडा जल नीचे बैठता है जबकि कम घनत्व वाला हल्का जल उसकी ओर प्रवाहित होता है।
3. अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होने वाली 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक ठंडी जलधारा है, जो मेक्सिको की खाड़ी से उत्तर की ओर बहती हुई पश्चिमी यूरोप की जलवायु को अत्यधिक ठंडा और शुष्क बना देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और मध्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, 'दीवान-ए-कोही' (Diwan-i-Kohi) विभाग की स्थापना, इसके उद्देश्यों तथा दिल्ली सल्तनत के किस सुल्तान से इसका संबंध है, के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस कृषि विभाग (Diwan-i-Kohi) की स्थापना तुगलक वंश के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा दोआब क्षेत्र में कृषि उत्पादन को बढ़ाने और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के उद्देश्य से की गई थी।
2. इस योजना के तहत सरकार द्वारा सीधे किसानों को आर्थिक सहायता (तकावी ऋण या सौंदड़) प्रदान की जाती थी, ताकि वे बीज, बैल और कृषि उपकरण खरीद सकें।
3. हालांकि यह विभाग व्यापक प्रशासनिक योजना के तहत शुरू किया गया था, किंतु अत्यधिक भ्रष्टाचार, अधिकारियों की उदासीनता, खराब भूमि के चयन और दोआब क्षेत्र में पड़े भीषण अकाल के कारण यह योजना पूरी तरह असफल सिद्ध हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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दिल्ली सल्तनत का वह कौन सा शासक था जिसने बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण करवाया था?
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हाल ही में UIDAI द्वारा लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग एक स्वतंत्र पहचान दी गई है। आधार कार्ड के संदर्भ में लद्दाख का नया प्रशासनिक कोड क्या है?
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