BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
18 views

सामान्य विज्ञान, पर्यावरण एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'प्रवाल भित्तियाँ' (Coral Reefs) तथा उनके विरंजन (Coral Bleaching) की परिघटना के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. प्रवाल (Corals) वास्तव में समुद्री जीव होते हैं जो 'Cnidaria' संघ से संबंधित हैं और उनके ऊतकों के भीतर 'जूजैंथिली' (Zooxanthellae) नामक सूक्ष्म शैवाल सहजीवी (Symbiotic) रूप से निवास करते हैं, जो प्रवालों को उनका जीवंत रंग और प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से अधिकांश पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
  2. 2. जब महासागरों के तापमान में वृद्धि, अम्लीकरण या अन्य पर्यावरणीय तनावों के कारण प्रवाल अत्यधिक दबाव में आते हैं, तो वे अपने ऊतकों में रहने वाले जूजैंथिली शैवाल को निष्कासित कर देते हैं, जिससे प्रवाल सफेद रंग के हो जाते हैं और इस प्रक्रिया को 'प्रवाल विरंजन' (Coral Bleaching) कहा जाता है।
  3. 3. एक बार विरंजित होने के बाद प्रवाल पूरी तरह से मृत हो जाते हैं और उनके पुनर्जीवित होने या वापस अपने मूल रूप में लौटने की कोई वैज्ञानिक संभावना नहीं बचती है, भले ही पर्यावरणीय तनाव और तापमान की स्थिति सामान्य हो जाए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: प्रवाल (Corals) समुद्री अकशेरुकी जीव हैं जो फाइलम नाइडरिया (Cnidaria) से संबंधित हैं। इनके ऊतकों के अंदर 'जूजैंथिली' (Zooxanthellae) नामक सूक्ष्म शैवाल सहजीवी रूप से रहते हैं, जो इन्हें रंग प्रदान करने के साथ-साथ प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऊर्जा भी देते हैं। कथन 2 सही है: महासागरीय तापमान में वृद्धि (Global Warming), समुद्री जल का अम्लीकरण (Ocean Acidification), प्रदूषण या अत्यधिक सौर विकिरण जैसे तनावों के कारण प्रवाल अपने अंदर मौजूद जूजैंथिली शैवाल को बाहर निकाल देते हैं, जिससे उनका कैल्शियम कार्बोनेट काक कंकाल सफेद दिखने लगता है। इसे ही 'प्रवाल विरंजन' (Coral Bleaching) कहते हैं। कथन 3 गलत है: प्रवाल विरंजन का अर्थ हमेशा प्रवाल की तत्काल मृत्यु नहीं होता है। यदि पर्यावरणीय तनाव (जैसे उच्च तापमान) अल्पकालिक हो और स्थिति जल्दी सामान्य हो जाए, तो प्रवाल दोबारा शैवाल को अपने अंदर बसाकर (Re-colonization) पुनर्जीवित हो सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IXक' (नगरपालिकाएँ - अनुच्छेद 243P से 243ZG) के अंतर्गत नगरपालिकाओं की संरचना, वार्ड समितियों और महानगर योजना समितियों (Metropolitan Planning Committees - MPC) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 243R के अनुसार किसी नगरपालिका के सभी स्थान उस नगरपालिका क्षेत्र के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए व्यक्तियों से भरे जाएंगे, और इसके अतिरिक्त राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा किसी नगरपालिका में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्तियों (जैसे लोकसभा या राज्यसभा के सदस्यों) को बिना मतदान के अधिकार के प्रतिनिधित्व प्रदान करने का उपबंध कर सकता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 243S के अनुसार तीस लाख या उससे अधिक की जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्र के लिए प्रत्येक राज्य में एक 'महानगर योजना समिति' (MPC) का गठन किया जाएगा, जो उस महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजनाएँ तैयार करेगी, और इस समिति के कुल सदस्यों में से कम-से-कम दो-तिहाई (2/3rd) सदस्य महानगर क्षेत्र की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों और जिला पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा अपने में से ही चुने जाएंगे। 3. संविधान के अनुच्छेद 243W के अंतर्गत राज्य के विधानमंडल द्वारा विधिवत कानून बनाकर नगरपालिकाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 18 विषयों से संबंधित कार्य सौंपे जा सकते हैं, किंतु इन विषयों पर कर लगाने या वित्तीय संसाधन जुटाने की शक्ति पूरी तरह से राज्य सरकार के अधीन होती है और नगरपालिकाओं को स्वतः कर लगाने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Multidimensional Poverty Index - MPI) और उसके आकलन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वैश्विक स्तर पर बहुआयामी गरीबी सूचकांक को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड पावर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है, तथा यह सूचकांक गरीबी के आकलन के लिए केवल आय या उपभोग व्यय को ही एकमात्र मानक के रूप में उपयोग करता है। 2. भारत में नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा जारी किया जाने वाला 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक' स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे तीन समान रूप से भारित आयामों (Dimensions) का उपयोग करता है, जिनके अंतर्गत कुल 12 संकेतकों (Indicators) को शामिल किया गया है। 3. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के आधार पर तैयार इस सूचकांक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या परिवार स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के इन 12 संकेतकों में से कम से कम एक-तिहाई (33.3%) भारित संकेतकों से वंचित (Deprived) पाया जाता है, तो उसे बहुआयामी रूप से गरीब माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → शारदा (काली) नदी मैदानी भाग में प्रवेश करने के बाद किस नदी में मिल जाती है? → भारतीय संविधान के भाग V और भाग VI के अंतर्गत 'संघीय कार्यपालिका' और 'राज्य कार्यपालिका' के बीच शक्तियों, विशेषाधिकारों एवं संवैधानिक प्रावधानों की तुलना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को किसी भी मामले में (जिसमें मृत्युदंड का मामला भी शामिल है) क्षमादान देने की शक्ति प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को भी राज्य सूची के विषयों पर मृत्युदंड के मामलों को छोड़कर अन्य सभी मामलों में क्षमादान, प्रातिलम्ब, विराम या परिहार की शक्ति प्राप्त होती है। 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 361 के अंतर्गत राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल को अपने कार्यालय की शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के पालन के लिए देश के किसी भी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता, और उनके कार्यकाल के दौरान उनके विरुद्ध किसी भी आपराधिक कार्यवाही को किसी भी न्यायालय में संस्थित या जारी नहीं रखा जा सकता। 3. जहाँ एक ओर लोकसभा को भंग करने का विशेषाधिकार पूरी तरह से प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति के पास निहित होता है, वहीं दूसरी ओर राज्य के राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना भी अपनी स्वविवेकनीय शक्तियों के तहत राज्य विधानसभा को विघटित (Dissolve) करने की पूर्ण संवैधानिक शक्ति प्राप्त होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → प्लास्टिक रीसाइक्लिंग पर 3rd वैश्विक सम्मेलन (GCPRS 2026) कहाँ आयोजित किया गया?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.