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प्राचीन भारतीय इतिहास एवं बौद्ध धर्म के संदर्भ में, 'हीनयान' (Hinayana) और 'महायान' (Mahayana) के अतिरिक्त बौद्ध धर्म के विकास क्रम में प्रकट होने वाले 'वज्रयान' (Vajrayana) संप्रदाय के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वज्रयान संप्रदाय का उदय मुख्य रूप से प्रारंभिक मध्यकाल (लगभग 7वीं शताब्दी ईस्वी के आसपास) में हुआ, और इसका केंद्र प्रचुर मात्रा में तांत्रिक प्रथाओं, मंत्रों, धारणाओं और अनुष्ठानों के विकास पर आधारित था, जिसके कारण इसे 'तांत्रिक बौद्ध धर्म' (Tantric Buddhism) के रूप में भी जाना जाता है।
- 2. वज्रयान परंपरा में 'वज्र' (थंडरबोल्ट या हीरा) को एक प्रमुख प्रतीक के रूप में अपनाया गया, जो आध्यात्मिक शक्ति और अजेय सत्य का प्रतिनिधित्व करता है, तथा इस मार्ग के अनुयायियों का मानना था कि पारंपरिक बोधिसत्व मार्ग (जिसमें सदियों साधना करनी पड़ती है) की तुलना में तांत्रिक अनुष्ठानों और योग साधना के माध्यम से इस जीवन में ही तुरंत निर्वाण प्राप्त किया जा सकता है।
- 3. वज्रयान बौद्ध धर्म का प्रभाव केवल भारत के कुछ क्षेत्रों (जैसे बंगाल और बिहार के पाल राजवंश के दौरान) तक ही सीमित रहा, और इसका प्रसार तिब्बत, चीन या दक्षिण-पूर्व एशिया के किसी भी अन्य देश में नहीं हुआ, क्योंकि वहाँ केवल थेरवाद (Theravada) और महायान का ही वर्चस्व था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: वज्रयान संप्रदाय का उदय गुप्तोत्तर काल (लगभग 7वीं शताब्दी ईस्वी) में हुआ। इसमें महायान दर्शन के साथ-साथ गुप्त मंत्रों, तंत्रों, योग साधना और अनुष्ठानों का सम्मिश्रण हुआ, इसलिए इसे 'तांत्रिक बौद्ध धर्म' भी कहा जाता है। कथन 2 सही है: वज्रयान में 'वज्र' (Diamond/Thunderbolt) और 'घंटा' (Bell) इसके प्रमुख अनुष्ठानिक प्रतीक हैं। इस संप्रदाय की मान्यता थी कि यह मार्ग अत्यंत तीव्र गति से (कम समय में) बुद्धत्व प्राप्त करने का साधन प्रदान करता है। कथन 3 गलत है: वज्रयान बौद्ध धर्म का प्रसार केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका व्यापक प्रसार तिब्बत (जहाँ इसे लामावाद के रूप में जाना गया), भूटान, मंगोलिया और नेपाल में हुआ। पाल वंश के दौरान बंगाल और बिहार इसके प्रमुख केंद्र थे, और विक्रमशिला विश्वविद्यालय इस शिक्षा का एक बड़ा केंद्र था।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की घोषणा और उसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, तथा 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के पश्चात राष्ट्रपति केवल 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर ही आपातकाल की उद्घोषणा कर सकता है।
2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके निरंतरता के अनुमोदन से संबंधित प्रत्येक प्रस्ताव को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम 'दो-तिहाई बहुमत' (Special Majority) द्वारा पारित किया जाना अनिवार्य होता है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभावी होने के दौरान, संविधान का 'अनुच्छेद 19' स्वतः निलंबित हो जाता है, जिसके लिए राष्ट्रपति द्वारा किसी पृथक आदेश को जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है, बशर्ते आपातकाल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर घोषित किया गया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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युद्ध के बाद भारत ऐसा घाव बन जायेगा जो ब्रिटिश साम्राज्य की ताकत को क्षीण कर देगा - यह कथन किसका है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की 'रिट अधिकारक्षेत्र' (Writ Jurisdiction) तथा 'सार्वजनिक हित याचिका' (PIL) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को केवल 'मूल अधिकारों' (Fundamental Rights) के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह इसका एक मूल अधिकार क्षेत्र (Original Jurisdiction) है, जिसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों के हनन होने पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।
2. 'लोकूश कुमार बनाम बिहार राज्य' या ऐतिहासिक 'पी. एन. भगवती' के दौर की न्यायिक सक्रियता के परिणामों के तहत, भारत में 'सार्वजनिक हित याचिका' (PIL) की अवधारणा को विकसित किया गया, जिसके अंतर्गत 'लोकस स्टैंडी' (Locus Standi - यानी मुकदमेबाजी का अधिकार) के पारंपरिक कठोर नियम को शिथिल किया गया, जिससे किसी भी जनहितैषी व्यक्ति या संस्था द्वारा समाज के उपेक्षित और असहाय वर्गों की ओर से अदालत में याचिका दायर की जा सके।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 32 के तहत प्रदत्त रिट अधिकारक्षेत्र सर्वोच्च न्यायालय की 'संविधान की मूल संरचना' (Basic Structure) का एक अभिन्न अंग है, और संसद द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से भी सर्वोच्च न्यायालय की इस शक्ति को छीना या समाप्त नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) और 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) एक वैधानिक, स्वायत्त निकाय है जिसका मुख्यालय चेन्नई में स्थित है, और यह देश के जैविक संसाधनों के संरक्षण, उनके संधारणीय उपयोग तथा जैव संसाधनों तक पहुँच से प्राप्त लाभ के न्यायसंगत और निष्पक्ष बँटवारे को विनियमित करता है।
2. यह अधिनियम त्रि-स्तरीय संस्थागत तंत्र का प्रावधान करता है जिसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर NBA, राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB) और स्थानीय स्तर पर पंचायत स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMC) गठित की जाती हैं, तथा सभी जैव विविधता प्रबंधन समितियों के लिए स्थानीय स्तर पर 'लोक जैव विविधता रजिस्टर' (PBR) तैयार करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
3. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अनुसार, भारत के किसी भी नागरिक या संस्था को देश के भीतर पाए जाने वाले किसी भी जैविक संसाधन का उपयोग करने या पारंपरिक ज्ञान का व्यावसायिक उपयोग करने से पहले NBA से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, भले ही वह व्यक्ति या संस्था भारतीय मूल की ही क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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इब्न बतूता किसके शासनकाल में भारत आया था?
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