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Indian Polity
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लोक लेखा समिति में कुल कितने सदस्य होते हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कुल 22 सदस्य होते हैं।
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के प्रावधानों के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के आधे सदस्यों के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि उन्होंने नियुक्ति की तिथि से ठीक पहले भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्षों तक पद धारण किया हो।
2. संविधान के अनुच्छेद 318 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों को विनियमित करने की शक्ति भारत के राष्ट्रपति में निहित होती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के मामले में यह शक्ति पूरी तरह से संबंधित राज्य के राज्यपाल के पास होती है।
3. अनुच्छेद 322 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के व्यय, जिसमें आयोग के सदस्यों या कर्मचारियों को देय या उनके संबंध में कोई वेतन, भत्ते और पेंशन शामिल हैं, भारत की संचित निधि पर 'भारित व्यय' (Charged Expenditure) होते हैं, और इन पर संसद में मतदान नहीं कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संवैधानिक प्रावधानों, शक्तियों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा, जो राज्य सभा का पदेन सभापति होता है, और जब वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उसके कृत्यों का निर्वहन करता है, तब उसे राज्य सभा के सभापति के रूप में मिलने वाले वेतन और भत्ते प्राप्त नहीं होते बल्कि उसे राष्ट्रपति के वेतन और भत्ते प्राप्त होते हैं।
2. अनुच्छेद 75(1) के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, किंतु मंत्रिपरिषद में कुल मंत्रियों की संख्या (प्रधानमंत्री सहित) लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती, और यह प्रावधान मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में संशोधित किया गया।
3. सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के तहत अनुच्छेद 75(3) में यह स्पष्ट किया गया है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि यदि लोकसभा द्वारा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो केवल संबंधित विभाग के मंत्री को ही त्यागपत्र देना पड़ता है, पूरी मंत्रिपरिषद को नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके न्यायिक प्रवर्तन तथा सामाजिक-आर्थिक दर्शन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 37 में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, किंतु ये न्यायालय द्वारा किसी भी रूप में न्यायोचित (Justiciable) नहीं हैं।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे 'केशवानंद भारती वाद' और 'मिनर्वा मिल्स वाद') में यह प्रतिपादित किया है कि मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं, तथा संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) के संतुलन को बनाए रखने के लिए इनके मध्य सामंजस्य आवश्यक है।
3. अनुच्छेद 39A के अंतर्गत 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' का प्रावधान मूल संविधान में ही निहित था, जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा विधिवत रूप से जोड़ा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के गठन का आधार कैबिनेट मिशन योजना, 1946 था, जिसके तहत संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिसमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों को 293 सीटें और देशी रियासतों को 93 सीटें आवंटित की गई थीं।
2. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से हुआ था, और इसमें देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा नामित किया जाना था, जिसके कारण संविधान सभा एक आंशिक रूप से निर्वाचित और आंशिक रूप से मनोनीत निकाय थी।
3. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसका मुस्लिम लीग ने बहिष्कार किया था, और इस अवसर पर सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को फ्रांस की परंपरा के अनुसार सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Interim President) चुना गया था, जबकि बाद में 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्यीय प्रशासनिक व वित्तीय संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह जनहित में अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना कर सकता है, और इस परिषद् के निर्णयों या सिफारिशों का देश के सभी राज्यों और केंद्र सरकार पर पूर्ण रूप से विधिक और बाध्यकारी (Legally Binding) प्रभाव होता है।
2. पुंछी आयोग (Punchhi Commission, 2007-2010) ने अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश की थी कि अंतर-राज्यीय परिषद् की बैठक वर्ष में कम से कम तीन बार अनिवार्य रूप से आयोजित की जानी चाहिए ताकि केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय और नीतिगत संवाद सुनिश्चित हो सके।
3. अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग (Finance Commission) भी एक प्रकार का सांविधिक निकाय है जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण तथा राज्यों को दी जाने वाली सहायता अनुदान के सिद्धांतों पर राष्ट्रपति को संस्तुतियां देता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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