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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्यीय प्रशासनिक व वित्तीय संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह जनहित में अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना कर सकता है, और इस परिषद् के निर्णयों या सिफारिशों का देश के सभी राज्यों और केंद्र सरकार पर पूर्ण रूप से विधिक और बाध्यकारी (Legally Binding) प्रभाव होता है।
  2. 2. पुंछी आयोग (Punchhi Commission, 2007-2010) ने अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश की थी कि अंतर-राज्यीय परिषद् की बैठक वर्ष में कम से कम तीन बार अनिवार्य रूप से आयोजित की जानी चाहिए ताकि केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय और नीतिगत संवाद सुनिश्चित हो सके।
  3. 3. अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग (Finance Commission) भी एक प्रकार का सांविधिक निकाय है जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण तथा राज्यों को दी जाने वाली सहायता अनुदान के सिद्धांतों पर राष्ट्रपति को संस्तुतियां देता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

उपर्युक्त में से कोई भी कथन सही नहीं है। **कथन 1 असत्य है:** संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत गठित अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) एक 'सलाहकार निकाय' (Advisory Body) है। इसके द्वारा दी गई सिफारिशें या निर्णय केंद्र या राज्य सरकारों पर बाध्यकारी (Binding) नहीं होते, बल्कि उनका प्रकृति में केवल परामर्शदाता का होता है। **कथन 2 असत्य है:** पुंछी आयोग (केंद्र-राज्य संबंध आयोग) ने यह सिफारिश की थी कि अंतर-राज्यीय परिषद् की बैठक वर्ष में कम से कम **दो बार** (वर्ष में दो सत्र) अनिवार्य रूप से होनी चाहिए, तीन बार नहीं। **कथन 3 असत्य है:** वित्त आयोग एक **संवैधानिक निकाय** (Constitutional Body) है जिसका गठन अनुच्छेद 280 के अंतर्गत प्रत्यक्ष रूप से संविधान के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक पाँच वर्ष पर किया जाता है, न कि इसे केवल 'सांविधिक निकाय' (Statutory Body - जो संसद के अधिनियम द्वारा बनता है) कहा जा सकता है। भारतीय संविधान के इन महत्वपूर्ण वैधानिक प्रावधानों के बारे में अधिक जानने के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
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