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Indian Polity
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राज्यपाल का कार्यकाल?

Detailed Explanation

निश्चित नहीं।
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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अधीन 'विधि' (Law) के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने वाले अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम और अधिसूचनाएं तो शामिल हैं, किंतु कोई प्रथा या रीति (Custom or Usage) जिसके पास विधि का बल है, इसके दायरे में नहीं आती है। 2. संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) सभी नागरिकों को कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार देता है, किंतु राज्य को यह शक्ति प्राप्त है कि वह इस अधिकार पर किसी भी प्रकार का व्यावसायिक या तकनीकी अर्हता (Professional or Technical Qualifications) से संबंधित प्रतिबंध आरोपित कर सके और साथ ही राज्य द्वारा किसी व्यापार, व्यवसाय या सेवा का पूर्ण या आंशिक एकाधिकार (Monopoly) अपने हाथ में लिए जाने को विधि-मान्यता प्रदान कर सके। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'ए.के. गोपालन वाद' (1950) में अपनाए गए संकुचित दृष्टिकोण को पलटते हुए 'मेनका गांधी वाद' (1978) में यह अभिनिर्धारित किया गया कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता' के संरक्षण के लिए 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) में अमेरिकी संविधान के 'विधि की सम्यक् प्रक्रिया' (Due Process of Law) के तत्वों, अर्थात् प्रक्रिया के न्यायसंगत, निष्पक्ष और तार्किक होने की अनिवार्यता को भी शामिल माना जाएगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल और मुख्यमंत्री की शक्तियों, संवैधानिक स्थिति तथा उनके पारस्परिक संबंधों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 163 के अनुसार राज्यपाल को अपनी कृतियों के निर्वहन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा, किंतु यदि कोई प्रश्न यह उठता है कि क्या कोई विषय ऐसा है जिसके संबंध में संविधान द्वारा या उसके अधीन राज्यपाल को अपने विवेक से कार्य करना अपेक्षित है, तो राज्यपाल द्वारा अपने विवेक से किया गया निर्णय अंतिम होगा और उसके इस निर्णय की विधिुधता को किसी भी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती है कि उसे अपने विवेक से कार्य करना चाहिए था या नहीं। 2. संविधान के अनुच्छेद 164 के अंतर्गत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, और राज्यपाल मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य को व्यक्तिगत रूप से भी पदच्युत (Dismiss) कर सकता है, भले ही मुख्यमंत्री उसकी संस्तुति न करे। 3. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत राज्यपाल द्वारा की जाती है, और वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, तथा उसे राज्य के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त होता है, और राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों (यदि द्विसदनीय व्यवस्था हो) या उनकी समितियों में बोलने तथा भाग लेने का अधिकार तो होता है, किंतु उसे मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, प्रधानमंत्री की नियुक्ति और मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (राज्यसभा और लोकसभा) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के द्वारा होता है, और इस निर्वाचक गण में संसद के मनोनीत सदस्य भी शामिल होते हैं, किंतु राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य इसमें भाग नहीं लेते हैं। 2. अनुच्छेद 75 (1) के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, और संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित है कि प्रधानमंत्री या किसी भी मंत्री के लिए यह अनिवार्य है कि वह नियुक्ति के समय संसद के किसी भी सदन का सदस्य हो, अन्यथा छह महीने के भीतर उसे संसद के किसी सदन की सदस्यता प्राप्त करनी होगी। 3. अनुच्छेद 75 (3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका विधिक निहितार्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होता है, तथा यदि प्रधानमंत्री अपने पद से त्यागपत्र दे देता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो मंत्रिपरिषद स्वतः विघटित हो जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसकी जगह 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया, तथा यह भी अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा इसका लिखित अनुमोदन प्रधानमंत्री सहित संघ के कैबिनेट मंत्रियों की बैठक में किया गया हो। 2. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह स्वतंत्रताएं स्वतः निलंबित हो जाती हैं, भले ही आपातकाल 'युद्ध या बाह्य आक्रमण' के आधार पर लगाया गया हो या 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर, और इसके लिए अलग से किसी राष्ट्रपति के आदेश की आवश्यकता नहीं होती है। 3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) की उद्घोषणा को एक बार में संसद द्वारा अनुमोदित किए जाने के पश्चात अधिकतम एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, जिसे बाद में 44वें संशोधन द्वारा घटाकर छह महीने कर दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और भारतीय संसद की विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है, किंतु यह नियम केवल विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित करने पर लागू होता है, स्वेच्छा से विदेशी पासपोर्ट प्राप्त करने पर नहीं। 2. संविधान के अनुच्छेद 10 के तहत प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसा नागरिक बना रहेगा। 3. संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को यह पूर्ण शक्ति प्रदान करता है कि वह नागरिकता के अर्जन और उसकी समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में कोई भी उपबंध कर सके, और इसके अंतर्गत संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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