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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और भारतीय संसद की विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है, किंतु यह नियम केवल विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित करने पर लागू होता है, स्वेच्छा से विदेशी पासपोर्ट प्राप्त करने पर नहीं।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 10 के तहत प्रत्येक व्यक्ति, जो इस भाग के पूर्वगामी उपबंधों में से किसी के अधीन भारत का नागरिक है या समझा जाता है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसा नागरिक बना रहेगा।
  3. 3. संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को यह पूर्ण शक्ति प्रदान करता है कि वह नागरिकता के अर्जन और उसकी समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में कोई भी उपबंध कर सके, और इसके अंतर्गत संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 9 के अंतर्गत न केवल विदेशी राज्य की स्वेच्छा से नागरिकता प्राप्त करने पर, बल्कि स्वेच्छा से किसी अन्य देश का पासपोर्ट प्राप्त करने पर भी भारतीय नागरिकता समाप्त मानी जाती है (सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों के अनुसार)। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 10 स्पष्ट करता है कि नागरिकता के अधिकार संसद के कानूनों के अधीन बने रहेंगे। कथन 3 असत्य है क्योंकि संसद द्वारा नागरिकता अधिनियम के तहत बनाए गए कोई भी कानून संविधान के अन्य भागों (विशेषकर मूल अधिकार जैसे अनुच्छेद 14 और 21) के विरुद्ध होने पर न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के अधीन होते हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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