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BPSC TRE 4.0
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक और हीनताजन्य रोगों (Deficiency Diseases) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'स्कर्वी' (Scurvy) रोग विटामिन सी (एस्कॉर्बिक एसिड) की दीर्घकालिक कमी के कारण होता है, जिससे कोलेजन प्रोटीन के संश्लेषण में बाधा उत्पन्न होती है, मसूड़ों से खून आना और घावों का जल्दी न भरना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
- 2. 'बेरी-बेरी' (Beriberi) रोग विटामिन बी-1 (थायमीन) की कमी से होने वाला विकार है, जो मुख्य रूप से तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और हृदय प्रणाली को प्रभावित करता है, तथा अत्यधिक पॉलिश किए गए चावल के सेवन से इसकी संभावना बढ़ जाती है।
- 3. 'रिकेट्स' (Rickets), जो बच्चों में होने वाला एक हड्डियों का रोग है, विटामिन डी (कैल्सीफेरोल) और कैल्शियम की कमी के कारण होता है, जिससे अस्थियाँ कमजोर और विकृत हो जाती हैं, जबकि वयस्कों में इसी स्थिति को 'ऑस्टियोमलेशिया' (Osteomalacia) कहा जाता है।
- 4. 'पेलाग्रा' (Pellagra) रोग विटामिन बी-2 (राइबोफ्लेविन) की कमी के कारण होता है, जिसे '3D रोग' (डर्मेटाइटिस, डायरिया और डिमेंशिया) के रूप में जाना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। स्कर्वी विटामिन सी की कमी से, बेरी-बेरी विटामिन बी-1 (थायमीन) की कमी से और रिकेट्स/ऑस्टियोमलेशिया विटामिन डी तथा कैल्शियम की कमी से होता है। कथन 4 असत्य है क्योंकि 'पेलाग्रा' रोग विटामिन बी-2 (राइबोफ्लेविन) की कमी से नहीं, बल्कि विटामिन बी-3 (नियासिन या निकोटिनिक एसिड) की कमी के कारण होता है। ऐसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और वैद्यानिक प्रश्नों के अभ्यास के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर जा सकते हैं।
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वित्तीय स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट 2025 में किस राज्य को शीर्ष प्रदर्शनकर्ता के रूप में पहचाना गया?
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जीव जगत के वर्गीकरण (Biological Classification) और मोनेरा जगत (Kingdom Monera) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आर.एच. व्हिटेकर (R.H. Whittaker) द्वारा वर्ष 1969 में प्रस्तावित पाँच-जगह (Five-Kingdom) वर्गीकरण प्रणाली मुख्य रूप से कोशिका संरचना, पोषण की विधि, शारीरिक संगठन और प्रजनन पर आधारित थी, जिसमें प्रोकैरियोटिक जीवों को 'मोनेरा जगत' में रखा गया है।
2. मोनेरा जगत के अंतर्गत आने वाले सभी जीव वास्तविक केंद्रक (True Nucleus) और झिल्ली-बद्ध कोशिका अंगों (Membrane-bound organelles) से युक्त होते हैं, तथा इनमें आनुवंशिक पदार्थ केंद्रक झिल्ली से घिरा होता है।
3. नील-हरित शैवाल (Cyanobacteria) और माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma) मोनेरा जगत के प्रमुख उदाहरण हैं, जिनमें माइकोप्लाज्मा को सबसे छोटी जीवित कोशिका माना जाता है जिसमें कोशिका भित्ति (Cell Wall) का पूर्ण अभाव होता है।
4. अधिकांश बैक्टीरिया ( जीवाणु ) विषमपोषी (Heterotrophic) होते हैं, किंतु कुछ जीवाणु स्वपोषी (Autotrophic) भी होते हैं जो रासायनिक ऊर्जा या प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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यंग इंडिया किसकी पुस्तक है?
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प्राचीन एवं आधुनिक भारतीय इतिहास तथा साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित पुस्तकों और उनके लेखकों की जोड़ियों पर विचार कीजिए:
1. 'अनहैप्पी इंडिया' (Unhappy India) - लाला लाजपत राय
2. 'इंडिया डिवाइडेड' (India Divided) - डॉ. राजेंद्र प्रसाद
3. 'द फिलासफी ऑफ द बॉम्ब' (The Philosophy of the Bomb) - भगवती चरण बोहरा
4. 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' (Poverty and Un-British Rule in India) - सुरेंद्रनाथ बनर्जी
उपर्युक्त जोड़ियों में से कौन-सी/से सही सुमेलित है/हैं?
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जीव जगत के जैविक वर्गीकरण (Biological Classification) और विशेष रूप से 'मोनेरा जगत' (Kingdom Monera) के अंतर्गत बैक्टीरिया, माइकोप्लाज्मा और आर्कीबैक्टीरिया की संरचनात्मक एवं कार्यप्रणाली विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मोनेरा जगत के सभी जीव प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic) होते हैं, जिनमें सुस्पष्ट केंद्रक (True Nucleus) और झिल्लीबद्ध कोशिकांग (Membrane-bound organelles) का अभाव होता है, किंतु इनका आनुवंशिक पदार्थ कोशिका द्रव्य में बिना केंद्रक आवरण के बिखरा रहता है जिसे न्यूक्लियोइड (Nucleoid) कहा जाता है।
2. माइकोप्लाज्मा पादप जगत के सबसे छोटे ज्ञात जीव हैं, जिनमें कोशिका भित्ति (Cell Wall) पूरी तरह अनुपस्थित होती है और वे बिना ऑक्सीजन के भी जीवित रह सकते हैं, जिसके कारण इन्हें 'पादप जगत का जोकर' भी कहा जाता है।
3. आर्कीबैक्टीरिया (Archaebacteria) अत्यंत विषम और प्रतिकूल वातावरणीय परिस्थितियों (जैसे अत्यधिक गर्म झरने, उच्च लवणीय क्षेत्र और दलदली स्थानों) में जीवित रहने के लिए अनुकूलित होते हैं, क्योंकि इनकी कोशिका भित्ति की रासायनिक संरचना सामान्य बैक्टीरिया से भिन्न होती है।
4. साइनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria), जिन्हें नील-हरित शैवाल भी कहा जाता है, मोनेरा जगत के अंतर्गत आते हैं और इनमें प्रकाश संश्लेषण के लिए क्लोरोफिल-ए पाया जाता है, किंतु इनमें वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने की कोई क्षमता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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