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BPSC TRE 4.0
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बिहार की जलवायु, नदी तंत्र और कृषि पद्धतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बिहार की जलवायु मुख्य रूप से मानसूनी प्रकार की है, जिसमें उत्तर-पश्चिम से आने वाली दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा राज्य में सर्वाधिक वर्षा कराती है, जबकि सर्दियों के महीनों में होने वाली हल्की वर्षा मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण होती है।
  2. 2. उत्तर बिहार की नदियाँ (जैसे कोसी, गंडक, बागमती और कमला) हिमालयी नदियाँ हैं जो सदाबहार और मार्ग बदलने (प्रवाह परिवर्तन) के लिए कुख्यात हैं, जबकि दक्षिण बिहार की नदियाँ (जैसे सोन, पुनपुन, किउल और अजय) प्रायद्वीपीय पठार से निकलती हैं और मौसमी होने के कारण गर्मियों में प्रायः सूख जाती हैं।
  3. 3. बिहार के टाल क्षेत्र (Tal Region) में कृषि पद्धति सामान्यतः 'पायरा' (Paira/Utera) cropping system पर आधारित होती है, जिसके अंतर्गत धान की कटाई से ठीक पहले खेत में ही मटर, मसूर या चना जैसे दलहन की फसलें छिड़क दी जाती हैं ताकि मृदा की बची हुई नमी का सदुपयोग किया जा सके।
  4. 4. कोसी बेसिन क्षेत्र में पाई जाने वाली बलसुंदरी मृदा (Balsundari Soil) अत्यधिक अम्लीय प्रवृत्ति की होती है, जो मक्का और जूट की कृषि के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं मानी जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

बिहार की भौगोलिक स्थिति, जलवायु, नदी प्रणालियों और पारंपरिक कृषि पद्धतियों का विश्लेषण करने पर कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। बिहार में मानसूनी जलवायु पाई जाती है जहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा मुख्य वर्षा का स्रोत है और पश्चिमी विक्षोभ से रबी फसलों को लाभ मिलता है। उत्तर बिहार की नदियाँ हिमालयी एवं सदाबहार हैं तथा मार्ग बदलने के लिए जानी जाती हैं, जबकि दक्षिण बिहार की नदियाँ पठारी और मौसमी हैं। टाल क्षेत्र में 'पायरा' (उतेरा) कृषि पद्धति अपनाई जाती है जहाँ नमी का उपयोग करके दलहन उगाए जाते हैं। कथन 4 असत्य है क्योंकि बलसुंदरी मृदा मुख्य रूप से दोमट होती है और मक्का-जूट के लिए अनुकूल है। अधिक अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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