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BPSC TRE 4.0
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दिल्ली सल्तनत और मुगल काल के प्रशासनिक ढांचे, राजस्व प्रणालियों तथा सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सल्तनत काल में 'इक्ता' प्रणाली एक विशिष्ट भू-राजस्व और प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसके तहत सैन्य अधिकारियों (इक्तेदारों) को उनके वेतन के बदले भूमि या उसका राजस्व आवंटित किया जाता था, और अलाउद्दीन खिलजी ने इस व्यवस्था को केंद्रीय नियंत्रण में लाने के लिए 'पैमाइश' की शुरुआत कर भू-राजस्व को बढ़ाकर उपज का आधा (50%) कर दिया था।
- 2. शेरशाह सूरी द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत 'जब्ती प्रणाली' और 'दहशाला पद्धति' के प्रारंभिक रूपों को लागू किया गया, जिसमें भूमि की पैमाइश (सिकंदरी गज द्वारा) और उसकी उर्वरता के आधार पर वर्गीकरण किया जाता था, तथा किसानों को 'पट्टा' देने और 'कबूलियत' लेने की प्रथा शुरू की गई।
- 3. अकबर के शासनकाल में टोडमॉर (राजा टोडरमल) की सहायता से विकसित 'दहशाला बंदोबस्त' (आदाइन-ए-दहशाला) के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और औसत मूल्यों के आधार पर मालगुजारी तय की जाती थी, और इस प्रणाली में राज्य की मांग फसल का ठीक एक-तिहाई (33%) हिस्सा निर्धारित की गई थी।
- 4. मुगलकालीन 'मनसबदारी व्यवस्था' पूरी तरह से आनुवंशिक थी, जिसमें प्रत्येक मनसबदार को अपने पद के अनुसार 'जात' (व्यक्तिगत पद और प्रतिष्ठा) और 'सवार' (घुड़सवार सैनिकों की संख्या) रखनी पड़ती थी, और जहांगीर के शासनकाल में इस व्यवस्था में 'दो-अस्पा और सिंह-अस्पा' (Do-aspa and Sih-aspa) की नवीन उप-व्यवस्था जोड़ी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि अलाउद्दीन खिलजी ने इक्ता व्यवस्था पर कड़ा नियंत्रण रखा और भू-राजस्व बढ़ाकर उपज का 50% (बिस्वा के आधार पर पैमाइश) कर दिया था। कथन 2 सत्य है क्योंकि शेरशाह सूरी ने भूमि सुधारों के तहत पैमाइश, पट्टा और कबूलियत की व्यवस्था की थी। कथन 3 असत्य है क्योंकि दहशाला बंदोबस्त में राज्य की मांग पिछले 10 वर्षों के औसत उत्पादन का एक-तिहाई नहीं बल्कि लगभग एक-तिहाई से कुछ भिन्न विभिन्न फसलों के औसत पर आधारित थी, किंतु पारंपरिक रूप से इसे औसत उपज का एक-तिहाई माना जाता है; तथापि, दहशाला में मुख्य रूप से प्रति बीघा औसत पैदावार का एक-तिहाई हिस्सा तय किया गया था, लेकिन अकबर के काल में राजस्व निर्धारण की कई प्रणालियाँ (बटाई, नस्क, जब्ती) थीं। यहाँ अधिक सूक्ष्म रूप से देखें तो कथन 4 सत्य है क्योंकि मनसबदारी व्यवस्था आनुवंशिक नहीं थी (यह सम्राट की इच्छा पर निर्भर थी) और जहांगीर ने 'दो-अस्पा और सिंह-अस्पा' प्रणाली शुरू की थी जिसके तहत बिना सवार पद बढ़ाए सैनिकों की संख्या बढ़ाई जा सकती थी। चूँकि कथन 3 में दहशाला प्रणाली की सटीक दर और जटिलताओं को लेकर भ्रम हो सकता है और कथन 4 में मनसबदारी की गैर-आनुवंशिक प्रकृति तथा जहांगीर के सुधार का स्पष्ट उल्लेख है, अतः 1, 2 और 4 सही हैं। परीक्षा की विस्तृत तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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बिहार समसामयिक और राज्य की आर्थिक-सामाजिक पहलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार सरकार द्वारा शुरू की गई 'मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना' के तहत राज्य की महिलाओं को नया उद्योग स्थापित करने के लिए कुल 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें 5 लाख रुपये का अनुदान (Subsidy) और शेष 5 लाख रुपये ब्याज-मुक्त ऋण के रूप में दिए जाते हैं।
2. 'बिहार जाति आधारित गणना, 2022' के अंतिम आँकड़ों के अनुसार राज्य की कुल जनसंख्या लगभग 13.07 करोड़ दर्ज की गई, जिसमें कुल जनसंख्या का सबसे बड़ा हिस्सा अत्यंत पिछड़ी जातियों (EBC) का लगभग 36.01 प्रतिशत है।
3. राज्य के राजगीर में नवनिर्मित 'बिहार खेल विश्वविद्यालय' (Bihar Sports University) के अधिनियम के तहत मुख्यमंत्री राज्य के इस विश्वविद्यालय के पदेन कुलाधिपति (Chancellor) होते हैं, जबकि उप-मुख्यमंत्री को इसका सह-कुलाधिपति बनाया गया है।
4. जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य के सभी सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) संरचनाओं को अनिवार्य किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें, 74वें और 97वें संविधान संशोधनों द्वारा स्थापित त्रि-स्तरीय स्थानीय स्वशासन (पंचायतों, नगरपालिकाओं और सहकारी समितियों) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के अनुच्छेद 243-H के अंतर्गत राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा पंचायतों को कुछ कर, शुल्क, टोल और फीस आरोपित करने, एकत्र करने तथा विनियमित करने की शक्ति प्रदान कर सकता है, साथ ही राज्य की संचित निधि से पंचायतों को अनुदान-सहायता दिए जाने का प्रावधान भी कर सकता है।
2. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य में जिला स्तर पर एक 'जिला योजना समिति' (District Planning Committee) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की योजनाओं को समेकित करके जिले के लिए विकास योजना का प्रारूप तैयार करती है।
3. 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत 'सहकारी समितियां बनाने का अधिकार' को एक मूल अधिकार का दर्जा दिया गया, तथा संविधान के भाग IX-B में अनुच्छेद 243-ZH के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया कि किसी भी सहकारी समिति के निदेशक बोर्ड में अधिकतम सदस्यों की संख्या 25 से अधिक नहीं होगी।
4. 73वें संविधान संशोधन के अनुसार पंचायतों के कार्यकाल (5 वर्ष) के पूर्व विघटन की स्थिति में यदि नए चुनाव कराए जाते हैं, तो नया निर्वाचित पंचायत निकाय शेष बची हुई पूरी 5 वर्ष की अवधि के लिए कार्य करेगा, बशर्ते विघटन के बाद शेष कार्यकाल छह महीने से कम का न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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पादप आकारिकी (Plant Morphology) और पौधों में जनन (Plant Reproduction) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि इन्हें भूमि पर जीवित रहने के लिए जल की आवश्यकता नहीं होती, किंतु निषेचन प्रक्रिया पूरी करने के लिए जल अनिवार्य होता है, तथा इनकी मुख्य पादप काय अगुणित (Gametophyte) होती है।
2. आवृत्तबीजी (Angiosperms) पौधों में दोहरा निषेचन (Double Fertilization) एक विशिष्ट लक्षण है, जिसमें एक नर युग्मकमक अंड कोशिका के साथ संलयन कर युग्मनज (Zygote) बनाता है, जबकि दूसरा नर युग्मकमक द्वितीयक केंद्रक के साथ संलयन कर त्रिगुणित (Triploid) प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक का निर्माण करता है।
3. जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms) यानी अनावृतबीजी पौधों में बीज नग्न (Uncovered) होते हैं क्योंकि इनमें अंडाशय (Ovary) अनुपस्थित होता है, और इनमें परागण प्रत्यक्ष रूप से बीजांड के छिद्र (Micropyle) पर वायु द्वारा होता है।
4. पुष्प के कृत्रिम संकरण (Artificial Hybridization) के दौरान उभयलिंगी पुष्प से परागकोषों को परिपक्व होने से पहले ही हटाने की प्रक्रिया को 'विपुंसन' (Emasculation) कहा जाता है, जिसके पश्चात पुष्प को बटर पेपर की थैली से ढंक दिया जाता है जिसे 'बैगिंग' कहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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1857 ई. के विद्रोह के एक नेता कुंवर सिंह किस स्थान से संबंधित थे?
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1757 से 1857 के मध्य ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों, भू-राजस्व व्यवस्था और प्रशासनिक उत्पीड़न के विरुद्ध भारत में हुए 'अन्य जन आंदोलनों' (सैनिक विद्रोहों को छोड़कर) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1794 में बंगाल के मेदिनीपुर जिले में हुए 'चुअड़ विद्रोह' (Chuad Rebellion) का नेतृत्व दुर्जन सिंह और जगन्नाथ पातर ने किया था, जो मुख्य रूप से कंपनी प्रशासन द्वारा भारी राजस्व की मांग और पुलिस व्यवस्था में बदलाव के खिलाफ किया गया था।
2. मैसूर में ब्रिटिश आधिपत्य के विरुद्ध 1800 ईस्वी में हुआ 'धोंडजी वाघ का विद्रोह' मुख्य रूप से ब्रिटिश सेना द्वारा स्थानीय जमींदारों की भूमि छीने जाने के विरोध में था, जिसे अंततः ब्रिटिश जनरल वेलेजली की सेना द्वारा कुचल दिया गया था।
3. त्रावणकोर के दीवान वेलु थंपी द्वारा 1808-1809 में ईस्ट इंडिया कंपनी की सहायक संधि और अत्यधिक वित्तीय मांगों (सब्सिडी) के विरुद्ध किए गए विद्रोह में ब्रिटिश रेजिडेंट के महल पर आक्रमण किया गया था और 'कुंदारा उद्घोषणा' (Kundara Proclamation) के माध्यम से लोगों को अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष के लिए आह्वान किया गया था।
4. वर्ष 1838-1848 के दौरान कित्तूर के रानी चेनम्मा के उत्तराधिकारी के रूप में रायप्पा द्वारा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध 'कित्तूर विद्रोह' का दूसरा चरण चलाया गया, जिसमें मुख्य रूप से वफादार सैनिकों और किसानों ने अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध की रणनीति अपनाई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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