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BPSC TRE 4.0
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, ज्वालामुखी उद्गार के प्रकार और भूकंपीय तरंगों के संचलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भूकंप के उद्गम बिंदु को 'फोकस' (Focus) या हाइपोसेंटर कहा जाता है, जो पृथ्वी के भीतर स्थित होता है, जबकि इसके ठीक ऊपर धरातल पर स्थित बिंदु को 'अधिकरण' (Epicentre) कहा जाता है जहाँ सबसे पहले भूकंपीय तरंगें पहुँचती हैं।
- 2. प्राथमिक तरंगें (P-Waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं जो केवल ठोस माध्यम से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-Waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं और ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में गमन कर सकती हैं।
- 3. हवाई द्वीप पर पाया जाने वाला 'किलाउएआ' (Kilauea) ज्वालामुखी ढाल (Shield) ज्वालामुखी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अत्यधिक तरल और कम चिपचिपे बेसिक लावा (Basaltic lava) के शांत उद्गार से निर्मित होता है।
- 4. विस्फोटे उद्गारों के आधार पर 'पेलियन तुल्य' (Peléean type) ज्वालामुखी उद्गार सबसे अधिक विनाशकारी और भयंकर माने जाते हैं, जिनमें अत्यधिक गाढ़ा लावा, ज्वलनशील गैसों के बादल और पाइरोक्लास्टिक पदार्थ तीव्र गति से बाहर निकलते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में कथन 1, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं, जबकि कथन 2 असत्य है क्योंकि प्राथमिक तरंगें (P-Waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं और ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में गमन कर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-Waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं जो केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं। इस प्रकार के उच्च स्तरीय और विश्लेषणात्मक प्रश्न बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के नवीनतम पाठ्यक्रम और पैटर्न पर आधारित हैं।
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जीव जगत के पाँच जगत वर्गीकरण (Five-Kingdom Classification) के अंतर्गत मोनेरा (Monera) जगत के मुख्य लक्षणों और उनके जैव-रासायनिक गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मोनेरा जगत के सभी जीव प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic) होते हैं, जिनमें सुस्पष्ट केंद्रक (True nucleus), केंद्रक झिल्ली तथा झिल्ली-युक्त कोशिकांग (Membrane-bound organelles जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी काय आदि) पूर्णतः अनुपस्थित होते हैं।
2. इस जगत के अधिकांश जीवों की कोशिका भित्ति (Cell wall) मुख्य रूप से जटिल शर्करा और अमीनो एसिड से बने 'पेप्टिडोग्लाइकान' (Peptidoglycan) की बनी होती है, किंतु आर्कीबैक्टीरिया (Archaebacteria) की कोशिका भित्ति की रासायनिक संरचना सामान्य बैक्टीरिया से भिन्न होती है जो उन्हें अत्यधिक कठोर वातावरण में जीवित रहने में मदद करती है।
3. मोनेरा जगत के अंतर्गत आने वाले सायनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria) या नीले-हरे शैवाल यूकैरियोटिक पादपों की भाँति प्रकाश संश्लेषण करते हैं, किंतु इनमें क्लोरोफिल-ए वर्णक के साथ-साथ प्रकाश संश्लेषी पिगमेंट विशिष्ट रूप से प्रोकैरियोटिक साइटोप्लाज्म में फैले होते हैं, न कि क्लोरोप्लास्ट के भीतर।
4. अधिकांश बैक्टीरिया में जनन मुख्य रूप से लैंगिक विधि (Sexual reproduction) द्वारा होता है, जिसमें समसूत्री (Mitosis) या अर्धसूत्री (Meiosis) विभाजन के माध्यम से युग्मकों का निर्माण और संलयन होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान के विभिन्न स्रोतों, अनुच्छेदों, अनुसूचियों तथा बिहार के नगरीकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान की 11वीं अनुसूची जहाँ पंचायतों की शक्तियों और उत्तरदायित्वों से संबंधित 29 विषयों का उल्लेख करती है, वहीं 12वीं अनुसूची नगरपालिकाओं से संबंधित 18 विषयों का उल्लेख करती है, जिसे 74वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में जोड़ा गया था।
2. भारतीय संविधान के निर्माण के दौरान विभिन्न देशों के प्रावधानों को अंगीकृत किया गया था, जिसमें 'संसदीय विशेषाधिकार' और 'द्विसदनीयता' (Bicameralism) के प्रावधान ब्रिटिश संविधान से लिए गए हैं, जबकि 'मूल अधिकार' और 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review) की संकल्पना अमेरिका के संविधान से ली गई है।
3. भारत की 2011 की जनगणना के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, बिहार की कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत मात्र 11.29% है, जो देश के सभी राज्यों में सबसे कम नगरीकृत राज्यों में से एक होने की स्थिति को दर्शाता है।
4. संविधान के अनुच्छेद 243-Q के अनुसार, प्रत्येक राज्य में संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद, और बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का गठन किया जाता है, जिसके लिए राज्यपाल द्वारा अधिसूचना जारी की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भौतिकी के विविध नियमों, सिद्धांतों और उनके अनुप्रयोगों (Applications) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'रमन प्रभाव' (Raman Effect) प्रकाश के अप्रात्याशित प्रकीर्णन (Inelastic Scattering) की परिघटना है, जिसमें जब एक वर्णक प्रकाश (Monochromatic Light) किसी पारदर्शी माध्यम ( ठोस, द्रव या गैस) से गुजरता है, तो प्रकीर्णित प्रकाश में आपतित प्रकाश की मूल आवृत्ति के अतिरिक्त अन्य आवृत्तियों की स्पेक्ट्रमी रेखाएँ (Stokes और Anti-Stokes lines) भी प्राप्त होती हैं।
2. 'सुपरकंडक्टिविटी' (Superconductivity) या अतिचालकता की स्थिति में किसी पदार्थ का विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है और वह अपने भीतर से बाहरी चुंबकीय फ्लक्स को बाहर धकेल देता है, जिसे 'मिसनर प्रभाव' (Meissner Effect) कहा जाता है।
3. 'सीबेक प्रभाव' (Seebeck Effect) के अनुसार, जब किसी बन्द परिपथ (Thermocouple) के दो अलग-अलग धातुओं के जंक्शनों को भिन्न-भिन्न तापमान पर रखा जाता है, तो परिपथ में कोई विद्युत वाहक बल उत्पन्न नहीं होता है, बल्कि इसके विपरीत परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर जंक्शनों पर ऊष्मा का अवशोषण या उत्सर्जन होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, साहित्यिक कृतियों और पुरातात्विक साक्ष्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य का 'अर्थशास्त्र' केवल राजनीति और शासनकला पर आधारित एक ग्रंथ है, जिसमें मौर्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, गुप्तचर तंत्र और कर प्रणाली का विस्तृत विवरण मिलता है, किंतु इसमें आर्थिक और सामाजिक जीवन का कोई उल्लेख नहीं है।
2. विशाखदत्त द्वारा रचित 'मुद्राराक्षस' एक ऐतिहासिक नाटक है, जिससे नंद वंश के पतन और चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा चाणक्य की सहायता से मौर्य साम्राज्य की स्थापना के षड्यंत्रों की जानकारी प्राप्त होती है।
3. बानभट्ट की 'हर्षचरित' संस्कृत गद्य साहित्य का एक उत्कृष्ट ऐतिहासिक ग्रंथ है, जिसमें सम्राट हर्षवर्धन की वंशावली, उनकी विजयों और तत्कालीन सामाजिक-धार्मिक परिस्थितियों का सजीव चित्रण किया गया है।
4. संगम साहित्य (जो दक्षिण भारत के प्राचीन इतिहास का प्रमुख स्रोत है) मुख्य रूप से तमिल भाषा में रचित कविताओं का संकलन है, जो चोल, चेर और पांड्य राजवंशों के राजनीतिक इतिहास, व्यापार तथा समाज पर प्रकाश डालता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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