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BPSC TRE 4.0
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केंद्रीय बजट और आर्थिक समीक्षा (Economic Survey) के प्रावधानों एवं राजकोषीय संकेतकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वित्तीय वर्ष 2024-25 के केंद्रीय बजट में राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.9 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे सरकार मध्यम अवधि में 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
  2. 2. आर्थिक समीक्षा के अनुसार, सरकार के 'पूंजीगत व्यय' (Capital Expenditure - Capex) में लगातार वृद्धि की गई है, जिसका उद्देश्य देश में बुनियादी ढांचा विकास को गति देना और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
  3. 3. राजस्व घाटा (Revenue Deficit) उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ सरकार की कुल राजस्व प्राप्तियां उसके कुल राजस्व व्यय से अधिक होती हैं, और यह संकेतक सरकार की परिसंपत्ति सृजन क्षमता को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित करता है।
  4. 4. प्राथमिक घाटा (Primary Deficit), राजकोषीय घाटे में से पूर्व में लिए गए ऋणों पर देय 'शुद्ध ब्याज भुगतान' (Net Interest Payments) को घटाकर प्राप्त किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि ब्याज भुगतान को छोड़कर सरकार को अपने खर्चों के लिए कितने उधार की आवश्यकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 के केंद्रीय बजट में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.9% तक लक्षित किया गया है। पूंजीगत व्यय में वृद्धि से बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलता है, और प्राथमिक घाटा, राजकोषीय घाटे से ब्याज भुगतान घटाने पर प्राप्त होता है। हालांकि, कथन 3 असत्य है क्योंकि राजस्व घाटे की स्थिति तब होती है जब राजस्व व्यय राजस्व प्राप्तियों से 'अधिक' होता है, न कि प्राप्तियों का व्यय से अधिक होना। अधिक तैयारी के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर जा सकते हैं।
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