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पादप आकारिकी और पौधों में जनन (Plant Morphology and Reproduction) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मूसला जड़ (Taproot) तंत्र में प्राथमिक जड़ मूलांक (Radicle) के दीर्घीकरण से विकसित होती है, जो मुख्य रूप से द्विबीजपत्री पौधों (Dicots) की विशेषता है, जबकि अपस्थानिक जड़ें (Adventitious roots) मूलांक के अलावा पौधे के किसी अन्य भाग से उत्पन्न होती हैं।
  2. 2. पुष्प के विभिन्न चक्रों में 'पुंकेसर' (Stamen) नर जननांग तथा 'स्त्रीकेशर' (Pistil या Carpel) मादा जननांग का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें स्त्रीकेशर के तीन प्रमुख भाग होते हैं: वर्तिकाग्र (Stigma), वर्तिका (Style) और अंडाशय (Ovary)।
  3. 3. अनिषेक फलन (Parthenocarpy) वह प्रक्रिया है जिसमें निषेचन के बिना ही फल का विकास हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे फल सामान्यतः बीजहीन (Seedless) होते हैं, जैसे कि केला और अंगूर की कुछ किस्में।
  4. 4. पौधों में परागण (Pollination) के उपरांत परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होकर पराग नलिका बनाते हैं, और आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में 'द्वि-निषेचन' (Double Fertilization) की क्रिया होती है जिसमें एक नर युग्मक अंडे से तथा दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केंद्रक से संलयित होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पादप आकारिकी (Plant Morphology) और पौधों में जनन (Plant Reproduction) के दृष्टिकोण से पूर्णतः सत्य हैं। मूसला जड़ें मूलांक से बनती हैं (द्विबीजपत्री में), जबकि अपस्थानिक जड़ें अन्य भागों से निकलती हैं। पुष्प में पुंकेसर नर और स्त्रीकेशर मादा जननांग होता है। अनिषेक फलन (Parthenocarpy) के द्वारा बिना निषेचन के बीजहीन फलों का विकास होता है। आवृतबीजी पौधों की एक प्रमुख विशेषता 'द्वि-निषेचन' (Double Fertilization) है। अधिक अभ्यास और अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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