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BPSC TRE 4.0
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बिहार के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. विष्णुपद मंदिर - गया (फल्गु नदी के तट पर स्थित, जहां पिंडदान का विशेष महत्व है और इसका वर्तमान निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा करवाया गया था।)
- 2. महाबोधि मंदिर - बोधगया (यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल, जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था और मुख्य मंदिर के पास पवित्र बोधि वृक्ष स्थित है।)
- 3. शेरशाह सूरी का मकबरा - सासाराम (अष्टकोणीय मकबरा जो कृत्रिम झील के मध्य में स्थित है, और इसे इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना माना जाता है।)
- 4. राजगीर के गर्म जल कुंड - नालंदा (वैभव पर्वत की तलहटी में स्थित 'सप्तकर्णी गुफा' और ब्रह्म कुंड, जो हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध हैं।
) उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से युग्म पूरी तरह सुमेलित है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों के संदर्भ में दिए गए सभी चारों युग्म (विष्णुपद मंदिर, महाबोधि मंदिर, शेरशाह सूरी का मकबरा और राजगीर के गर्म जल कुंड) पूरी तरह सत्य और सुमेलित हैं। गया का विष्णुपद मंदिर फल्गु नदी के तट पर है जिसका जीर्णोद्धार अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था। बोधगया का महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र स्थल है। सासाराम में स्थित शेरशाह सूरी का मकबरा अपनी वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है, तथा राजगीर के गर्म जल कुंड धार्मिक एवं प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की संपूर्ण और सटीक तैयारी के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
Related Questions
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प्राचीन एवं मध्यकालीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, अभिलेखों तथा विदेशी यात्रियों के विवरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्य सम्राट अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम पढ़ने में वर्ष 1837 में जेम्स प्रिंसेप को सफलता मिली थी, जिसमें अधिकांश अभिलेखों में उनकी प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि का प्रयोग किया गया है, किंतु उत्तर-पश्चिम के अभिलेखों में खरोष्ठी, आर्मेनियाई और ग्रीक लिपियों का भी उपयोग मिलता है।
2. गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त के 'प्रयाग प्रशस्ति' (इलाहाबाद स्तंभ लेख) की रचना उसके दरबारी कवि हरिषेण ने संस्कृत भाषा और चम्पू (गद्य-पद्य मिश्रित) शैली में की थी, जिसमें हूणों और शकों के विरुद्ध समुद्रगुप्त की विजयों का विस्तृत एवं प्रामाणिक विवरण मिलता है।
3. हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आने वाले चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) ने अपनी यात्रा वृत्तांत 'सी-यू-की' (Si-Yu-Ki) में तत्कालीन भारतीय समाज, कानून व्यवस्था, शिक्षा के केंद्र (विशेषकर नालंदा विश्वविद्यालय) और बौद्ध धर्म की स्थिति का अत्यंत सजीव वर्णन किया है।
4. सल्तनत काल के प्रसिद्ध इतिहासकार मिनहाज-उस-सिराह द्वारा रचित ग्रंथ 'तकात-ए-नासिरी' में मुहम्मद गोरी की भारत विजय से लेकर सुल्तान नसरुद्दीन महमूद के शासनकाल तक का इतिहास प्रस्तुत किया गया है, और इस ग्रंथ का नाम सुल्तान नसिरुद्दीन महमूद के सम्मान में रखा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजकुमार शुक्ल के विशेष आग्रह पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, और इस सत्याग्रह के दौरान किसानों की समस्याओं की जाँच के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित 'चंपारण कृषि जाँच समिति' (Champaran Agrarian Enquiry Committee) के सदस्यों में महात्मा गांधी के साथ-साथ प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता मदन मोहन मालवीय और एम. के. गांधी स्वयं इसके सदस्य थे।
2. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के बाद महात्मा गांधी को 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया गया था, और रविन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें पहली बार इस उपाधि से भूषित किया था, जबकि इसी आंदोलन के दौरान बिहार के स्थानीय वकीलों जैसे ब्रजकिशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, और अनुग्रह नारायण सिंह ने गांधीजी के मुख्य सहयोगियों के रूप में कार्य किया था।
3. तिनकाठिया पद्धति के तहत चंपारण के किसानों को अपनी ज़मीन के कुल 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील (Indigo) की खेती करनी पड़ती थी, जिसके विरुद्ध यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों का आर्थिक व शारीरिक शोषण किया जा रहा था।
4. चंपारण सत्याग्रह के दौरान ही ब्रिटिश प्रशासन ने महात्मा गांधी को चंपारण छोड़ने का औपचारिक आदेश (Notice) दिया था, जिसका उल्लंघन करने पर गांधीजी पर मुकदमा चलाया गया, परंतु जनसमर्थन के भारी दबाव और किसानों की एकजुटता को देखते हुए भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड के आदेश पर यह मुकदमा वापस ले लिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, गांधी-इरविन समझौते और गोलमेज सम्मेलनों के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन की पृष्ठभूमि में गांधीजी की 11 सूत्री मांगों को वायसराय लॉर्ड इरविन द्वारा ठुकराए जाने के बाद, साबरमती आश्रम से दांडी तक की ऐतिहासिक पदयात्रा के साथ इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी।
2. 5 मार्च 1931 को हस्ताक्षरित 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी राजनीतिक कैदियों (हिंसा के आरोपी सहित) को तत्काल रिहा करने और पुलिस की ज्यादतियों की सार्वजनिक जांच कराने की शर्त को पूर्णतः स्वीकार कर लिया था।
3. कांग्रेस की ओर से केवल द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में महात्मा गांधी ने एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, लेकिन यह सम्मेलन सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के विवाद और दलितों के पृथक निर्वाचक मंडल के मुद्दे पर बिना किसी ठोस समझौते के असफल हो गया था।
4. वर्ष 1932 में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण बहिष्कार किया था, क्योंकि इस समय तक देश में सरकार द्वारा पुनः दमन चक्र शुरू कर दिया गया था और गांधीजी सहित अधिकांश प्रमुख कांग्रेसी नेता गिरफ्तार कर लिए गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के प्रमुख खनिज संसाधनों, ऊर्जा अवसंरचना और औद्योगिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार के रोहतास और कैमूर जिलों में विंध्यन क्रम की चट्टानों में उच्च कोटि के चूना पत्थर (Limestone) के विशाल भंडार पाए जाते हैं, जिनका उपयोग मुख्य रूप से बंजारी और डालमियानगर के सीमेंट उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
2. जमुई जिले के झाझा और मलयपुर क्षेत्र में देश के कुल स्वर्ण (Gold) भंडार का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा होने की पुष्टि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा की गई है, जो राज्य का प्रमुख खनिज भविष्य है।
3. औरंगाबाद जिले के नवीनगर में स्थित 'नवीनगर सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट' (BRBCL) एक कोयला आधारित विद्युत संयंत्र है, जिसे पूरी तरह से एनटीपीसी (NTPC) और रेलवे के संयुक्त उपक्रम के रूप में संचालित किया जा रहा है।
4. बरौनी (बेगूसराय) तेल शोधक कारखाने को वर्ष 1964 में तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) और रोमानिया के तकनीकी सहयोग से स्थापित किया गया था, जो उत्तर पूर्व भारत में कच्चे तेल के प्रसंस्करण का एक प्रमुख केंद्र है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के प्रमुख खनिज संसाधनों, उनके भौगोलिक वितरण और ऊर्जा अवसंरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार के विभाजन के पश्चात राज्य में खनिज संपदा का बड़ा हिस्सा झारखंड में चला गया है, तथापि वर्तमान में राज्य के रोहतास और कैमूर जिलों में विंध्यन क्रम की चट्टानों से बड़े पैमाने पर पाइराइट (Pyrite) और चूना पत्थर (Limestone) का खनन किया जाता है।
2. जमुई जिले में देश का सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) होने का अनुमान लगाया गया है, जहाँ भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार देश के कुल स्वर्ण रिजर्व का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा निहित है।
3. बिहार में ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों के विकास के तहत कहलगांव (भागलपुर), बरौनी (बेगूसराय) और बाढ़ (पटना) में थर्मल पावर प्लांट कार्यरत हैं, जिन्हें मुख्य रूप से झारखंड और ओडिशा की कोयला खदानों से कोयले की आपूर्ति की जाती है।
4. औरंगाबाद जिले के नवीनगर में स्थित 'एनबीपीजीसीएल' (NBPGCL) सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट एक संयुक्त उपक्रम है, और बिहार में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कटक और दरभंगा में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट स्थापित किए गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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