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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से पूर्व स्थापित विभिन्न राजनीतिक एवं पूर्ववर्ती संस्थाओं तथा उनके स्थापना वर्ष और संस्थापक/नेताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1838 में द्वारकानाथ टैगोर और प्रसन्न कुमार ठाकुर द्वारा स्थापित 'लैंडहोल्डर्स सोसाइटी' (Landholders Society) भारत की पहली राजनीतिक संस्था थी, जिसे मुख्य रूप से जमींदारों के हितों की रक्षा और उनके भू-राजस्व अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया था।
- 2. वर्ष 1866 में दादाभाई नौरोजी द्वारा लंदन में 'ईस्ट इंडिया एसोसिएशन' (East India Association) की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश जनमत को प्रभावित करना और भारत की वास्तविक समस्याओं से ब्रिटिश जनता को अवगत कराना था।
- 3. वर्ष 1867 में महादेव गोविंद रानाडे द्वारा स्थापित 'पूना सार्वजनिक सभा' (Poona Sarvajanik Sabha) ने सरकार और जनता के मध्य एक सेतु का कार्य किया तथा किसानों और आम जनता के कानूनी एवं सामाजिक अधिकारों के लिए आवाज उठाई।
- 4. वर्ष 1876 में सुरेंद्रनाथ बनर्जी और आनंद मोहन बोस द्वारा स्थापित 'इंडियन एसोसिएशन' (Indian Association) को कलकत्ता में स्थापित किया गया था, जिसका एक प्रमुख उद्देश्य सिविल सेवा परीक्षा में आयु सीमा घटाने के अंग्रेजों के निर्णय का कड़ा विरोध करना और एक अखिल भारतीय राजनीतिक मंच तैयार करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885) से पहले देश में कई राजनीतिक संस्थाओं की स्थापना हुई थी जिन्होंने राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1838 की 'लैंडहोल्डर्स सोसाइटी' देश की पहली संगठित राजनीतिक संस्था थी। दादाभाई नौरोजी द्वारा 1866 में लंदन में स्थापित 'ईस्ट इंडिया एसोसिएशन' ने ब्रिटिश हुकूमत के समक्ष भारतीय मुद्दों को रखा। एम.जी. रानाडे की 'पूना सार्वजनिक सभा' (1867) और सुरेंद्रनाथ बनर्जी तथा आनंद मोहन बोस द्वारा 1876 में स्थापित 'इंडियन एसोसिएशन' (जिसे इंडियन नेशनल एसोसिएशन भी कहा जाता है) ने आधुनिक राष्ट्रवाद की नींव रखी। अधिक अभ्यास और अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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मानव शरीर में संतुलित आहार के अंतर्गत विभिन्न पोषक पदार्थों (Nutrients) की भूमिका और उनके चयापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कार्बोहाइड्रेट और वसा दोनों ही शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले मुख्य पोषक तत्व हैं, किंतु 1 ग्राम वसा के पूर्ण ऑक्सीकरण से उत्पन्न ऊर्जा की मात्रा 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट से लगभग दोगुनी होती है।
2. प्रोटीन का मुख्य कार्य शरीर की वृद्धि, ऊतकों की मरम्मत और एंजाइमों का संश्लेषण करना है, और शरीर में ग्लूकोज की कमी होने पर अत्यधिक आवश्यकता पड़ने पर ही प्रोटीन ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग किए जाते हैं।
3. विटामिन 'ए' (रेटिनॉल) एक जल-विलेय विटामिन है, जिसका मुख्य कार्य आँखों की दृष्टि को सामान्य रखना और उपकला ऊतकों को स्वस्थ रखना है, तथा इसकी कमी से 'रॉफ्थैल्मिया' (Xerophthalmia) नामक रोग हो जाता है।
4. खनिज लवणों में आयरन (लौह तत्व) हीमोग्लोबिन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है, जिसकी कमी से रक्ताल्पता (Anemia) होती है, जबकि आयोडीन थायराइड ग्रंथि द्वारा थायराक्सिन हार्मोन के उत्पादन के लिए अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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विश्व के महाद्वीपों, देशों की सीमाओं और भू-आबद्ध (Landlocked) देशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में केवल दो ही देश ऐसे हैं जो भू-आबद्ध (Landlocked) हैं और जिनकी सीमाएं समुद्र से नहीं मिलती हैं, वे देश बोलीविया और पराग्वे हैं।
2. अफ्रीका महाद्वीप में विश्व के सबसे अधिक भू-आबद्ध देश स्थित हैं, और इनमें से युगांडा एक ऐसा देश है जिसकी सीमा विक्टोरिया झील से लगती है, जो अफ्रीका की सबसे बड़ी झील है।
3. एशिया महाद्वीप का कजाकिस्तान देश क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा पूर्णतः भू-आबद्ध (Landlocked) देश है, जिसकी सीमा उत्तर में रूस और दक्षिण में चीन जैसे देशों से लगती है।
4. यूरोप महाद्वीप में स्थित 'वेटिकन सिटी' क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों ही दृष्टियों से विश्व का सबसे छोटा स्वतंत्र देश है, जो चारों तरफ से केवल फ्रांस देश की सीमा से घिरा हुआ एक पूर्णतः भू-आबद्ध देश है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भौतिक राशियों और उनके एसआई (SI) मूल मात्रकों (Base Units) तथा पूरक मात्रकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंतरराष्ट्रीय पद्धति (SI) में कुल सात मूल भौतिक राशियाँ और उनके सात मूल मात्रक हैं, जबकि दो पूरक मात्रक (Supplementary Units) 'समतल कोण' (Plane Angle) के लिए रेडियन और 'घन कोण' (Solid Angle) के लिए स्टेरेडियन निर्धारित किए गए हैं।
2. ज्योति तीव्रता (Luminous Intensity) का एसआई मूल मात्रक 'कैंडेला' (Candela) है, जिसे 16वीं माप-तौल महासम्मेलन में परिभाषित किया गया था, और यह किसी निश्चित दिशा में प्रकाश स्रोत की उत्सर्जन क्षमता को मापता है।
3. 'मोल' (Mole) पदार्थ की मात्रा (Amount of Substance) का एसआई मूल मात्रक है, जिसके अंतर्गत यह परिभाषित किया गया है कि एक मोल में किसी पदार्थ के ठीक $6.022 \times 10^{23}$ मूल कण (परमाणु, अणु या आयन) होते हैं।
4. दाब (Pressure) और ऊर्जा (Energy) व्युत्पन्न राशियाँ (Derived Quantities) हैं, जिनके एसआई मात्रक क्रमशः पास्कल (Pascal) और जूल (Joule) हैं, तथा इन्हें मूल मात्रकों के पदों में व्यक्त करने पर दाब का मात्रक किग्रा/(मीटर·सेकंड²) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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मानव शरीर के परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) और रुधिर परिसंचरण की प्रक्रिया के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव हृदय एक पेशीय अंग है जो दोहरा परिसंचरण (Double Circulation) प्रदर्शित करता है, जिसमें ऑक्सीजनित (Oxygenated) और विऑक्सीजनित (Deoxygenated) रुधिर आपस में नहीं मिलते हैं क्योंकि हृदय चार कक्षों (दो आलिंद और दो निलय) में विभाजित होता है।
2. महाधमनी (Aorta) से निकलने वाला ऑक्सीजनित रक्त सबसे पहले दाहिने आलिंद (Right Atrium) में प्रवेश करता है, और वहाँ से त्रिवलनी कपाट (Tricuspid Valve) के माध्यम से दाहिने निलय में भेजा जाता है।
3. फुफ्फुस धमनी (Pulmonary Artery) एकमात्र ऐसी धमनी है जो हृदय के दाहिने निलय से विऑक्सीजनित रक्त को फेफड़ों तक ले जाती है, ताकि उसका शुद्धिकरण (Oxygenation) हो सके।
4. रुधिर दाब (Blood Pressure) को मापने के लिए स्फिग्मोमैनोमीटर (Sphygmomanometer) का उपयोग किया जाता है, जिसमें सामान्य स्वस्थ मनुष्य का प्रकुंचन दाब (Systolic Pressure) लगभग 120 mm Hg और अनुशिथिलन दाब (Diastolic Pressure) लगभग 80 mm Hg होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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चुम्बकीय क्षेत्रों और चुम्बकत्व के मूल सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी धारावाही परिणलिका (Solenoid) के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र एकसमान होता है और उसका मान परिनालिका की लंबाई पर निर्भर करता है, जबकि इसके सिरों पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान ठीक आधा हो जाता है।
2. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic substances) बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में हल्के रूप से चुम्बकीय हो जाते हैं और वे प्रबल चुम्बक से हल्के प्रतिकर्षित होते हैं, जैसे कि बिस्मथ, तांबा और जल।
3. क्यूरी ताप (Curie temperature) वह विशिष्ट तापमान है जिसके ऊपर जाने पर लौहचुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic substances) अपनी अनुचुम्बकीय (Paramagnetic) प्रवृत्ति खो देते हैं और पूर्ण रूप से प्रतिचुम्बकीय बन जाते हैं।
4. पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र भौगोलिक दक्षिण ध्रुव के पास एक चुम्बकीय उत्तर ध्रुव और भौगोलिक उत्तर ध्रुव के पास एक चुम्बकीय दक्षिण ध्रुव रखता है, तथा इसके क्षैतिज घटक का मान विषुवत रेखा पर अधिकतम और ध्रुवों पर शून्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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