BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

BPSC TRE 4.0
17 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा केंद्रीय मंत्रिपरिषद के संवैधानिक उपबंधों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का प्रयोग करते समय इस सलाह के अनुसार कार्य करेगा, किंतु राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद से ऐसी सलाह पर 'पुनर्विचार' करने के लिए कह सकता है, तथा पुनर्विचार के पश्चात जो सलाह दी जाती है, राष्ट्रपति उसके अनुसार कार्य करने के लिए पूर्णतः बाध्य होता है।
  2. 2. अनुच्छेद 75(3) के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि यदि लोकसभा में किसी एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, भले ही नीतिगत मतभेद केवल उस एक विभाग से संबंधित हों।
  3. 3. उपराष्ट्रपति, जो राज्य सभा का पदेन सभापति होता है, जब कभी संविधान के अनुच्छेद 65 के अधीन राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उसके कृत्यों का निर्वहन करता है, तब वह राज्य सभा के सभापति के रूप में किसी भी कर्तव्य का पालन नहीं करता है और उसे उस अवधि में राज्य सभा के सभापति के रूप में मिलने वाले वेतन या भत्ते प्राप्त नहीं होते हैं।
  4. 4. यदि उपराष्ट्रपति का निर्वाचन उच्चतम न्यायालय द्वारा शून्य (Void) घोषित कर दिया जाता है, तो उपराष्ट्रपति के रूप में उस विवादित अवधि के दौरान उसके द्वारा किए गए आधिकारिक और प्रशासनिक कार्य अवैध (Invalid) हो जाते हैं और उन्हें न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह जोड़ा गया कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है, लेकिन पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह के अनुसार कार्य करना उसके लिए अनिवार्य है। कथन 2 असत्य है क्योंकि सामूहिक उत्तरदायित्व का अर्थ है कि पूरी मंत्रिपरिषद संसद के प्रति एक इकाई के रूप में उत्तरदायी है और लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव केवल संपूर्ण मंत्रिपरिषद के विरुद्ध लाया जाता है, किसी एक व्यक्तिगत मंत्री के विरुद्ध नहीं। कथन 3 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 97 के अनुसार जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है, तो उसे राष्ट्रपति के वेतन और भत्ते मिलते हैं, न कि राज्य सभा के सभापति के। कथन 4 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 71(2) के अनुसार उपराष्ट्रपति द्वारा अपने पद की शक्तियों के प्रयोग या कर्तव्यों के पालन में किए गए कार्य उच्चतम न्यायालय द्वारा उसका निर्वाचन शून्य घोषित किए जाने के बाद भी अवैध नहीं माने जाते हैं (वे वैध बने रहते हैं)। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के पोर्टल पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

→ भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिसमें से 292 सदस्य ब्रिटिश भारत के प्रांतों से, 4 सदस्य चीफ कमिश्नर क्षेत्रों से और 93 सदस्य देशी रियासतों से आने थे, तथा रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के शासकों द्वारा मनोनीत किया जाना था जिसके कारण वे अप्रत्यक्ष रूप से चुनी गईं। 2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी, जिसका मुस्लिम लीग ने बहिष्कार किया था, और इस बैठक में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थायी अध्यक्ष (संवैधानिक परंपरा के अनुसार फ्रांसिसी पद्धति पर सबसे वरिष्ठ होने के कारण) चुना गया था। 3. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) को संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया, जो आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना का आधार बना। 4. संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा ने कुल 22 मुख्य समितियों का गठन किया था, जिनमें डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में गठित 'प्रारूप समिति' (Drafting Committee) सबसे महत्वपूर्ण थी, और इस पूरी निर्माण प्रक्रिया में कुल 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → बिहार के स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, वर्ष 1928 में पटना में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' (Bihar Provincial Kisan Sabha) की औपचारिक स्थापना की गई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष निम्नलिखित में से कौन बनाए गए थे? → किस ग्रह को 'पृथ्वी की जुड़वां बहन' (Twin Planet) कहा जाता है? → भारतीय संविधान के आपात उपबंधों (भाग XVIII) और संविधान संशोधन प्रक्रिया (भाग XX, अनुच्छेद 368) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, जबकि अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को किसी भी स्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है, और 44वें संविधान संशोधन (1978) के बाद 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को जोड़ा गया। 2. राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) की घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी जारी होने की तिथि से दो माह के भीतर साधारण बहुमत (Simple Majority) से अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, तथा इसे अधिकतम 3 वर्षों तक ही बढ़ाया जा सकता है। 3. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन में (लोकसभा या राज्यसभा) पेश किया जा सकता है, और इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है, साथ ही यह विधेयक दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत (प्रत्येक सदन के कुल सदस्यों का बहुमत तथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत) से पारित होना अनिवार्य है। 4. संविधान संशोधन प्रक्रिया के तहत यदि कोई संशोधन देश के संघीय ढांचे (Federal Structure) को प्रभावित करता है, तो उसके लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ देश के आधे से अधिक राज्यों के विधानमंडलों द्वारा साधारण बहुमत से अनुसमर्थन (Ratification) प्राप्त करना भी आवश्यक होता है, और इस प्रक्रिया में राज्यों के पास संविधान संशोधन विधेयक प्रस्तुत करने की पहल करने की शक्ति होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → हृदय का मुख्य कार्य क्या है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.