BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

BPSC TRE 4.0
19 views

कार्बनिक रसायन और हाइड्रोकार्बन के समवयवी (Isomers) गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. श्रृंखला समवयवता (Chain Isomerism) उन कार्बन यौगिकों द्वारा प्रदर्शित की जाती है जिनका आणविक सूत्र समान होता है परंतु कार्बन श्रृंखला की मुख्य शाखा या कंकाल (Carbon skeleton) में भिन्नता होती है, जैसा कि ब्यूटेन ($C_4H_{10}$) के मामले में सामान्य-ब्यूटेन और आइसो-ब्यूटेन में देखा जाता है।
  2. 2. स्थिति समवयवता (Position Isomerism) में क्रियात्मक समूह (Functional group) या प्रतिस्थापी परमाणु की कार्बन श्रृंखला पर स्थिति बदल जाती है, जैसे प्रोपेन-1-ऑल और प्रोपेन-2-ऑल इसके उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
  3. 3. ज्यामितीय समवयवता (Geometrical Isomerism) एल्कीन यौगिकों में कार्बन-कार्बन द्विबंध ($C=C$) के परितः मुक्त घूर्णन (Free rotation) के प्रतिबंध के कारण उत्पन्न होती है, जिसमें 'सिन्न' (Cis) और 'ट्रांस' (Trans) समावयवी बनते हैं।
  4. 4. क्रियात्मक समूह समवयवता (Functional Group Isomerism) दर्शाने वाले यौगिकों का आणविक सूत्र समान होता है किंतु उनके क्रियात्मक समूह पूर्णतः भिन्न होते हैं, जैसे डाइमेथिल ईथर ($CH_3OCH_3$) और एथिल अल्कोहल ($C_2H_5OH$) आपस में क्रियात्मक समूह समावयवी हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन कार्बनिक रसायन में समवयवता (Isomerism) के सिद्धांतों के अनुसार पूर्णतः सत्य हैं। श्रृंखला समवयवता में कार्बन कंकाल भिन्न होता है (जैसे सामान्य और आइसो-ब्यूटेन); स्थिति समवयवता में क्रियात्मक समूह या प्रतिस्थापी की स्थिति बदलती है (जैसे प्रोपेन-1-ऑल और प्रोपेन-2-ऑल); एल्कीन में द्विबंध के प्रतिबंधित घूर्णन के कारण ज्यामितीय (Cis-Trans) समवयवता उत्पन्न होती है; और समान आणविक सूत्र वाले डाइमेथिल ईथर (ईथर समूह) तथा एथिल अल्कोहल (एल्कोहल समूह) क्रियात्मक समूह समवयवता का सटीक उदाहरण हैं। ऐसी ही उत्कृष्ट अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

→ भारत की नदियों के अपवाह तंत्र, प्रमुख घाटियों, प्रपात एवं झीलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत की 'पेन्नार' और 'वैगई' नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले क्रमशः अरावली और विंध्य पर्वतमाला से जल प्राप्त करती हैं, तथा इनकी द्रोणियाँ पश्चिमी घाट के पूर्वी ढलानों तक विस्तृत हैं। 2. उत्तराखंड में स्थित 'रूपकुंड झील' (Roopkund Lake) एक उच्च तुंगता वाली हिमनदीय झील है, जिसे रहस्यमयी झील (Skeleton Lake) भी कहा जाता है, क्योंकि इसके तल में बड़ी संख्या में मानव कंकाल पाए गए हैं। 3. मेघालय के पठार पर स्थित 'चेरापूंजी' और 'मौसिनराम' के समीप की नदियाँ तीव्र कटाव के कारण खड़ी दीवारों वाली गहरी घाटियों का निर्माण करती हैं, और यहाँ बहने वाली 'उमंगोट' नदी अपने असाधारण रूप से स्वच्छ और पारदर्शी जल के लिए जानी जाती है। 4. जम्मू और कश्मीर में स्थित 'वुलर झील' टेक्टोनिक (विवर्तनिक) गतिविधियों के परिणामस्वरूप बनी भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है, जिसमें झेलम नदी अपना जल विसर्जित करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → पटना जिले के भीतर गंगा नदी की सटीक लंबाई कितनी है? → मानव शरीर के विभिन्न तंत्रों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मानव पाचन तंत्र में आमाशय (Stomach) से निकलने वाला 'पेप्सिनोजेन' निष्क्रिय एंजाइम हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के संपर्क में आकर सक्रिय 'पेप्सिन' में बदल जाता है, जो प्रोटीन को पेप्टोन और प्रोटियोज़ में विखंडित करता है। 2. मानव परिसंचरण तंत्र में 'पेसमेकर' (Sinoatrial Node - SA Node) दाएँ आलिंद की दीवार पर स्थित होता है, जो स्वतः उत्तेजना उत्पन्न करके हृदय की धड़कन की शुरुआत करता है, जिसे हृदय का 'पेसमेकर' कहा जाता है। 3. मानव तंत्रिका तंत्र में प्रतिवर्ती क्रियाओं (Reflex Actions) का नियंत्रण मुख्य रूप से मस्तिष्क के 'प्रमस्तिष्क' (Cerebrum) द्वारा किया जाता है, जो बिना सोचे-समझे तीव्र अनुक्रिया उत्पन्न करता है। 4. मानव उत्सर्जन तंत्र में वृक्क (Kidney) की कार्यात्मक इकाई 'नेफ्रॉन' (Nephron) होती है, जिसके 'हेनले का लूप' (Loop of Henle) का मुख्य कार्य मूत्र का सांद्रण करना और जल एवं खनिजों का पुनравशोषण करना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → वायुमंडल में वायुदाब पेटियों के खिसकाव (Shift), आर्द्रता के वितरण और पवन संचार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन होने के साथ-साथ सभी वायुदाब पेटियाँ और पवन प्रणालियाँ उत्तर और दक्षिण की ओर खिसकती हैं, जिसके कारण भूमध्यरेखीय शांत पेटी (डोलड्रम) ग्रीष्मकाल में उत्तर की ओर खिसक जाती है और भारतीय उपमहाद्वीप में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन में सहायक होती है। 2. 'पछुआ पवनें' (Westerlies) दोनों गोलार्द्धों में उपोष्ण उच्च दाब पेटियों से उप-ध्रुवीय निम्न दाब पेटियों की ओर प्रवाहित होती हैं, और पृथ्वी के घूर्णन जनित कोरियोलिस बल के प्रभाव से उत्तरी गोलार्द्ध में इनकी सामान्य दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व होती है। 3. निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity) वायु के प्रति इकाई आयतन में उपस्थित जलवाष्प का कुल भार होती है, जो तापमान में परिवर्तन के साथ बदलती रहती है, जबकि विशिष्ट आर्द्रता (Specific Humidity) वायु के प्रति इकाई द्रव्यमान में जलवाष्प के भार को दर्शाती है और यह तापमान तथा दाब में होने वाले परिवर्तनों से पूर्णतः स्वतंत्र होती है। 4. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) की उत्पत्ति के लिए समुद्री सतह का तापमान न्यूनतम 20°C होना आवश्यक है, और इनकी ऊर्जा का मुख्य स्रोत संघनन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Condensation) होती है, जिसके कारण तट से टकराने के बाद इनकी तीव्रता में वृद्धि होती जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → मानव शरीर के विभिन्न आंतरिक तंत्रों, उनकी संरचनात्मक इकाइयों तथा शारीरिक क्रिया-विज्ञान (Physiology) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मानव पाचन तंत्र में यकृत (Liver) शरीर की सबसे बड़ी बहिःस्रावी (Exocrine) ग्रंथि है, जो पित्त रस (Bile Juice) का स्राव करती है जिसमें कोई पाचक एंजाइम नहीं होता है, परंतु यह वसा के इमल्सीकरण (Emulsification) में सहायता करता है। 2. तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की मूल संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई न्यूरॉन (Neuron) होती है, जिसमें सूचनाओं का संचरण विद्युत-रासायनिक आवेगों (Electrical Impulses) के रूप में केवल एक्सॉन (Axon) से डेंड्राइट (Dendrite) की एकदिशीय दिशा में होता है। 3. मानव श्वसन तंत्र में गैसों का विनिमय मुख्य रूप से फेफड़ों के भीतर सूक्ष्म वायुपोषिकाओं (Alveoli) की पतली झिल्ली के माध्यम से विसरण (Diffusion) प्रक्रिया द्वारा होता है, और हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के साथ reversibly बंधकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन का निर्माण करता है। 4. उत्सर्जन तंत्र (Excretory System) के अंतर्गत प्रत्येक वृक्क (Kidney) के भीतर लाखों कार्यात्मक इकाइयाँ पाई जाती हैं जिन्हें नेफ्रॉन (Nephron) कहा जाता है, जिनका मुख्य कार्य रक्त का निस्पंदन (Filtration) कर मूत्र के माध्यम से यूरिया और अन्य वर्ज्य पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.