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BPSC TRE 4.0
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बिहार आर्थिक सर्वेक्षण और केंद्रीय बजट के नवीनतम समष्टि आर्थिक संकेतकों (Macroeconomic Indicators) तथा राजकोषीय प्रबंधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वित्तीय वर्ष के दौरान बिहार का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) अनुमानित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 2.81% दर्ज किया गया है, जो केंद्रीय एवं राज्य FRBM अधिनियम द्वारा निर्धारित 3% की सीमा के भीतर है।
- 2. राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में विभिन्न क्षेत्रों के योगदान के संदर्भ में, प्राथमिक क्षेत्र (कृषि एवं संवर्गीय) का योगदान लगभग 20.5% है, द्वितीयक क्षेत्र का योगदान लगभग 18.1% है, तथा सर्वाधिक योगदान तृतीयक (सेवा) क्षेत्र का लगभग 61.4% है।
- 3. केंद्रीय बजट में राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) के मार्ग का अनुसरण करते हुए केंद्र सरकार ने राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.5% से नीचे लाने का लक्ष्य वर्ष 2025-26 तक निर्धारित किया है।
- 4. बिहार सरकार द्वारा अपने कुल बजट व्यय का एक बहुत बड़ा हिस्सा सामाजिक सेवाओं (शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण) पर आवंटित किया जाता है, जो कुल व्यय का लगभग 40% से अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। बिहार आर्थिक सर्वेक्षण और केंद्रीय बजट के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, राज्य का राजकोषीय घाटा FRBM अधिनियम की निर्धारित सीमा (3%) के भीतर लगभग 2.81% दर्ज किया गया है। GSDP में तृतीयक क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक (लगभग 61.4%), प्राथमिक क्षेत्र का लगभग 20.5% और द्वितीयक क्षेत्र का लगभग 18.1% है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 तक राजकोषीय घाटे को 4.5% तक लाने का लक्ष्य रखा है, और बिहार अपने कुल बजट व्यय का 40% से अधिक हिस्सा सामाजिक सेवाओं पर खर्च करता है। ऐसी ही अन्य महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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बिहार सरकार द्वारा संचालित शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याणकारी योजनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' के तहत जन्म से लेकर स्नातक की डिग्री पूरी करने तक बालिकाओं को विभिन्न चरणों में कुल 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसका उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या रोकना तथा उच्च शिक्षा के प्रति जागरूक करना है।
2. 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' के अंतर्गत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण 4% साधारण ब्याज पर दिया जाता है, जबकि महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडरों के लिए यह ब्याज दर मात्र 1% है।
3. 'सतत जीविकोपार्जन योजना' का मुख्य उद्देश्य अत्यंत गरीब परिवारों को आजीविका के नए साधन उपलब्ध कराना है, जिसका संचालन 'जीविका' (बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति) द्वारा किया जाता है।
4. 'मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना' के तहत राज्य के 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को बिना किसी अपवाद या आय सीमा के प्रति माह 1500 रुपये की पेंशन दी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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औरंगजेब की मृत्यु के बाद हिंदुओं पर से जजिया कर किसने हटा दिया?
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भारतीय संविधान के विभिन्न स्रोतों, महत्वपूर्ण अनुच्छेदों, अनुसूचियों तथा नगरीय स्थानीय शासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान में 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) और 'व्यापार, वाणिज्य एवं समागम की स्वतंत्रता' के प्रावधान ऑस्ट्रेलिया के संविधान से लिए गए हैं, जबकि आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों के स्थगन का प्रावधान जर्मनी के वीमर संविधान से लिया गया है।
2. संविधान की 11वीं और 12वीं अनुसूची को क्रमशः 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से जोड़ा गया था, जहाँ 11वीं अनुसूची में पंचायतों के लिए 29 कार्यात्मक विषयों का उल्लेख है, वहीं 12वीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के लिए 18 कार्यात्मक विषयों का प्रावधान किया गया है।
3. अनुच्छेद 243-ZJ के अंतर्गत सहकारिता समितियों के निदेशकों के बोर्ड में अधिकतम सदस्यों की संख्या 21 निर्धारित की गई है, तथा इसमें अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिए एक सीट और महिलाओं के लिए दो सीटें आरक्षित करना अनिवार्य किया गया है।
4. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-Q के अनुसार प्रत्येक राज्य में नगर पंचायत (ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में परिवर्तित हो रहे क्षेत्रों के लिए), नगर परिषद (छोटे नगरीय क्षेत्रों के लिए) और नगर निगम (बड़े नगरीय क्षेत्रों के लिए) का गठन किया जाना अनिवार्य है, बशर्ते राज्यपाल द्वारा किसी औद्योगिक नगरी को इसके दायरे से मुक्त न किया गया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 123) और राज्यपाल की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 213) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति और प्रभाव वही होता है जो संसद द्वारा पारित किसी अधिनियम या राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, किंतु ऐसा प्रत्येक अध्यादेश संसद या राज्य विधानमंडल के पुनर्समेकन (Re-assembly) के ठीक छह सप्ताह बाद स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, यदि उससे पहले ही दोनों सदनों द्वारा उसका अनुमोदन न कर दिया जाए।
2. राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद की विधायी शक्ति के सह-विस्तारित (Co-extensive) है, अर्थात् राष्ट्रपति उस विषय पर भी अध्यादेश प्रख्यापित कर सकता है जिस पर संसद कानून बना सकती है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी परिस्थिति में अपनी इस शक्ति का प्रयोग अपने मंत्रिमंडल की लिखित सलाह के बिना कर सकता है।
3. राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने के लिए कुछ विशेष मामलों में राष्ट्रपति के पूर्व-निर्देश (Prior Instructions) की आवश्यकता होती है, जैसे यदि राज्य विधानमंडल का ऐसा विधेयक जिसके लिए राष्ट्रपति की संस्तुति आवश्यक होती, उसे कानून बनाने के लिए प्रस्तुत किया जाता, तो राज्यपाल बिना राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के उस विषय पर अध्यादेश जारी नहीं कर सकता है।
4. अध्यादेश निर्माण की शक्ति कोई 'विवेकशील शक्ति' (Discretionary Power) नहीं है, बल्कि यह कार्यपालिका के प्रमुख के रूप में मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से प्रयोग की जाने वाली शक्ति है, और न्यायालय द्वारा इस बात की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है कि क्या अध्यादेश प्रख्यापित करते समय राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा mala fide (दुराशय) या असंवैधानिक तरीकों का उपयोग किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार का क्षेत्रफल कितना है?
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