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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 123) और राज्यपाल की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 213) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति और प्रभाव वही होता है जो संसद द्वारा पारित किसी अधिनियम या राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, किंतु ऐसा प्रत्येक अध्यादेश संसद या राज्य विधानमंडल के पुनर्समेकन (Re-assembly) के ठीक छह सप्ताह बाद स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, यदि उससे पहले ही दोनों सदनों द्वारा उसका अनुमोदन न कर दिया जाए।
  2. 2. राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद की विधायी शक्ति के सह-विस्तारित (Co-extensive) है, अर्थात् राष्ट्रपति उस विषय पर भी अध्यादेश प्रख्यापित कर सकता है जिस पर संसद कानून बना सकती है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी परिस्थिति में अपनी इस शक्ति का प्रयोग अपने मंत्रिमंडल की लिखित सलाह के बिना कर सकता है।
  3. 3. राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने के लिए कुछ विशेष मामलों में राष्ट्रपति के पूर्व-निर्देश (Prior Instructions) की आवश्यकता होती है, जैसे यदि राज्य विधानमंडल का ऐसा विधेयक जिसके लिए राष्ट्रपति की संस्तुति आवश्यक होती, उसे कानून बनाने के लिए प्रस्तुत किया जाता, तो राज्यपाल बिना राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के उस विषय पर अध्यादेश जारी नहीं कर सकता है।
  4. 4. अध्यादेश निर्माण की शक्ति कोई 'विवेकशील शक्ति' (Discretionary Power) नहीं है, बल्कि यह कार्यपालिका के प्रमुख के रूप में मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से प्रयोग की जाने वाली शक्ति है, और न्यायालय द्वारा इस बात की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है कि क्या अध्यादेश प्रख्यापित करते समय राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा mala fide (दुराशय) या असंवैधानिक तरीकों का उपयोग किया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि अध्यादेश की शक्ति संसद/विधानमंडल के अधिनियम जैसी ही होती है और सत्र शुरू होने के छह सप्ताह बाद यह समाप्त हो जाता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 74 और अनुच्छेद 123 के अनुसार, राष्ट्रपति अपनी किसी भी शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सहायता और 'लिखित सलाह' के बिना नहीं कर सकता; यहाँ 'बिना कर सकता है' दिया गया है जो गलत है। कथन 3 सत्य है, अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल कुछ विशेष मामलों में राष्ट्रपति के पूर्व-निर्देश के बिना अध्यादेश जारी नहीं कर सकता। कथन 4 सत्य है, अध्यादेश जारी करना मंत्रिपरिषद की सलाह पर आधारित होता है और एस.आर. बोम्बाई मामले तथा अन्य निर्णयों के तहत इसकी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। इस तरह के महत्वपूर्ण राजनीतिक और संवैधानिक प्रश्नों के गहन अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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