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BPSC TRE 4.0
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न कालों, राजवंशों तथा सांस्कृतिक एवं आर्थिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मौर्य साम्राज्य के प्रशासनिक तंत्र में 'अध्यक्ष' विभिन्न विभागों के अधीक्षक (Superintendents) होते थे, जिनका मुख्य कार्य कृषि, व्यापार, नौकायन और खनन जैसी आर्थिक गतिविधियों का नियंत्रण और नियमन करना था, जैसा कि कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में वर्णित है।
- 2. गुप्त काल के दौरान भूमि अनुदान (Land Grants) की प्रथा में व्यापक वृद्धि हुई, जिसमें 'अग्रहार' अनुदान मुख्य रूप से ब्राह्मणों और धार्मिक संस्थानों को दिए जाने वाले कर-मुक्त भूमि अनुदान थे, जबकि 'निबी-धर्म' का अर्थ ऐसी भूमि से था जिसे प्राप्तकर्ता केवल भोग सकता था, उसे बेचने या किसी अन्य को हस्तांतरित करने का कोई अधिकार नहीं था।
- 3. सातवाहन वंश के शासकों ने शीशे (Lead), तांबे और प्रोटीन के सिक्कों का बड़े पैमाने पर प्रचलन किया था, तथा उन्होंने ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि देने की परंपरा की शुरुआत की थी, जिसका विस्तृत उल्लेख नानाघाट और नासिक के अभिलेखों में मिलता है।
- 4. संगम काल के दौरान दक्षिण भारत में रोम और पश्चिमी देशों के साथ अत्यधिक समृद्ध विदेशी व्यापार होता था, जिसका मुख्य केंद्र केरल तट पर स्थित 'मुजिरीस' (Muziris) था, और इस व्यापार की पुष्टि प्लिनी के प्राकृतिक इतिहास (Naturalis Historia) तथा पुरातात्विक उत्खनन में मिले रोमन मृद्भांडों (Amphorae) से होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के सभी कथन आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से सत्य नहीं हैं, आइए विश्लेषण करें:
कथन 1: सत्य है। मौर्य प्रशासन में कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार विभिन्न आर्थिक विभागों के नियंत्रण के लिए 'अध्यक्षों' की नियुक्ति की जाती थी, जैसे कि सीताध्यक्ष (कृषि), पण्याध्यक्ष (व्यापार), और सुनाध्यक्ष (बूचड़खाना)।
कथन 2: असत्य है। 'निबी-धर्म' (Nibi-dharma) का अर्थ ऐसी स्थायी बंदोबस्त वाली भूमि से था जिस पर प्राप्तकर्ता का स्वामित्व सुरक्षित होता था और वह उसे वंशानुगत रूप से रख सकता था, जबकि 'अग्रहार' कर-मुक्त भूमियाँ थीं। गुप्त काल में भूमि अधिकारों और बिक्री के नियमों में जटिलता आई थी।
कथन 3: सत्य है। सातवाहन राजाओं ने मुख्य रूप से सीसे (Lead) और पोटिन (Potin) के सिक्के चलाए तथा ब्राह्मणों एवं बौद्ध संघ को कर-मुक्त भूमि देने की प्रथा को संस्थागत रूप दिया।
कथन 4: सत्य है। संगम युग (विशेषकर चेर, चोल और पाण्ड्य काल) में मुजिरीस बंदरगाह रोमन व्यापार का प्रमुख केंद्र था। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
कथन 1: सत्य है। मौर्य प्रशासन में कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार विभिन्न आर्थिक विभागों के नियंत्रण के लिए 'अध्यक्षों' की नियुक्ति की जाती थी, जैसे कि सीताध्यक्ष (कृषि), पण्याध्यक्ष (व्यापार), और सुनाध्यक्ष (बूचड़खाना)।
कथन 2: असत्य है। 'निबी-धर्म' (Nibi-dharma) का अर्थ ऐसी स्थायी बंदोबस्त वाली भूमि से था जिस पर प्राप्तकर्ता का स्वामित्व सुरक्षित होता था और वह उसे वंशानुगत रूप से रख सकता था, जबकि 'अग्रहार' कर-मुक्त भूमियाँ थीं। गुप्त काल में भूमि अधिकारों और बिक्री के नियमों में जटिलता आई थी।
कथन 3: सत्य है। सातवाहन राजाओं ने मुख्य रूप से सीसे (Lead) और पोटिन (Potin) के सिक्के चलाए तथा ब्राह्मणों एवं बौद्ध संघ को कर-मुक्त भूमि देने की प्रथा को संस्थागत रूप दिया।
कथन 4: सत्य है। संगम युग (विशेषकर चेर, चोल और पाण्ड्य काल) में मुजिरीस बंदरगाह रोमन व्यापार का प्रमुख केंद्र था। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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कौन सा वेदांग छंदों के बारे में बताता है?
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आधुनिक भारत के इतिहास के संदर्भ में, वर्ष 1928 में गठित 'नेहरू रिपोर्ट' (Nehru Report) और उससे संबंधित राजनीतिक घटनाक्रम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. साइमन कमीशन की इस चुनौती के उत्तर में कि भारतीय स्वयं एक सर्वसम्मत संविधान का मसौदा तैयार नहीं कर सकते, फरवरी 1928 में ऑल पार्टीज कॉन्फ्रेंस द्वारा मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया, जिसने अपनी रिपोर्ट में भारत के लिए 'डोमिनियन स्टेटस' (औपनिवेशिक स्वराज्य) की मांग की थी।
2. नेहरू रिपोर्ट में पहली बार देश के अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था, साथ ही केंद्र में द्वि-सदनीय विधायिका तथा उत्तरदायी शासन की स्थापना की संस्तुति की गई थी।
3. रिपोर्ट में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर मुस्लिम बहुसंख्यक प्रांतों में पृथक निर्वाचक मंडलों की व्यवस्था को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया गया था, जिससे जिन्ना और अन्य मुस्लिम नेताओं ने इसका पूर्ण समर्थन किया।
4. इस रिपोर्ट के प्रावधानों से असंतुष्ट होकर युवा राष्ट्रवादियों (जैसे जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस) ने 'इंडेपिंडेंट फॉर इंडिया लीग' (Independence for India League) की स्थापना की, क्योंकि वे डोमिनियन स्टेटस के बजाय 'पूर्ण स्वराज' से कम कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत में किस राज्य का सर्वाधिक क्षेत्र घने पतझड़ वाले जंगल से घिरा है?
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मानव शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों (Nutrients) और उनके रासायनिक स्वरूप या कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) के अंतर्गत विटामिन और खनिज लवण आते हैं, जो शरीर को सीधे ऊर्जा प्रदान नहीं करते, बल्कि चयापचय (Metabolism) और विभिन्न जैविक क्रियाओं के नियमन के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं।
2. वसा-घुलनशील विटामिनों (Fat-soluble vitamins) में विटामिन ए, डी, ई और के शामिल हैं, जिनका संचय मुख्य रूप से यकृत (Liver) और वसीय ऊतकों में होता है, तथा इनकी अत्यधिक मात्रा शरीर के लिए विषैली (Toxic) हो सकती है।
3. प्रोटीन अमीनो एसिड की लंबी श्रृंखलाओं से बने बहुलक (Polymers) हैं, जिनमें से 'आवश्यक अमीनो एसिड' (Essential amino acids) वे होते हैं जिनका संश्लेषण मानव शरीर के भीतर स्वतः हो जाता है और इन्हें बाहर से आहार के माध्यम से लेने की आवश्यकता नहीं होती।
4. कार्बोहाइड्रेट शरीर का मुख्य ऊर्जा स्रोत हैं, जिनमें जटिल कार्बोहाइड्रेट (जैसे सेलूलोज़) पाचक एंजाइमों द्वारा मनुष्यों में आसानी से पच जाते हैं और तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्रकाश के परावर्तन, अपवर्तन और तरंग प्रकाशिकी (Wave Optics) की परिघटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) होता है, जिसके कारण रेगिस्तान में मृग मरीचिका (Mirage) जैसी प्रकाशीय भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।
2. यंग के द्वि-झिरी प्रयोग (Young's Double Slit Experiment) में यदि monochromatic light (एकवर्ण प्रकाश) के स्रोत को श्वेत प्रकाश (White Light) के स्रोत से प्रतिस्थापित कर दिया जाए, तो पर्दे पर प्राप्त होने वाली व्यतिकरण फ्रिंजें पूरी तरह गायब हो जाती हैं और कोई भी दीप्त या अदीप्त बैंड दिखाई नहीं देता है।
3. हाइगेंस के तरंग सिद्धांत (Huygens' Principle) के अनुसार, तरंगायु (Wavefront) का प्रत्येक बिंदु एक नए गौण तरंगिका (Secondary Wavelet) का स्रोत बन जाता है, जिससे आगे की दिशा में नई तरंगायु का निर्माण होता है, और यह सिद्धांत प्रकाश के परावर्तन एवं अपवर्तन के नियमों की सफलतापूर्वक व्याख्या करता है।
4. ध्रुवीकरण (Polarization) केवल अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal Waves) का गुण है और यह अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse Waves) में संभव नहीं होता है, क्योंकि प्रकाश तरंगें विद्युत चुंबकीय प्रकृति की होने के बावजूद ध्रुवीकृत नहीं की जा सकतीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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