त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
1 views
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) के दिशा-निर्देशों तथा प्राकृतिक आपदाओं (विशेषकर बाढ़, भूकंप और सूखा) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत किया गया था, जिसके पदेन अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, तथा यह देश में आपदा प्रबंधन के लिए नीतियां और दिशानिर्देश निर्धारित करने वाली सर्वोच्च संस्था है।
- 2. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) के वर्तमान अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री होते हैं, और बिहार भूकंपीय क्षेत्र मानचित्र के अनुसार जोन IV और जोन V के अंतर्गत आता है, जो इसे अत्यधिक भूकंपीय संवेदनशीलता वाला राज्य बनाता है।
- 3. कोसी नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, जो नेपाल से निकलकर गंगा में मिलती है, और इसके प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना के तहत विशेष रूप से 'कोसी बाढ़ नियंत्रण एवं राहत मिशन' की स्थापना केंद्रीय स्तर पर की गई है।
- 4. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 12 के अनुसार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को आपदा से प्रभावित लोगों को राहत पहुँचाने के लिए न्यूनतम मानक (Minimum Standards of Relief) निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है, जिसमें आश्रय, भोजन, पेयजल और चिकित्सा देखभाल शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत किया गया है और प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं तथा बिहार का अधिकांश हिस्सा सिस्मिक जोन IV और V में आने के कारण अत्यधिक संवेदनशील है। अधिनियम की धारा 12 के तहत राहत के न्यूनतम मानक तय करने का प्रावधान है। कथन 3 असत्य है क्योंकि कोसी बाढ़ नियंत्रण के लिए कोई अलग से केंद्रीय 'कोसी मिशन' राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना के अंतर्गत स्वतंत्र रूप से इस नाम से स्थापित नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक जल संसाधन प्रबंधन और द्विपक्षीय भारत-नेपाल संधियों के अधीन कार्य करता है। ऐसी उच्च-स्तरीय परीक्षाओं के लिए संपूर्ण तैयारी हेतु बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
आरा में विद्रोही सैनिकों का नेतृत्व करने वाले कुंवर सिंह के विरुद्ध कौन सा अंग्रेज अधिकारी तैनात था?
→
बिहार के किसान आंदोलनों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामी सहजानंद सरस्वती ने वर्ष 1929 में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य जमींदारी प्रथा का उन्मूलन और किसानों को आर्थिक शोषण से मुक्ति दिलाना था।
2. मुंगेर जिले में कार्यानंद शर्मा के नेतृत्व में 'बकाश्त भूमि' (ऐसी भूमि जिसे जमींदारों ने किसानों की बेदखली के बाद अपने प्रत्यक्ष नियंत्रण में ले लिया था) की वापसी के लिए एक सशक्त आंदोलन चलाया गया था।
3. गया जिले के उलाह और पंडौल क्षेत्र में किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष का नेतृत्व यदुंदन शर्मा द्वारा किया गया था।
4. वर्ष 1936 में लखनऊ में आयोजित 'अखिल भारतीय किसान सभा' के प्रथम अधिवेशन के दौरान स्वामी सहजानंद सरस्वती को इसका महासचिव चुना गया था, जबकि एन. जी. रंगा इसके अध्यक्ष बने थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हजारीबाग में 30 जुलाई 1857 को रामगढ़ बटालियन के सैनिकों द्वारा विद्रोह किया गया था, जिसका नेतृत्व सूबेदार माधव सिंह ने किया था और उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का संचालन किया था।
2. पटना में 23 जुलाई 1857 को पीर अली खाँ नामक एक पुस्तक विक्रेता के नेतृत्व में हुए विद्रोह को ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर द्वारा क्रूरतापूर्वक दबा दिया गया था, और पीर अली को सार्वजनिक रूप से फाँसी दे दी गई थी।
3. बाबू कुंवर सिंह ने आरा पर कब्जा करने के बाद ब्रिटिश सेना के विरुद्ध दानापुर के विद्रोही सैनिकों के साथ मिलकर जुलाई 1857 में ही 'आरा की लड़ाई' (Battle of Arrah) लड़ी थी, जिसमें मेजर विन्सेंट आयर के नेतृत्व में आई ब्रिटिश सेना को कुंवर सिंह की सेना ने पूरी तरह पराजित कर दिया था और वे कभी आरा पर पुनः अधिकार नहीं कर पाए थे।
4. सिंहभूम (वर्तमान झारखंड, तब के बिहार का हिस्सा) क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व अर्जुन सिंह ने किया था, जिन्होंने पोरहाट के राजा के रूप में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध आदिवासियों को संगठित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और संसद (लोकसभा एवं राज्य सभा) की विधाई प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त भारत के महान्यायवादी को देश के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उन्हें संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का संवैधानिक अधिकार है, परंतु उन्हें सदन में किसी भी स्थिति में मतदान करने का अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
2. लोकसभा के विपरीत, राज्य सभा कभी भी पूरी तरह विघटित नहीं होती है, क्योंकि इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं, और संविधान के अनुसार राज्य सभा के सदस्यों का कार्यकाल निश्चित रूप से 5 वर्ष का होता है।
3. अनुच्छेद 105 के अंतर्गत संसद के सदस्यों को मिलने वाले विशेषाधिकारों के समान ही महान्यायवादी को भी संसद में मिलने वाले विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ प्राप्त होती हैं, क्योंकि वे संसद के दोनों सदनों की बैठकों में नियमित रूप से भाग लेते हैं।
4. धन विधेयक (Money Bill) के संबंध में लोकसभा की स्थिति अनन्य रूप से सर्वोपरि होती है, और राज्य सभा किसी धन विधेयक को अपने पास अधिकतम 30 दिनों तक रोक सकती है, जिसके बाद यदि वह इसे पारित नहीं करती है तो इसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
भारतीय संचित निधि के अलावा ऋण से संबंधित लेनदेन किसमें रखे जाते हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.