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BPSC TRE 4.0
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चुम्बकत्व और चुम्बकीय पदार्थों के गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic substances) किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में अत्यंत क्षीण रूप से चुम्बकीय हो जाते हैं, तथा इनका चुम्बकीय प्रवृत्ति (Magnetic susceptibility) का मान ऋणात्मक और ताप पर निर्भर नहीं होता है।
  2. 2. अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic substances) बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में हल्के से आकर्षित होते हैं, और क्यूरी के नियम के अनुसार इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति पर 절대 ताप (Absolute temperature) का व्युत्क्रमानुपाती संबंध होता है (χ ∝ 1/T)।
  3. 3. लौहचुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic substances) बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में प्रबल रूप से चुम्बकीय हो जाते हैं, और एक निश्चित ताप, जिसे 'क्यूरी ताप' (Curie temperature) कहा जाता है, से अधिक ताप होने पर ये अनुचुम्बकीय पदार्थों की भांति व्यवहार करने लगते हैं।
  4. 4. शैथिल्य (Hysteresis) की परिघटना केवल प्रतिचुम्बकीय पदार्थों में पाई जाती है, जहाँ चुम्बकीय क्षेत्र हटाने के बाद भी पदार्थ में कुछ अवशिष्ट चुम्बकत्व (Retentivity) शेष रह जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक होती है और यह ताप पर निर्भर नहीं करती; अनुचुम्बकीय पदार्थों की प्रवृत्ति ताप के व्युत्क्रमानुपाती होती है (क्यूरी का नियम); तथा लौहचुम्बकीय पदार्थ क्यूरी ताप से अधिक ताप पर अनुचुम्बकीय हो जाते हैं। कथन 4 असत्य है क्योंकि शैथिल्य (Hysteresis) का गुण मुख्य रूप से लौहचुम्बकीय पदार्थों में पाया जाता है, प्रतिचुम्बकीय में नहीं। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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