त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
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सत्रहवीं शताब्दी में भारत आने वाली यूरोपीय वाणिज्यिक कंपनियों और उनकी स्थापना तथा प्रारंभिक व्यापारिक बस्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पुर्तगालियों के बाद भारत आने वाले डच (नीदरलैंड्स) ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी वर्ष 1605 में मसूलीपट्टम में स्थापित की थी, तथा उन्होंने बिहार के पटना में भी नमक शोरा (Saltpetre), अफीम और सूती वस्त्रों के व्यापार के लिए अपनी फैक्टरी स्थापित की थी।
- 2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने वर्ष 1608 में कैप्टन विलियम हॉकिंस को जहांगीर के दरबार में भेजा था, जिसे सम्राट से सूरत में कारखाना स्थापित करने की अनुमति तुरंत मिल गई थी, और अंग्रेजों ने अपनी पहली स्थायी फैक्टरी दक्षिण भारत में मसूलीपट्टम (1611) में स्थापित की थी।
- 3. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना फ्रांसीसी मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से 1664 में हुई थी, तथा फ्रांसिस कैरॉन ने वर्ष 1668 में सूरत में भारत की पहली फ्रांसीसी फैक्ट्री की स्थापना की, जिसके बाद उन्होंने पांडिचेरी को अपना मुख्य केंद्र बनाया।
- 4. डेनिश (डेनमार्क) ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री 1620 में तंजावुर के तटीय क्षेत्र स्थित ट्रांकेबार (Tranquebar) में स्थापित की थी, और बंगाल के श्रीरामपुर (Serampore) में उनका प्रमुख व्यापारिक केंद्र था, जिसे बाद में उन्होंने अंग्रेजों को बेच दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (b) है। कथन 1, 3 और 4 सत्य हैं, जबकि कथन 2 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि कैप्टन विलियम हॉकिंस को 1608 में सूरत में फैक्ट्री खोलने की अनुमति तुरंत नहीं मिली थी (जहांगीर ने पुर्तगालियों के दबाव में अनुमति अस्वीकार कर दी थी, हालांकि बाद में 1613 में सूरत में स्थायी फैक्ट्री स्थापित हुई)। डच और फ्रांसीसियों की नीतियां, पटना में डच फैक्टरी की उपस्थिति, तथा डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी के केंद्र ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः सटीक हैं। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के आधुनिक भारतीय इतिहास पाठ्यक्रम के अंतर्गत यूरोपीय कंपनियों का आगमन एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विश्लेषणात्मक विषय है।
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बिहार की प्रमुख कला, संस्कृति और लोक पर्वों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मधुबनी चित्रकला (मिथिला पेंटिंग) के अंतर्गत मुख्य रूप से दो प्रमुख शैलियाँ पाई जाती हैं - 'कछनी' और 'भरनी', जिनमें 'कछनी' शैली में रेखाओं के माध्यम से एकरंगी (Monochrome) या हल्के रंगों का प्रयोग किया जाता है, जबकि 'भरनी' शैली में प्राकृतिक रंगों से सघन और चटकीले रंगों द्वारा चित्रों को भरा जाता है।
2. बिहार का प्रसिद्ध लोक पर्व 'छठ पूजा' कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला एक सूर्योपासना का महापर्व है, जिसकी विशिष्ट परंपरा के अंतर्गत ढलते सूर्य (संध्या अर्घ्य) के साथ-साथ उगते सूर्य (उषा अर्घ्य) को भी जल अर्पित किया जाता है, और यह प्रकृति तथा पर्यावरण संरक्षण का अनूठा प्रतीक है।
3. बिहार की पारंपरिक 'मंजुषा कला' (Manjusha Art) को मुख्य रूप से 'अंग क्षेत्र' (भागलपुर) से संबंधित माना जाता है, जिसमें सर्प कथा (विहुला-विषहर की गाथा) का अंकन मुख्य रूप से जूट के बक्से, कागज और पटचित्रों पर किया जाता है, और इसे 'सेंक कला' (Snake Art) के नाम से भी जाना जाता है।
4. बिहू नृत्य बिहार का एक अत्यंत लोकप्रिय लोक नृत्य है, जो राज्य के दक्षिणी पठारी क्षेत्रों में फसल कटाई के अवसर पर मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है और इसमें शास्त्रीय संगीत के नियमों का पूर्ण पालन किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत ने ब्रिटिश शासन से किस वर्ष में स्वतंत्रता प्राप्त की?
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