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BPSC TRE 4.0
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बिहार के वन क्षेत्र और मृदा के प्रकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत की वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) के अनुसार, बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 7.84% भाग वन आवरण (Forest Cover) के अंतर्गत आता है, जिसमें भौगोलिक क्षेत्रफल के प्रतिशत के मामले में कैमूर जिला शीर्ष स्थान पर है।
- 2. बिहार के उत्तरी मैदान की मृदा मुख्य रूप से नवीन जलोढ़ मृदा (खादर) है, जो प्रतिवर्ष बाढ़ के नए निक्षेपों से नवीकृत होती है और धान तथा जूट की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है।
- 3. दक्षिण-पश्चिम बिहार (विशेषकर रोहतास और कैमूर जिले) में विंध्यन क्रम की चट्टानों के अपक्षय और विखंडन के परिणामस्वरूप बालुई तथा लाल-पीली मृदा का विकास हुआ है, जिसमें सामान्यतः नाइट्रोजन और ह्यूमस की प्रचुरता पाई जाती है।
- 4. टाल क्षेत्र (गंगा के दक्षिण में मोकामा से बड़हिया तक फैला क्षेत्र) में पाई जाने वाली भारी चिकनी मृदा को 'टाल मृदा' कहा जाता है, जो रबी की फसलों (विशेषकर चना और मसूर) के उत्पादन के लिए अत्यधिक उपजाऊ मानी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है: भारत की वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) के अनुसार बिहार में वन आवरण राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 7.84% है और प्रतिशत के आधार पर कैमूर जिला शीर्ष पर है। कथन 2 सत्य है: उत्तर बिहार का मैदान नवीन जलोढ़ (खादर) मृदा से युक्त है जो बाढ़ के कारण उपजाऊ होती है और धान-जूट के लिए उपयुक्त है। कथन 3 असत्य है: दक्षिण-पश्चिम बिहार की लाल-पीली और बालुई मृदा में नाइट्रोजन और ह्यूमस की **प्रचुरता नहीं बल्कि भारी कमी** पाई जाती है। कथन 4 सत्य है: टाल क्षेत्र की भारी चिकनी मृदा रबी फसलों जैसे चना और मसूर के लिए अत्यधिक उपजाऊ है। परीक्षा संबंधी अधिक और विस्तृत जानकारी के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के पोर्टल पर जा सकते हैं।
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मानव शरीर के परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) और श्वसन तंत्र (Respiratory System) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव हृदय एक पेशीय अंग है जिसके दाएँ आलिंद और दाएँ निलय के बीच 'द्विवलन कपाट' (Bicuspid Valve या Mitral Valve) तथा बाएँ आलिंद और बाएँ निलय के बीच 'त्रिवलन कपाट' (Tricuspid Valve) स्थित होता है, जो रक्त के विपरीत प्रवाह को रोकता है।
2. फेफड़ों में गैसीय विनिमय 'कूपिकाओं' (Alveoli) की पतली झिल्ली के माध्यम से विसरण (Diffusion) प्रक्रिया द्वारा होता है, जहाँ ऑक्सीजन रक्त में घुलकर हीमोग्लोबिन के साथ 'ऑक्सीहीमोग्लोबिन' बनाती है।
3. रक्त दाब (Blood Pressure) को मापने के लिए 'स्फिग्मोमैनोमीटर' का उपयोग किया जाता है, तथा स्वस्थ वयस्क मनुष्य का सामान्य रक्तचाप 120/80 mm Hg होता है, जहाँ 120 'सिस्टोलिक' (संकुचन) दाब और 80 'डायस्टोलिक' (शिथिलन) दाब को दर्शाता है।
4. मनुष्य में श्वसन वर्णक (Respiratory Pigment) के रूप में 'हीमोग्लोबिन' पाया जाता है, जो एक प्रकार का लौयुक्त प्रोटीन है और इसकी ऑक्सीजन के साथ बंधुता (Affinity) कार्बन मोनोऑक्साइड की तुलना में अत्यधिक उच्च होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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अकार्बनिक रसायन (Inorganic Chemistry) के अंतर्गत संक्रमण धातुओं (Transition Metals), उनके यौगिकों तथा उपसहसंयोजन यौगिकों (Coordination Compounds) के रासायनिक गुणों और बंधता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संक्रमण धातुएँ (d-ब्लॉक के तत्व) सामान्यतः परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करती हैं, जिसका प्रमुख कारण इनके (n-1)d और ns कक्षकों की ऊर्जा में अत्यधिक अंतर होना होता है, जिससे इलेक्ट्रॉन आसानी से उत्तेजित हो जाते हैं।
2. वर्नर के उपसहसंयोजन सिद्धांत (Werner's Coordination Theory) के अनुसार, उपसहसंयोजन यौगिकों में केंद्रीय धातु परमाणु दो प्रकार की संयोजकताएँ—प्राथमिक संयोजकता (जो आयननीय होती है और ऑक्सीकरण संख्या को संतुष्ट करती है) तथा द्वितीयक संयोजकता (जो अनआयननीय होती है और समन्वय संख्या को संतुष्ट करती है)—प्रदर्शित करता है।
3. क्रिस्टल फील्ड सिद्धांत (Crystal Field Theory - CFT) के अनुसार, जब लिगैंड केंद्रीय धातु आयन के संपर्क में आते हैं, तो समभ्रंश (Degenerate) d-कक्षकों का ऊर्जा स्तर अ-समभ्रंश कक्षकों में विभाजित हो जाता है, और अष्टफलकीय संकुलों में $t_{2g}$ कक्षक उच्च ऊर्जा स्तर पर तथा $e_g$ कक्षक निम्न ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं।
4. सोडियम नाइट्रोप्रसाइड [$Na_2[Fe(CN)_5(NO)]$] का उपयोग सल्फर और सल्फाइड आयनों ($S^{2-}$) के गुणात्मक परीक्षण के लिए किया जाता है, जिसके साथ यह आयन क्रिया करके एक विशिष्ट बैंगनी या जामुनी रंग का उपसहसंयोजन यौगिक बनाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के अधिकार क्षेत्र और न्यायिक समीक्षा की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय का मूल और अनन्य (Exclusive Original Jurisdiction) क्षेत्राधिकार केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच किसी कानूनी विवाद में तब लागू होता है जब उस विवाद में विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न शामिल हो जिस पर किसी विधिक अधिकार का अस्तित्व निर्भर करता हो।
2. उच्चतम न्यायालय की 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) की शक्ति का आधार केवल यह है कि क्या कोई विधायी अधिनियम या कार्यकारी आदेश संविधान के किसी उपबंध का उल्लंघन करता है, और इसके दायरे में संसद द्वारा संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के बाहर बनाए गए सामान्य विधियाँ ही आती हैं, संविधान संशोधन अधिनियम इसके दायरे से पूर्णतः बाहर हैं।
3. राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 143 के तहत उच्चतम न्यायालय से किसी विधि या तथ्य के प्रश्न पर परामर्श मांगा जा सकता है, जिसके तहत न्यायालय के लिए यह अनिवार्य है कि वह जनहित के मामलों में अपनी राय राष्ट्रपति को अवश्य सौंपे और राष्ट्रपति उस राय को मानने के लिए पूर्णतः बाध्य होते हैं।
4. संविधान के अनुच्छेद 142 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए यह शक्ति प्राप्त है कि वह किसी वाद या विषय में पूर्ण न्याय (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक कोई भी डिक्री पारित कर सके या आदेश दे सके, और ऐसा प्रत्येक आदेश पूरे भारत में प्रवर्तनीय होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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दांडी यात्रा कितने दिन चली थी?
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चोल साम्राज्य का संस्थापक कौन था?
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