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प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत में राष्ट्रीय आंदोलनों की गतिशीलता के संदर्भ में 'मुस्लिम लीग' और 'होमरोल लीग आंदोलन' के बीच हुए सहयोग और ऐतिहासिक परिघटनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1916 के प्रसिद्ध लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक समझौता (लखनऊ पैक्ट) संपन्न हुआ, जिसमें मुस्लिम लीग की ओर से मुख्य रूप से मोहम्मद अली जिन्ना और कांग्रेस की ओर से अंबिका चरण मजूमदार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, और इसी अधिवेशन में होमरोल आंदोलन के नेताओं (बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसिड) ने भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई थी।
- 2. एनी बेसेंट द्वारा सितंबर 1916 में मद्रास में स्थापित 'ऑल इंडिया होम रूल लीग' को मुस्लिम लीग के कई प्रमुख नेताओं जैसे मौलाना आज़ाद, हसरत मोहानी और अली बंधुओं का नैतिक एवं राजनीतिक समर्थन प्राप्त हुआ था, जिसके कारण ब्रिटिश सरकार ने इस बढ़ते हुए हिंदू-मुMuslim गठबंधन को रोकने के लिए दमनकारी नीतियां अपनाई थीं।
- 3. बाल गंगाधर तिलक द्वारा अप्रैल 1916 में महाराष्ट्र और कर्नाटक क्षेत्र में शुरू की गई होमरोल लीग ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार के समक्ष 'उत्तरदायी शासन' (Responsible Government) की मांग को मजबूती से रखा, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1917 की मोंटग्यू घोषणा (Montagu Declaration) जारी की थी।
- 4. वर्ष 1916 के लखनऊ समझौते के तहत कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की 'पृथक निर्वाचक मंडल' (Separate Electorate) की मांग को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया था, जिसे बाद में राष्ट्रवादी नेताओं जैसे मदन मोहन मालवीय और कई अन्य कांग्रेसियों द्वारा इस आधार पर तीखा विरोध किया गया कि यह भविष्य में सांप्रदायिक विभाजन को और अधिक बढ़ावा देगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
प्रथम विश्व युद्ध के कालखंड में (1916 के दौरान) भारतीय राजनीति में एक अभूतपूर्व मोड़ आया जब नरमदल, गरमदल, मुस्लिम लीग और होमरोल लीग के नेता एक मंच पर आए। 1916 का लखनऊ समझौता (Lucknow Pact) कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच एक मील का पत्थर साबित हुआ, जहाँ कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की पृथक निर्वाचन की मांग को स्वीकार कर लिया। बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट के होमरोल लीग आंदोलनों ने देश में स्वशासन की मांग को जन-जन तक पहुँचाया और मुस्लिम लीग के नेताओं के साथ मिलकर सांप्रदायिक सदभाव व राष्ट्रीय एकता का अनूठा परिचय दिया। इस समूची तैयारी और परीक्षा के उच्च स्तरीय अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल का उपयोग करें। उपर्युक्त चारों कथन ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर पूर्णतः सत्य हैं।
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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) की रूपरेखा तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी हालिया रिपोर्टों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत देश में आपदा प्रबंधन के लिए त्रि-स्तरीय संस्थागत ढांचा स्थापित किया गया है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में NDMA, राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में BSDMA, तथा जिला स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) कार्य करते हैं।
2. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) द्वारा अपनाए गए 'सुरक्षित बिहार, विकसित बिहार' के दृष्टिकोण के तहत जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के लिए 'बिहार आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप' तैयार किया गया है, जिसके तहत वज્રपात (Lightning) और बाढ़ से बचाव के लिए 'इन्द्र वज्र' ऐप जैसे तकनीकी समाधानों का उपयोग किया जाता है।
3. भारत की नवीनतम पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट (State of Environment Report) के अनुसार, देश में जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसमी घटनाओं (Extreme Weather Events) की आवृत्ति में लगातार वृद्धि हुई है, जिसमें बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है जो बाढ़ और सूखे दोनों ही आपदाओं से अत्यधिक संवेदनशील रूप से प्रभावित होते हैं।
4. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी 'इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट' (ISFR) के अनुसार, बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में वनावरण और वृक्षावरण का कुल प्रतिशत राष्ट्रीय औसत (24.62%) से अधिक है, और पिछले दो वर्षों में राज्य में सर्वाधिक वन आवरण की वृद्धि रोहतास और कैमूर जिलों में दर्ज की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को उसके कार्यों के संपादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, तथा राष्ट्रपति इस सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य होता है (42वें और 44वें संविधान संशोधन अधिनियमों द्वारा इसमें आवश्यक संशोधन किए गए थे)।
2. उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है और वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता है, तथा इस अवधि में उसे राज्यसभा के सभापति का वेतन या भत्ता प्राप्त नहीं होता है।
3. केंद्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका तात्पर्य यह है कि यदि लोकसभा द्वारा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ता है।
4. राष्ट्रपति द्वारा केंद्रीय मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाती है, तथा संविधान के अनुच्छेद 75(5) के अनुसार कोई भी मंत्री जो निरंतर छह मास तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहता है, वह मंत्री पद पर बना रह सकता है यदि वह अगले सत्र में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1916 में स्थापित 'होमरोल लीग' आंदोलन और उसके समकालीन 'मुस्लिम लीग' के अंतर्संबंधों तथा उनकी राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाल गंगाधर तिलक द्वारा अप्रैल 1916 में स्थापित इंडियन होम रूल लीग का मुख्य कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र (बॉम्बे शहर को छोड़कर), कर्नाटक, मध्य प्रांत और बरार था, तथा इसका मुख्यालय पुणे में स्थित था, जबकि एनी बेसेंट की होमरोल लीग का कार्यक्षेत्र शेष भारत था।
2. वर्ष 1916 के ऐतिहासिक लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुए प्रसिद्ध 'लखनऊ पैक्ट' के तहत कांग्रेस ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडलों की मांग को स्वीकार किया था, जिसमें मोहम्मद अली जिन्ना और बाल गंगाधर तिलक ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
3. मुस्लिम लीग के कलकत्ता अधिवेशन (1917) में एनी बेसेंट की गिरफ्तारी के विरोध में एक निंदा प्रस्ताव पारित किया गया था, और लीग के कई प्रमुख नेताओं जैसे जिन्ना और मौलाना हसरत मोहानी ने भी होमरोल लीग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था।
4. एनी बेसेंट द्वारा शुरू किए गए होमरोल आंदोलन के विरोध में नरम दल (उदारवादी) के नेताओं ने तुरंत ब्रिटिश सरकार का समर्थन करते हुए आंदोलन की कड़ी आलोचना की थी और देशहित में किसी भी होमरोल लीग की सदस्यता ग्रहण करने से आजीवन स्पष्ट इनकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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गाज़ा पट्टी के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर लगाए गए 'तीनकठिया' प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक बीघा जमीन के तीन कट्ठा (यानी 3/20वें हिस्से) भाग पर नील की अनिवार्य खेती करना कानूनी रूप से बाध्यकारी था।
2. महात्मा गांधी को चंपारण आने का आधिकारिक निमंत्रण मुजफ्फरपुर के एक स्थानीय वकील राजकुमार शुक्ल द्वारा दिया गया था, और गांधीजी के साथ इस आंदोलन में राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह और जे.बी. कृपलानी जैसे नेताओं ने भी सक्रिय सहयोग दिया था।
3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता से घबराकर ब्रिटिश सरकार ने एक जाँच समिति (चंपारण एग्रेरियन कमेटी) का गठन किया था, जिसके अध्यक्ष एफ.आई. सलाई (F.I. Sly) थे, और इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित कर तीनकठिया प्रथा को समाप्त कर दिया गया था।
4. इस सफल आंदोलन के तुरंत बाद प्रसिद्ध ब्रिटिश सुधारक सी.एफ. एंड्रयूज (C.F. Andrews) ने चंपारण के किसानों की समस्याओं के समर्थन में गांधीजी के साथ बिहार का दौरा किया था, और गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा दी गई थी, जबकि इसी समय उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा 'कैसरे-हिन्द' की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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