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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को उसके कार्यों के संपादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, तथा राष्ट्रपति इस सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य होता है (42वें और 44वें संविधान संशोधन अधिनियमों द्वारा इसमें आवश्यक संशोधन किए गए थे)।
  2. 2. उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है और वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय राज्यसभा के सभापति के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता है, तथा इस अवधि में उसे राज्यसभा के सभापति का वेतन या भत्ता प्राप्त नहीं होता है।
  3. 3. केंद्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका तात्पर्य यह है कि यदि लोकसभा द्वारा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ता है।
  4. 4. राष्ट्रपति द्वारा केंद्रीय मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाती है, तथा संविधान के अनुच्छेद 75(5) के अनुसार कोई भी मंत्री जो निरंतर छह मास तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहता है, वह मंत्री पद पर बना रह सकता है यदि वह अगले सत्र में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। संविधान के अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है (अनुच्छेद 64) और राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते समय वह सभापति के वेतन का हकदार नहीं होता (अनुच्छेद 97)। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है (अनुच्छेद 75)। कथन 4 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 75(5) के अनुसार यदि कोई मंत्री लगातार छह महीने तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहता है, तो वह उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रह सकता; इसके लिए केवल 'घोषणा' करना पर्याप्त नहीं है बल्कि उसे निर्वाचित होना अनिवार्य है। अधिक अभ्यास के लिए हमारी बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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