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BPSC TRE 4.0
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परमाणु भौतिकी और नाभिकीय अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) की प्रक्रिया में एक भारी नाभिक (जैसे यूरेनियम-235) न्यूट्रॉनों की बमबारी से लगभग समान आकार के दो छोटे नाभिकों में टूटता है, जिसके साथ अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा और औसतन 2 से 3 नए न्यूट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।
- 2. परमाणु रिएक्टर (Nuclear Reactor) में श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction) को नियंत्रित करने के लिए कैडमियम या बोरॉन की छड़ों का उपयोग किया जाता है, जो विखंडन के दौरान उत्पन्न अतिरिक्त न्यूट्रॉनों को अवशोषित कर लेती हैं।
- 3. सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) है, जिसमें अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर हल्के हाइड्रोजन नाभिक संलयित होकर हीलियम का निर्माण करते हैं, और यह अभिक्रिया नियंत्रित रूप से होती है।
- 4. मंदक (Moderator) के रूप में भारी जल (Deuterium Oxide, $D_2O$) या ग्रेफाइट का उपयोग परमाणु रिएक्टर में तीव्र गति से चलने वाले न्यूट्रॉनों की गति को धीमा करने के लिए किया जाता है ताकि वे यूरेनियम-235 के विखंडन को सुगमता से प्रेरित कर सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। नाभिकीय विखंडन में यूरेनियम-235 पर न्यूट्रॉन की बौछार से छोटे नाभिक और न्यूट्रॉन निकलते हैं। नियंत्रक छड़ें (कैडमियम/बोरॉन) अतिरिक्त न्यूट्रॉनों को सोखकर श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करती हैं, और भारी जल या ग्रेफाइट मंदक का कार्य करते हैं। कथन 3 असत्य है क्योंकि सूर्य में होने वाली नाभिकीय संलयन अभिक्रिया 'अनियंत्रित' (Uncontrolled) होती है, न कि नियंत्रित। परीक्षा की विस्तृत तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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बिहार के प्रमुख किसान आंदोलनों और औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध हुए संघर्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया प्रणाली' के अंतर्गत प्रत्येक बीघा (20 कट्ठा) भूमि के तीन कट्ठा हिस्से पर नील की अनिवार्य खेती करना कानूनी रूप से अनिवार्य था, और इसके विरुद्ध राजकुमार शुक्ल के विशेष आग्रह पर महात्मा गांधी ने चंपारण का दौरा किया था।
2. वर्ष 1929 में स्वामी सहजानंद सरस्वती की अध्यक्षता में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की औपचारिक स्थापना की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य जमींदारों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्याचारों, बेदखली और अवैध वसूली (जैसे-अमइवस आदि) के विरुद्ध आवाज उठाना था।
3. 'बकाश्त भूमि' (Bakasht Land) आंदोलन का संबंध मुख्य रूप से उन जमींदारों से था जिन्होंने किसानों की जमीन को ऋण न चुका पाने के कारण बेदखल कर दिया था, और इस आंदोलन के माध्यम से किसानों ने अपनी काश्तकारी अधिकारों की पुनः प्राप्ति के लिए कड़ा संघर्ष किया, जिसमें राहुल सांकृत्यायन ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
4. मोकामा ताल क्षेत्र में स्वामी सहजानंद सरस्वती और कार्यानंद शर्मा के नेतृत्व में चलाए गए किसान आंदोलन का मुख्य उद्देश्य ताल की उपजाऊ भूमि पर मसूद और अन्य फसलों के उत्पादन के लिए किसानों के पारंपरिक अधिकारों को सुरक्षित रखना और फसल के बँटवारे की 'बटाई' प्रणाली में सुधार करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के महान स्वतंत्रता सेनानियों, साहित्यकारों और उनके विशिष्ट योगदानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक और 'संपूर्ण क्रांति' के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण को वर्ष 1999 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था।
2. 'राष्ट्रकवि' के रूप में प्रख्यात रामधारी सिंह 'दिनकर' की प्रसिद्ध रचना 'रश्मिरथी' कर्ण के जीवन चरित्र पर आधारित एक महाकाव्य है, तथा उन्हें उनकी किसलय कृति के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाज़ा गया था।
3. आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रणेता और पहले हिंदी दैनिक 'भारत मित्र' के संपादक बाबू देवकीनंदन खत्री ने 'चंद्रकांता' और 'चंद्रकांता संतति' जैसे प्रसिद्ध उपन्यासों की रचना की थी, जिनका संबंध मुख्य रूप से बिहार के रोहतास और चुनार के किलों से जुड़ा हुआ है।
4. प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी और बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्री बाबू) के नेतृत्व में वर्ष 1937 में गठित पहली प्रांतीय सरकार ने गया के विष्णुपद मंदिर में दलितों और अछूतों के प्रवेश को लेकर ऐतिहासिक कानून पारित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्रथमतः आपातस्थिति की घोषणा कितने समयकाल के लिए सीमित की जा सकती है?
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भारतीय राजव्यवस्था के अंतर्गत विभिन्न संवैधानिक पदों, संस्थाओं और उनकी कार्यप्रणाली के विविध आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत नियुक्त भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया और आधार ठीक उसी प्रकार निर्धारित हैं जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के होते हैं, और वे अपने पद से सेवानिवृत्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पद के पात्र नहीं होते हैं।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 के अनुसार राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, और उसे राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, किंतु उसे मतदान का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
3. अनुच्छेद 315 के तहत गठित संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, तथा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन के लिए पात्र नहीं होते हैं, सिवाय इसके कि वे UPSC या राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष पद पर नियुक्त हो सकें।
4. संविधान के भाग XIV के अंतर्गत अधिकरणों (Tribunals) के संबंध में अनुच्छेद 323A संसद को प्रशासनिक अधिकरणों की स्थापना करने की शक्ति देता है, जो केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों से संबंधित विवादों का निपटारा कर सकते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा के मामलों के लिए अधिकरण स्थापित करने की शक्ति केवल संबंधित राज्य विधानसभाओं के पास होती है, संसद के पास नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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