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BPSC TRE 4.0
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सुभाषचंद्र बोस एवं आज़ाद हिंद फौज (INA) के गठन, उनके ऐतिहासिक अभियानों तथा इससे जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सुभाषचंद्र बोस ने वर्ष 1942 में जर्मनी में 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की थी और वहीं से पहली बार उन्होंने जर्मन रेडियो के माध्यम से महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर संबोधित किया था।
- 2. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा स्थापित 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'इंडियन नेशनल आर्मी' (INA) की कमान जब सुभाषचंद्र बोस को सौंपी गई, तब उन्होंने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में ही स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार (आर्ज़े हुकूमत-ए-हिंद) की स्थापना की घोषणा की थी।
- 3. आज़ाद हिंद फौज की सेनाओं ने जापानी सेना के सहयोग से भारत की मुख्य भूमि पर आक्रमण किया और अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह पर अधिकार कर उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा, तथा इंफाल अभियान के दौरान उनके सैनिकों ने कोहिमा तक का मार्ग तय किया था।
- 4. वर्ष 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद आज़ाद हिंद फौज के गिरफ्तार किए गए सैनिकों और अधिकारियों (जैसे प्रेम सहगल, गुरदयाल सिंह ढिल्लों और शाहनवाज खान) पर लाल किले में मुकदमा चलाया गया, जिसकी पैरवी के लिए कांग्रेस द्वारा गठित भूलाभाई देसाई के नेतृत्व वाले बचाव पक्ष में जवाहरलाल नेहरू, तेज बहादुर सप्रू और कात्जू जैसे प्रख्यात वकील शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। सुभाषचंद्र बोस ने 1942 में जर्मनी में 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और 6 जुलाई 1944 को सिंगापुर रेडियो से गांधीजी को संबोधित करते हुए पहली बार 'राष्ट्रपिता' कहा था। रास बिहारी बोस के आमंत्रण पर सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर की बागडोर संभाली और 21 अक्टूबर 1943 को 'आर्ज़े हुकूमत-ए-हिंद' (अस्थायी सरकार) बनाई। INA ने अंडमान-निकोबार जीतकर 'शहीद' व 'स्वराज' नाम दिया तथा 1945 के लाल किले के ऐतिहासिक मुकदमे में बचाव पक्ष के वकीलों का नेतृत्व भूलाभाई देसाई ने किया जिसमें जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे। इस प्रकार के महत्वपूर्ण इतिहास आधारित प्रश्नों के गहन अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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रोजगार और शिक्षा में अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण सबसे पहले किस राज्य ने लागू किया?
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बिहार में हाल ही में लागू की गई प्रशासनिक, आर्थिक और लोक कल्याणकारी योजनाओं तथा डिजिटल पहलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, 2011' के अंतर्गत नागरिकों को तय समय-सीमा के भीतर आवश्यक सेवाएँ प्रदान करने की वैधानिक गारंटी दी जाती है, और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए 'सर्विस प्लस' पोर्टल के माध्यम से जाति, आय और निवास प्रमाण पत्रों के ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी गई है।
2. बिहार सरकार द्वारा राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए 'बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति' (खाद्य प्रसंस्करण एवं टेक्सटाइल) के तहत निवेशकों को पूँजीगत सब्सिडी और स्टांप ड्यूटी में विशेष छूट प्रदान की जा रही है, तथा इसी क्रम में राज्य में इथेनॉल उत्पादन को भी प्राथमिकता दी गई है।
3. राज्य के विद्यालयों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति तथा प्रशासनिक अनुश्रवण (Monitoring) को सुदृढ़ करने के लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (BEPC) द्वारा 'ई-शिक्षाकोष' (e-Shikshakosh) पोर्टल और मोबाइल ऐप का संचालन किया जा रहा है।
4. 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' का संचालन समाज कल्याण विभाग द्वारा किया जाता है, जिसके अंतर्गत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को ₹10 लाख तक का शिक्षा ऋण बिना किसी ब्याज के उपलब्ध कराया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार की राजनीति, पंचायत राज व्यवस्था और प्रशासनिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार पंचायती राज अधिनियम, 2006 के तहत महिलाओं को त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) के सभी पदों और सोपानों में 50 प्रतिशत का आरक्षण देने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना था।
2. बिहार के प्रशासनिक ढाँचे में जिला मजिस्ट्रेट (DM) जिला स्तर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्य करता है, तथा उसे जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ भू-राजस्व प्रशासन और जिला योजना समिति के समन्वय की भी व्यापक शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
3. राज्य में लोकायुक्त संस्था की स्थापना 'बिहार लोकायुक्त अधिनियम' के तहत प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायतों की त्वरित जाँच के लिए की गई है, जिसके दायरे में मुख्यमंत्री और मंत्रीगण भी पूर्ण रूप से शामिल होते हैं।
4. बिहार विधान परिषद (राज्य की उच्च सदन) एक स्थायी निकाय है जिसे कभी भंग नहीं किया जा सकता, तथा इसके सदस्यों की कुल संख्या बिहार विधानसभा की कुल सदस्य संख्या (243) के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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कौन सी संस्था भारत की पहली जीन-संपादित भेड़ के विकास से जुड़ी है?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और संसद (लोकसभा एवं राज्य सभा) की विधाई प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्य सभा) या उनकी संयुक्त बैठक में बोलने तथा भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे संसद में किसी भी विधेयक या प्रस्ताव पर मतदान (Voting) करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. राज्य सभा एक स्थायी सदन है जो कभी विघटित नहीं होता है, और इसके प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है, तथा इसके एक-तिहाई सदस्य प्रति दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं, किंतु यदि कोई सदस्य उप-चुनाव के माध्यम से रिक्त सीट पर चुनकर आता है, तो उसका कार्यकाल भी शेष 6 वर्ष का ही होता है।
3. लोकसभा में किसी भी अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) को प्रस्तुत करने के लिए न्यूनतम 50 सदस्यों के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है, और यह प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है, राज्य सभा में नहीं।
4. धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, और राज्य सभा को इस संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियाँ प्राप्त हैं क्योंकि वह किसी धन विधेयक को अस्वीकार या उसमें संशोधन नहीं कर सकती, बल्कि उसे अधिकतम 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिश के लोकसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है।
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