त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
1 views
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग तथा अन्य विभागों द्वारा डिजिटल गवर्नेंस को सुदृढ़ करने के लिए शुरू किए गए प्रमुख पोर्टलों और मोबाइल ऐप्स के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'ई-शिक्षाकोश' (e-Shikshakosh) पोर्टल और मोबाइल ऐप का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों, विद्यार्थियों और शैक्षणिक गतिविधियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, डिजिटल अटेंडेंस तथा प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
- 2. 'बिहार मौसम सेवा केंद्र' (BMSK) मोबाइल ऐप को आपदा प्रबंधन और योजना एवं विकास विभाग द्वारा लॉन्च किया गया है, जो उपयोगकर्ताओं को ब्लॉक और पंचायत स्तर तक के मौसम का सटीक पूर्वानुमान, तापमान और वज्रपात (Lightning) की चेतावनी प्रदान करता है।
- 3. 'अनमोल' (ANMOL) ऐप का उपयोग स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड, टीकाकरण और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की ऑनलाइन ट्रैकिंग के लिए किया जाता है।
- 4. 'गरुड़ ऐप' (Garuda App) बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा विशेष रूप से सरकारी विद्यालयों में मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) वितरण की गुणवत्ता की निगरानी के लिए विकसित और उपयोग किया जाने वाला आधिकारिक पोर्टल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। 'ई-शिक्षाकोश' पोर्टल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति व शैक्षणिक प्रबंधन के लिए है, 'बिहार मौसम सेवा केंद्र' ऐप ब्लॉक स्तर तक मौसम की सटीक जानकारी देता है, और 'अनमोल' ऐप का संबंध स्वास्थ्य विभाग से है। कथन 4 असत्य है क्योंकि 'गरुड़ ऐप' (Garuda App) भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान केंद्रों के डिजिटल मैपिंग के लिए लॉन्च किया गया था, न कि मध्याह्न भोजन के लिए। परीक्षा की विस्तृत तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
निम्नलिखित में से किसने बाल गंगाधर तिलक को 'भारतीय असंतोष का जनक' कहा है?
→
किस वर्ष लॉर्ड लिटन ने भाषाई आधार पर प्रेस की स्वतंत्रता को प्रतिबन्धित कर दिया?
→
पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के ऊर्जा प्रवाह और जैव-रासायनिक चक्रों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदशकीय (Unidirectional) होता है, और लिंडमैन के 'दस प्रतिशत नियम' (10% Law) के अनुसार, एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर केवल 10 प्रतिशत ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है, जबकि शेष 90 प्रतिशत ऊर्जा श्वसन, ताप और उपापचय क्रियाओं के दौरान ह्रासित हो जाती है।
2. 'पारिस्थितिक पिरामिड' (Ecological Pyramid) में संख्या का पिरामिड और ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा (Upright) बनता है, किंतु एक बड़े वृक्ष के पारिस्थितिकी तंत्र में पक्षियों के लिए 'संख्या का पिरामिड' उल्टा (Inverted) हो सकता है, और महासागरीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में 'बायोमास का पिरामिड' भी सदैव उल्टा होता है।
3. वायुमंडल में नाइट्रोजन गैस की प्रचुरता के बावजूद पौधे इसे सीधे वायुमंडल से ग्रहण नहीं कर पाते हैं, अतः राइजोबियम और एजोटोबैक्टर जैसे सूक्ष्मजीव इसे नाइट्रेट्स या अमोनिया में बदलकर 'नाइट्रोजन स्थिरीकरण' (Nitrogen Fixation) का कार्य करते हैं, जो जैव-रासायनिक चक्र का एक प्रमुख हिस्सा है।
4. पारिस्थितिक अनुक्रमण (Ecological Succession) की प्रक्रिया में किसी नग्न चट्टान पर उगने वाले सबसे पहले पौधे 'लाइकेन' (Lichens) होते हैं, जिन्हें 'पायनियर कम्युनिटी' (Pioneer Community) कहा जाता है, जो चट्टानों को विघटित करके मृदा निर्माण की प्रक्रिया को शुरू करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों तथा उनके संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और बाद में 'ब्रह्म समाज' (1828) ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, पुरोहितवाद और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का कड़ा विरोध किया तथा एकेश्वरवाद और तार्किक वेदांत दर्शन का समर्थन किया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय तथा अज्ञानता का नाश करने वाला स्रोत माना, किंतु उन्होंने मूर्तिपूजा और जन्मना जाति व्यवस्था का समर्थन किया।
3. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों (निम्न जातियों) को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों से मुक्त कराना तथा शिक्षा के माध्यम से उनका सामाजिक सशक्तिकरण करना था।
4. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के कारण वर्ष 1856 में ब्रिटिश सरकार द्वारा 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया गया, जिसने कानूनी रूप से विधवाओं के पुनर्विवाह को मान्यता प्रदान की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
सत्रहवीं शताब्दी में भारत आने वाली यूरोपीय वाणिज्यिक कंपनियों और उनकी स्थापना तथा प्रारंभिक व्यापारिक बस्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पुर्तगालियों के बाद भारत आने वाले डच (नीदरलैंड्स) ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी वर्ष 1605 में मसूलीपट्टम में स्थापित की थी, तथा उन्होंने बिहार के पटना में भी नमक शोरा (Saltpetre), अफीम और सूती वस्त्रों के व्यापार के लिए अपनी फैक्टरी स्थापित की थी।
2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने वर्ष 1608 में कैप्टन विलियम हॉकिंस को जहांगीर के दरबार में भेजा था, जिसे सम्राट से सूरत में कारखाना स्थापित करने की अनुमति तुरंत मिल गई थी, और अंग्रेजों ने अपनी पहली स्थायी फैक्टरी दक्षिण भारत में मसूलीपट्टम (1611) में स्थापित की थी।
3. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना फ्रांसीसी मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से 1664 में हुई थी, तथा फ्रांसिस कैरॉन ने वर्ष 1668 में सूरत में भारत की पहली फ्रांसीसी फैक्ट्री की स्थापना की, जिसके बाद उन्होंने पांडिचेरी को अपना मुख्य केंद्र बनाया।
4. डेनिश (डेनमार्क) ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री 1620 में तंजावुर के तटीय क्षेत्र स्थित ट्रांकेबार (Tranquebar) में स्थापित की थी, और बंगाल के श्रीरामपुर (Serampore) में उनका प्रमुख व्यापारिक केंद्र था, जिसे बाद में उन्होंने अंग्रेजों को बेच दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.