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BPSC TRE 4.0
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मौर्य साम्राज्य और मौर्योत्तर काल (Maurya and Post-Maurya Period) की प्रशासनिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था तथा सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मौर्य काल में केंद्रीय प्रशासन का संचालन 'तीर्थ' नामक उच्च अधिकारियों द्वारा होता था, जिनकी कुल संख्या अर्थशास्त्र के अनुसार 18 थी, और कृषि विभाग के प्रमुख को 'सीताध्यक्ष' कहा जाता था जो राजकीय भूमि की देखरेख करता था।
  2. 2. अशोक के शिलालेखों में प्रयुक्त लिपियों में ब्राह्मी और खरोष्ठी के अतिरिक्त उत्तर-पश्चिम सीमांत क्षेत्र में यूनानी (Greek) और आर्माइक (Aramaic) लिपियों का भी प्रयोग किया गया है, जो उसकी बहुसांस्कृतिक और समावेशी नीति को दर्शाता है।
  3. 3. मौर्योत्तर काल में सातवाहन वंश के शासकों ने सबसे पहले ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि (Agrahara) दान देने की प्रथा की शुरुआत की थी, जिससे सामंती व्यवस्था की शुरुआती प्रवृत्ति देखने को मिलती है।
  4. 4. कुषाण काल के दौरान मथुरा कला शैली (Mathura Art School) में मुख्य रूप से सफेद संगमरमर का उपयोग किया गया, जबकि गांधार कला शैली में काले स्लेटी पत्थर (Grey Schist) और मट्टिका का बहुतायत से प्रयोग हुआ था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं, जबकि कथन 4 आंशिक रूप से असत्य है। स्पष्टीकरण: मौर्य काल में प्रशासनिक अधिकारियों को 'तीर्थ' कहा जाता था और कृषि विभाग के प्रमुख को 'सीताध्यक्ष' कहा जाता था (कथन 1 सत्य)। अशोक के अभिलेखों में ब्राह्मी, खरोष्ठी, ग्रीक और आर्माइक लिपियों का प्रयोग मिलता है (कथन 2 सत्य)। सातवाहन काल में भूमि अनुदान (अग्रहार व्यवस्था) की शुरुआत बड़े पैमाने पर हुई थी (कथन 3 सत्य)। जहाँ तक कथन 4 का संबंध है, मथुरा कला शैली में मुख्य रूप से 'लाल बलुआ पत्थर' (Red Sandstone) का उपयोग किया गया था, न कि सफेद संगमरमर का (सफेद संगमरमर का प्रयोग अमरावती कला में प्रमुखता से हुआ था)। अधिक अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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