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BPSC TRE 4.0
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उद्भव, उसके शुरुआती अधिवेशनों, वैचारिक बहसों तथा महत्वपूर्ण प्रस्तावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कांग्रेस के वर्ष 1896 के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता रहमतुल्ला सयानी ने की थी, इसी अधिवेशन में पहली बार बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित 'वंदे मातरम्' गीत गाया गया था और दादाभाई नौरोजी के 'धन की निकासी' (Drain of Wealth) के सिद्धांत को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया था।
- 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच उत्पन्न तीव्र वैचारिक मतभेदों के कारण 'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' आंदोलन के प्रस्ताव को केवल बंगाल तक सीमित रखने पर सहमति बनी, जबकि गरमपंथी इसे पूरे देश में लागू करना चाहते थे।
- 3. वर्ष 1922 के गया अधिवेशन की अध्यक्षता चित्तरंजन दास (देशबंधु) ने की थी, जिसमें असहयोग आंदोलन की असफलता के बाद कांग्रेस के भीतर 'परिवर्तनवादियों' (Pro-changers) द्वारा विधान परिषदों में प्रवेश करने की वकालत की गई थी, किंतु इस प्रस्ताव के पराजित होने के बाद सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर 'स्वराज पार्टी' का गठन किया था।
- 4. वर्ष 1938 के हरिपुरा (गुजरात) अधिवेशन की अध्यक्षता सुभाष चंद्र बोस ने की थी, जिसमें राष्ट्रीय योजना समिति (National Planning Committee) का गठन किया गया था जिसके अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू बनाए गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि 1896 के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता रहमतुल्ला सयानी ने की थी और इसी ऐतिहासिक अधिवेशन में पहली बार 'वंदे मातरम्' गाया गया था। कथन 2 असत्य है क्योंकि 1905 के बनारस अधिवेशन में गरमपंथियों (बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय आदि) के भारी दबाव के बावजूद स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के प्रस्ताव को बंगाल से बाहर पूरे देश में फैलाने पर नरमपंथियों (गोपाल कृष्ण गोखले) ने तीखा विरोध किया था, जिसके कारण यह प्रस्ताव केवल बंगाल तक ही सीमित रखने पर गतिरोध उत्पन्न हुआ था और पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं हो पाया था। कथन 3 सत्य है, 1922 का गया अधिवेशन चित्तरंजन दास की अध्यक्षता में हुआ था जहाँ विधान परिषद प्रवेश को लेकर मतभेद उभरे थे। कथन 4 सत्य है, हरिपुरा अधिवेशन 1938 में सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में हुआ था और जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में राष्ट्रीय योजना समिति बनी थी। अधिक अभ्यास के लिए हमारी बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा सामग्री देखें।
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पृथ्वी के वायुमंडलीय दाब, आर्द्रता, पवन संचार तथा चक्रवातों की गतिशीलता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायुमंडल का दाब समुद्र तल पर सबसे अधिक होता है और जैसे-जैसे हम ऊँचाई की ओर बढ़ते हैं, वायुदाब तेजी से घटता है क्योंकि वायुमंडल का घनत्व कम हो जाता है।
2. 'कोरिऑलिस बल' (Coriolis Force) पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में पवनों को उनकी मूल दिशा के दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है, और यह बल विषुवत वृत्त (Equator) पर अधिकतम होता है।
3. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात (Temperate Cyclones) मुख्य रूप से ध्रुवीय और उष्णकटिबंधीय वायुराशियों के मिलने से बनने वाले 'वाताग्र' (Fronts) के सहारे उत्पन्न होते हैं, और इनका क्षेत्रफल उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तुलना में बहुत बड़ा होता है।
4. सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) वायु में मौजूद जलवाष्प की वास्तविक मात्रा और उसी तापमान पर वायु की जलवाष्प धारण करने की अधिकतम क्षमता का अनुपात होती है, जिसे प्रतिशत (%) में व्यक्त किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के प्रमुख किसान आंदोलनों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1922-23 में मुंगेर जिले में 'किसान सभा' का गठन मुहम्मद जुबैर और श्रीकृष्ण सिंह के प्रयासों से किया गया था, जिसका उद्देश्य जमींदारों द्वारा किसानों से अवैध रूप से वसूले जाने वाले 'हक-हकूक' और लगान के विरुद्ध कानूनी और संगठित प्रतिरोध खड़ा करना था।
2. स्वामी विद्यानंद ने वर्ष 1919-20 के दौरान दरभंगा और मधुबनी क्षेत्र के किसानों को संगठित कर जमींदारी जुल्मों, गो-चर भूमि पर अवैध कब्जे और बेगार प्रथा के खिलाफ एक शक्तिशाली आंदोलन चलाया था।
3. वर्ष 1934 में पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में आयोजित एक बैठक के दौरान 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' के बैनर तले स्वामी सहजानंद सरस्वती की अध्यक्षता में 'अखिल भारतीय किसान समिति' की रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा का गठन हुआ।
4. बकाश्त भूमि की वापसी के लिए चलाए गए संघर्ष के दौरान कार्यानंद शर्मा ने मुंगेर के बड़हिया टाल क्षेत्र में एक शक्तिशाली किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसमें किसानों ने 'न लगान देंगे, न बेगार करेंगे' का नारा दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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