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BPSC TRE 4.0
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भारत सरकार द्वारा संचालित 'राष्ट्रीय योजनाएँ एवं नीतियाँ' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत मैदानी क्षेत्रों में मकान निर्माण के लिए वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये तथा पहाड़ी व कठिन क्षेत्रों में 1.30 लाख रुपये कर दिया गया है, और इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2024 तक 'सभी के लिए आवास' के लक्ष्य को प्राप्त करना था।
- 2. 'जल जीवन मिशन' (JJM) के अंतर्गत वर्ष 2024 तक देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को हर घर नल से जल (Functional Household Tap Connection - FHTC) उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 55 लीटर पीने योग्य पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।
- 3. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत संचालित 'आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' (AB-PMJAY) दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो देश के लगभग 50% गरीब और कमज़ोर परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती के लिए प्रदान करती है।
- 4. 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' (NEP) 2020 के तहत स्कूली शिक्षा की पुरानी 10+2 संरचना को पूरी तरह से समाप्त करके एक नए 5+3+3+4 पाठ्यचर्या संबंधी ढांचे में बदल दिया गया है, जिसमें 3 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को शामिल किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत वित्तीय सहायता मैदानी क्षेत्रों में 1.20 लाख रुपये तथा पहाड़ी क्षेत्रों में 1.30 लाख रुपये है, किंतु इस योजना के तहत 'सभी के लिए आवास' का मूल लक्ष्य वर्ष 2022 तक निर्धारित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर वर्ष 2024 तक कर दिया गया है, जबकि अन्य सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। इस प्रकार के महत्वपूर्ण प्रश्नों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 123) और राज्यपाल की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 213) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति और प्रभाव वही होता है जो संसद द्वारा पारित किसी अधिनियम या राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, किंतु ऐसा प्रत्येक अध्यादेश संसद या राज्य विधानमंडल के पुनर्समेकन (Re-assembly) के ठीक छह सप्ताह बाद स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, यदि उससे पहले ही दोनों सदनों द्वारा उसका अनुमोदन न कर दिया जाए।
2. राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद की विधायी शक्ति के सह-विस्तारित (Co-extensive) है, अर्थात् राष्ट्रपति उस विषय पर भी अध्यादेश प्रख्यापित कर सकता है जिस पर संसद कानून बना सकती है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी परिस्थिति में अपनी इस शक्ति का प्रयोग अपने मंत्रिमंडल की लिखित सलाह के बिना कर सकता है।
3. राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने के लिए कुछ विशेष मामलों में राष्ट्रपति के पूर्व-निर्देश (Prior Instructions) की आवश्यकता होती है, जैसे यदि राज्य विधानमंडल का ऐसा विधेयक जिसके लिए राष्ट्रपति की संस्तुति आवश्यक होती, उसे कानून बनाने के लिए प्रस्तुत किया जाता, तो राज्यपाल बिना राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के उस विषय पर अध्यादेश जारी नहीं कर सकता है।
4. अध्यादेश निर्माण की शक्ति कोई 'विवेकशील शक्ति' (Discretionary Power) नहीं है, बल्कि यह कार्यपालिका के प्रमुख के रूप में मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से प्रयोग की जाने वाली शक्ति है, और न्यायालय द्वारा इस बात की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है कि क्या अध्यादेश प्रख्यापित करते समय राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा mala fide (दुराशय) या असंवैधानिक तरीकों का उपयोग किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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