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BPSC TRE 4.0
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बिहार की जलवायु, मानसून की क्रियाविधि और कृषि पद्धतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बिहार की जलवायु मुख्य रूप से मानसूनी प्रकार की है, जिसमें ग्रीष्मकाल में अत्यधिक गर्मी और मानसूनी काल में अच्छी वर्षा होती है, तथा राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रवेश मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी की शाखा के माध्यम से जून के दूसरे सप्ताह तक होता है।
  2. 2. राज्य के उत्तर-पूर्वी जिलों (जैसे किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार) में वार्षिक वर्षा का औसत सबसे अधिक (लगभग 120 सेमी से अधिक) होता है, क्योंकि ये क्षेत्र हिमालय के तराई क्षेत्र के समीप और बंगाल की खाड़ी की मानसूनी शाखा के अत्यधिक प्रभाव क्षेत्र में स्थित हैं।
  3. 3. बिहार के दक्षिणी-पश्चिमी मैदानी भागों (जैसे कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया) में राज्य के अन्य भागों की तुलना में वर्षा कम होती है, जिसके कारण इन क्षेत्रों में कृषि मुख्य रूप से पूरी तरह से वर्षा पर निर्भर है और यहाँ नहरों या नलकूपों के बिना फसल उत्पादन असंभव है।
  4. 4. राज्य में कृषि पद्धतियों के अंतर्गत मुख्य रूप से तीन फसल ऋतुएँ (खरीफ, रबी और जायद) पाई जाती हैं, जिनमें खरीफ फसल के अंतर्गत धान की खेती प्रमुख है, जिसे 'अग्रानी', 'गरमा' और 'अदहन' जैसी स्थानीय किस्मों में वर्गीकृत किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। बिहार की जलवायु मानसूनी है और बंगाल की खाड़ी की शाखा से यहाँ अच्छी वर्षा होती है। उत्तर-पूर्वी जिलों (जैसे किशनगंज) में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की जाती है। राज्य में खरीफ, रबी और जायद फसल ऋतुएँ पाई जाती हैं जिनमें धान मुख्य है। किंतु कथन 3 असत्य है क्योंकि दक्षिणी-पश्चिमी मैदानी भागों (जैसे रोहतास और औरंगाबाद) में सोन नहर प्रणाली के कारण सिंचाई की अच्छी सुविधा उपलब्ध है, अतः यह कहना गलत है कि कृषि पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है और नलकूपों/नहरों के बिना उत्पादन असंभव है। ऐसे ही महत्वपूर्ण प्रश्नों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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