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BPSC TRE 4.0
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मानव शरीर के परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) और रुधिर वर्गों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मानव हृदय में दोहरा परिसंचरण (Double Circulation) पाया जाता है, जिसके अंतर्गत अशुद्ध रक्त महाशिराओं से होते हुए दाएं आलिंद से दाएं निलय में जाता है और फुफ्फुस धमनी (Pulmonary Artery) द्वारा शुद्धिकरण के लिए फेफड़ों में भेजा जाता है, जबकि शुद्ध रक्त फुफ्फुस शिरा (Pulmonary Vein) से बाएं आलिंद और बाएं निलय से होते हुए महाधमनी के माध्यम से पूरे शरीर में पंप होता है।
- 2. रक्त समूह 'O' को 'सर्वग्राही' (Universal Recipient) कहा जाता है क्योंकि इस रुधिर वर्ग के व्यक्तियों की लाल रक्त कणिकाओं (RBC) की सतह पर 'A' और 'B' दोनों प्रकार के एंटीजन पाए जाते हैं, तथा इनके रक्त प्लाज्मा में कोई भी एंटीबॉडी (एग्लुटिनिन) उपस्थित नहीं होती है।
- 3. रुधिर वर्ग 'AB' वाले व्यक्ति के रक्त प्लाज्मा में एंटी-ए (Anti-A) और एंटी-बी (Anti-B) दोनों एंटीबॉडी अनुपस्थित होती हैं, जिसके कारण यह वर्ग किसी भी अन्य रुधिर वर्ग से रक्त प्राप्त कर सकता है, इसलिए इसे 'सर्वदाता' (Universal Donor) कहा जाता है।
- 4. आरएच कारक (Rh Factor), जिसकी खोज कार्ल लैंडस्टीनर और विनर ने रीसस बंदर में की थी, एक प्रकार का एंटीजन है; यदि Rh-धनात्मक रक्त का आधान Rh-ऋणात्मक व्यक्ति को कर दिया जाए, तो पहली बार में प्रतिरक्षी (Antibodies) के निर्माण के कारण 'इरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटेलिस' (Erythroblastosis Fetalis) जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों का विश्लेषणात्मक परीक्षण निम्नलिखित प्रकार है:
1. **कथन 1 असत्य है:** मानव हृदय में दोहरा परिसंचरण होता है, और महाशिराओं से अशुद्ध रक्त दाएं आलिंद व दाएं निलय से फुफ्फुस धमनी द्वारा फेफड़ों में जाता है तथा फुफ्फुस शिरा से शुद्ध रक्त बाएं आलिंद व बाएं निलय में आता है (कथन की संरचना में आलिंद-निलय के प्रवाह का आंशिक तकनीकी विवरण विपरीत है, अतः समग्र कथन तकनीकी रूप से भ्रामक है)।
2. **कथन 2 असत्य है:** रक्त समूह 'O' को 'सर्वदाता' (Universal Donor) कहा जाता है, न कि सर्वग्राही, क्योंकि इसकी RBC की सतह पर कोई एंटीजन (A या B) नहीं होता है, जबकि इसके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों एंटीबॉडी पाए जाते हैं।
3. **कथन 3 असत्य है:** रुधिर वर्ग 'AB' को 'सर्वग्राही' (Universal Recipient) कहा जाता है, सर्वदाता नहीं, क्योंकि इसमें एंटीबॉडी अनुपस्थित होती हैं।
4. **कथन 4 असत्य है:** 'इरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटेलिस' (गर्भलेखा कोरक्तता) की समस्या तब उत्पन्न होती है जब Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक पिता की संतान Rh-धनात्मक होती है, और यह स्थिति सामान्यतः दूसरी गर्भावस्था या उसके बाद के समय गंभीर होती है, न कि प्रथम आधान पर तुरंत।
अतः उपर्युक्त में से कोई भी कथन पूर्णतः सत्य नहीं है। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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अभिकथन (A): कोरियोलिस बल ध्रुवों पर अधिकतम और भूमध्य रेखा पर अनुपस्थित होता है। कारण (R): यह अक्षांश के सीधे समानुपाती होता है।
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भारतीय संविधान के निर्माण, इसकी प्रस्तावना और भौगोलिक अवस्थिति के अंतर्गत संघ एवं उसके राज्यक्षेत्र (भाग-I, अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 1 के अंतर्गत प्रयुक्त शब्दावली 'राज्यों का संघ' (Union of States) इस तथ्य को दर्शाती है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है, और न ही किसी राज्य को संघ से अलग होने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
2. अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, जबकि अनुच्छेद 3 संसद को किसी मौजूदा राज्य के क्षेत्र को घटाने, बढ़ाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की व्यापक शक्ति देता है।
3. अनुच्छेद 3 के तहत किसी नए राज्य के निर्माण या उसकी सीमा में परिवर्तन से संबंधित विधेयक को राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनःस्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा ऐसा विधेयक भेजने से पूर्व राष्ट्रपति के लिए संबंधित राज्य विधानमंडल के विचारों को जानना अनिवार्य है, यद्यपि राज्य का विचार राष्ट्रपति या संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होता है।
4. सर्वोच्च न्यायालय के 'बेरुबारी यूनियन वाद (1960)' में दिए गए निर्णय के अनुसार, संसद अनुच्छेद 3 के अंतर्गत अपनी सामान्य विधाई शक्ति का प्रयोग करके देश का कोई भी भू-भाग (Territory) किसी विदेशी देश को नहीं सौंप सकती है, बल्कि इसके लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सुभाषचंद्र बोस और भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सुभाषचंद्र बोस ने वर्ष 1939 के त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन में पट्टाभि सीतारमैया को पराजित कर कांग्रेस अध्यक्ष का पद प्राप्त किया था, परंतु वैचारिक मतभेदों के कारण उन्होंने त्यागपत्र दे दिया और 'फॉरवर्ड ब्लॉक' (Forward Bloc) की स्थापना की।
2. जर्मनी में प्रवास के दौरान सुभाषचंद्र बोस ने 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और 'रेडियो बर्लिन' से प्रसारण के माध्यम से भारतीयों को ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया, जहाँ उन्हें सर्वप्रथम 'नेताजी' की उपाधि से सम्मानित किया गया।
3. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा इंडियन इंडिपेंडेंस लीग और आजाद हिंद फौज (INA) की कमान औपचारिक रूप से सुभाषचंद्र बोस को सौंपी गई, जिन्होंने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में ही 'आर्गा सरकार' (आजाद हिंद कीं अनंतिम सरकार) की स्थापना की घोषणा की।
4. आजाद हिंद फौज की कुल तीन प्रमुख लड़ाकू रेजीमेंट थीं—गांधी रेजीमेंट, नेहरू रेजीमेंट और मौलाना आजाद रेजीमेंट—तथा महिलाओं की एक अलग रेजीमेंट भी बनाई गई थी जिसका नाम 'रानी झांसी रेजीमेंट' रखा गया था जिसकी कमान कैप्टन लक्ष्मी सहगल के हाथों में थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भौतिक राशियों और उनके एसआई (SI) मूल मात्रकों (Base Units) तथा पूरक मात्रकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंतरराष्ट्रीय पद्धति (SI) में कुल सात मूल भौतिक राशियाँ और उनके सात मूल मात्रक हैं, जबकि दो पूरक मात्रक (Supplementary Units) 'समतल कोण' (Plane Angle) के लिए रेडियन और 'घन कोण' (Solid Angle) के लिए स्टेरेडियन निर्धारित किए गए हैं।
2. ज्योति तीव्रता (Luminous Intensity) का एसआई मूल मात्रक 'कैंडेला' (Candela) है, जिसे 16वीं माप-तौल महासम्मेलन में परिभाषित किया गया था, और यह किसी निश्चित दिशा में प्रकाश स्रोत की उत्सर्जन क्षमता को मापता है।
3. 'मोल' (Mole) पदार्थ की मात्रा (Amount of Substance) का एसआई मूल मात्रक है, जिसके अंतर्गत यह परिभाषित किया गया है कि एक मोल में किसी पदार्थ के ठीक $6.022 \times 10^{23}$ मूल कण (परमाणु, अणु या आयन) होते हैं।
4. दाब (Pressure) और ऊर्जा (Energy) व्युत्पन्न राशियाँ (Derived Quantities) हैं, जिनके एसआई मात्रक क्रमशः पास्कल (Pascal) और जूल (Joule) हैं, तथा इन्हें मूल मात्रकों के पदों में व्यक्त करने पर दाब का मात्रक किग्रा/(मीटर·सेकंड²) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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कथन (A): ओजोन हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से रक्षा करती है। कारण (R): ओजोन एक ग्रीनहाउस गैस के रूप में भी कार्य करती है।
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