त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
18 views
किस 'मौर्य शासक' ने अपने शासन के दौरान धम्म (Dhamma) की नीति का प्रचार किया था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सम्राट 'अशोक' ने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का त्याग कर दिया था। उसने बौद्ध धर्म को अपनाया और प्रजा के नैतिक उत्थान के लिए 'धम्म' (Dhamma) की नीति का प्रचार किया। अशोक ने अपने संदेशों को अभिलेखों के माध्यम से पत्थरों और स्तंभों पर खुदवाया था, जो आज भी भारत के इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
Related Questions
→
किस देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “द ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस” नामक सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया?
→
शुष्क बर्फ क्या है?
→
मानव शरीर के परिसंचरण तंत्र (Circulatory System) और रुधिर वर्गों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव हृदय में दोहरा परिसंचरण (Double Circulation) पाया जाता है, जिसके अंतर्गत अशुद्ध रक्त महाशिराओं से होते हुए दाएं आलिंद से दाएं निलय में जाता है और फुफ्फुस धमनी (Pulmonary Artery) द्वारा शुद्धिकरण के लिए फेफड़ों में भेजा जाता है, जबकि शुद्ध रक्त फुफ्फुस शिरा (Pulmonary Vein) से बाएं आलिंद और बाएं निलय से होते हुए महाधमनी के माध्यम से पूरे शरीर में पंप होता है।
2. रक्त समूह 'O' को 'सर्वग्राही' (Universal Recipient) कहा जाता है क्योंकि इस रुधिर वर्ग के व्यक्तियों की लाल रक्त कणिकाओं (RBC) की सतह पर 'A' और 'B' दोनों प्रकार के एंटीजन पाए जाते हैं, तथा इनके रक्त प्लाज्मा में कोई भी एंटीबॉडी (एग्लुटिनिन) उपस्थित नहीं होती है।
3. रुधिर वर्ग 'AB' वाले व्यक्ति के रक्त प्लाज्मा में एंटी-ए (Anti-A) और एंटी-बी (Anti-B) दोनों एंटीबॉडी अनुपस्थित होती हैं, जिसके कारण यह वर्ग किसी भी अन्य रुधिर वर्ग से रक्त प्राप्त कर सकता है, इसलिए इसे 'सर्वदाता' (Universal Donor) कहा जाता है।
4. आरएच कारक (Rh Factor), जिसकी खोज कार्ल लैंडस्टीनर और विनर ने रीसस बंदर में की थी, एक प्रकार का एंटीजन है; यदि Rh-धनात्मक रक्त का आधान Rh-ऋणात्मक व्यक्ति को कर दिया जाए, तो पहली बार में प्रतिरक्षी (Antibodies) के निर्माण के कारण 'इरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटेलिस' (Erythroblastosis Fetalis) जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
भारत का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) किस राज्य में स्थापित किया जा रहा है?
→
प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, महाजनपद काल और मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगार निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध एवं जैन ग्रंथ प्राचीन भारत के 'षोडश महाजनपदों' की व्यवस्थित सूची प्रदान करते हैं, जिनमें मगध के अतिरिक्त वज्जि संघ को एक गणतंत्रात्मक व्यवस्था के रूप में उल्लेखित किया गया है।
2. मौर्यकाल में 'अध्यक्ष' नामक अधिकारी विभिन्न विभागों के प्रमुख होते थे, जैसे कि 'सुवर्णध्यक्ष' स्वर्ण और टकसाल का अधिकारी था, तथा 'पण्यध्यक्ष' वाणिज्य और व्यापार पर नियंत्रण रखता था।
3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार मौर्य प्रशासन में कृषि और भूमि माप के लिए 'नोमोनोई' (Nomonomoi) नामक अधिकारियों का उल्लेख मिलता है, जो सिंचाई व्यवस्था और भू-राजस्व संग्रह का कार्य करते थे।
4. संगम काल के प्राचीन तमिल साहित्य (जैसे एट्टुतोगै और पाट्टुपाट्टू) में उरैयूर और मुसिरी जैसे बंदरगाहों का उल्लेख मिलता है, जो रोमन साम्राज्य के साथ होने वाले अत्यधिक लाभदायक मलमल, मसाले और मोती के व्यापार के प्रमुख केंद्र थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.